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शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

दीपावली की शुभकामनाएँ Happy Diwali

Happy Diwali


'एक नई दिशा' की तरफ से आप सभी मित्रों को 
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ! 

Image-Google

गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

वजूद

Wajood in Hindi

रात को मैं और मेरे पति टीवी देख रहें थे ,जिसमें मुस्लिम महिलाओं के विचार और अकारण ही पुरुषों द्वारा दिए जाने वाले तलाक के विषय पर गम्भीर चर्चा चल रही थी। रिमोट मेरे हाथों में था। चूँकि मुझे न्यूज़ व राजनीतिक खबरों का ज्यादा शौक नहीं है, तो मैंने अपने पसंद के मुताबिक चैनल बदल लिया। अपने पति के कहने के बाद, ना चाहते हुए, दुबारा न्यूज़ चैनल  लगा दिया ,फिर किचन में काम करने चली गई। मेरे कानों में ख़बरों की आवाज आ रही थी। मैंने देखा, तब जाकर मुझे अहसास हुआ क़ि हमारे भारत देश की मुस्लिम धर्म की महिलाएँ जीवन भर कैसी मनोदशा से  गुजरती हैं।

ना उन्हें खुल कर जीने की आजादी है , ना पसंद के कपडे पहनने की और   सबसे कीमती जीवन जो हमारे विधाता ने हमें दी है, उसे भी मन मुताबिक जी नहीं सकती हैं। हमारे भारत वर्ष को आजाद हुए तकरीबन 70 वर्ष हो गए हैं और यहाँ पर सभी को अपना जीवन अपने तरीके से जीने का अधिकार है। महिलाओं की बात करें, तो यहाँ पर सभी महिलाओँ को  समान रूप से कानून व समाज द्वारा स्वेच्छा से अपना जीवन जीने का अधिकार है। फिर ये मुस्लिम महिलाओं के साथ क्यों भेद -भाव हो रहा है ? किसी भी धर्म में दो विवाह को करने का अधिकार नहीं दिया गया है। यदि एक पत्नी के जीवित रहते पुरुष दूसरा विवाह करता है तो कानून उसके साथ कड़क लहज़े में पेश आता है और जेल भी हो जाती है। ये मुस्लिम धर्म का कैसा न्याय है ? कैसा धर्म है ? किसी भी धर्म में किसी को कष्ट देना नहीं बताया जाता है।

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

सुकून

Sukoon in Hindi

ये तो हम सभी जानते हैं कि जीवन मुश्किलों का घर है। अगर हम इस सच्चाई से अनभिज्ञ रहें तो जीवन कितना आसान लगता है ! और यदि हम इस सच्चाई से परिचित हो जाते हैं ,तो हमारा जीवन जीना  बहुत मुश्किल हो जाता है। हमारी मनोदशा भी ऐसी हो जाती है कि मानो  सारी मुसीबतों का पहाड़ हम पर ही  टूट पड़ा है और हम इससे शायद कभी उबर ही नहीं पाएंगे। मैंने पहले भी इस प्रकार की चर्चा अपने नन्हे से पोस्ट में की थी। आपको शायद याद  भी होगा ,जो बाबा युवक को अपने सर पर पत्थर रख  कर चलने को कहते हैं। क्यों याद आया ? पर इस बार मैं आपके लिए कुछ अलग लाई हूँ। 

मैं जानती हूँ कि सभी के जीवन में कोई - न -कोई अपनी परेशानी होती है। कभी हम इसे चुटकियों में दूर कर लेते हैं , तो कभी यह हमारे सामर्थ्य से बाहर  की होती हैं।  बहुत से ऐसे भी मित्र होंगे, जो छोटी -छोटी परेशानियों से बाहर ही नहीं आ पाते हैं और इन परेशानियों के घेरे में उदास और परेशान होकर अपने जीवन को जीते जाते हैं। ये तो 16 आने सच्ची बात है कि परेशानी ना तो कभी बता कर आती है और ना ही हमारे पसन्द के मुताबिक ही होती है। और इन परेशानियों से कौन दोस्ती करना चाहेगा ? कोई भी नहीं ! क्योकि, भाई ! जिसे दोस्त बनाओगे, वो तो आपसे मिलने हर दूसरे रोज आया जाया करेगा। पर हम दूसरों की परेशानियों से दोस्ती कर लें तो ! क्या ख्याल है आपका ?  यदि हम किसी की परेशानियों को  समझकर,हमसे जो बन पड़े, अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद करें तो क्या बुराई है ? आइये, हम सभी एक अनोखे मददगार के बारे में जाने। 

सोमवार, 10 अक्तूबर 2016

दशहरा की बधाई Happy Dashara

Happy Dashara


'एक नई दिशा' की तरफ से आप सभी मित्रों को दशहरा की बधाई ! 

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गुरुवार, 6 अक्तूबर 2016

छाँव की आस

Chhav ki Aas in Hindi

हम सभी अपने जीवन में बहुत ज्यादा व्यस्त हैं।  हमारे पास जरा सा भी समय नहीं है कि हम अपने बारे में सोचें, अपनी खुशी को जिए , और जब जीवन के आखिरी समय  में  इस भाग-दौड़ में ठहराव आता है तो हमें उसे जीने की, शरीर में  ना तो शक्ति होती है और ना ही सामर्थ्य। अब ऐसे ठहराव का क्या अर्थ है ?  अगर जीवन में  यही ठहराव, जीवन के बीच में आ जाये तो ? आइये, मैं आज आपको एक ऐसी महिला से मिलवाती हूँ।

रिया एक सामान्य घर की खुले विचार वाली पढ़ी लिखी महिला थी। उसकी शादी को तीन वर्ष हो गए थे। घर में सास -ससुर, पति और 2 वर्ष के बेटे सहित उसका  खुशियों भरा संसार था। पर ना जाने ईश्वर को क्या मंजूर था ? एक  वक्त की आंधी ने रिया के खुशियों के घरौंदे को बिखेर कर रख दिया। जब उसे यह पता चला कि एक्सीडेंट में उसके पति की मौत हो गई तो परिवार की जिम्मेदारी अब रिया के कंधे पर आ गई थी। उसने अपने पति के ऑफिस में जॉब के लिए अप्लाई किया। शिक्षित होने की वजह से रिया को जॉब मिल गई। कुछ ही दिनों में रिया ने अपने जिम्मेदारियों को अच्छे से संभाल लिया।