सोमवार, 11 अक्तूबर 2021

मुस्कुराहट

 

MUSKURAHAT IN HINDI - EK NAI DISHA


हर इन्सान में एक विशेष गुण होते हैं, कुछ उनसे परिचित होते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,  जो अपने भीतर के गुणों से एकदम अनजान होते हैं। अगर उन गुणों की पहचान कर उनको निखार दिया जाये, तो वो गुण उन्हें उन्नति और प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँचा जाते हैं। 


हर व्यक्ति की एक अलग विशेषता होती है। कोई दयालु होता है तो कोई निर्भीक और कोई किसी की  मदद कर खुद में संतुष्टी का अनुभव करता है, तो किसी में अथाह धैर्य होता है।


इस समय जब चारों ओर एक भयावह वातावरण  है, नकारात्मकता फैली  हुई है, ऐसे में हमें एक-दूसरे को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की प्रेरणा प्रस्तुत करनी चाहिए ना कि किसी की कमियों को दिखाकर उसकी निंदा कर, उसे दुःखी करना चाहिए। 


किसी व्यक्ति में कमी निकालना, उस पर तंज कसना बहुत आसान होता है और कुछ लोगों की आदत में ये शामिल भी हो चुका है, पर मैं आप सभी से एक बात कहना चाहूँगी कि जब भी हम किसी की कमी को उजागर करते हैं या किसी की निन्दा करते हैं, तो हमारे चारों तरफ एक अन्जाना नकारात्मक वातावरण व्याप्त हो जाता है और हमारा मन भी अशान्ति व तनाव से भर जाता है।

मंगलवार, 28 सितंबर 2021

निराकरण

 

NIRAKARAN IN HINDI - EK NAI DISHA


हम सभी के साथ ऐसा  होता है, हर इन्सान जन्म लेता है और जन्म के साथ ही निरन्तर सीखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और सीखना वृद्धावस्था तक जारी रहती है। हमें हर पल कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। ये हम पर निर्भर करता है कि हम जीवन को सुन्दर बनाने योग्य बातें मन में धारण कर मन व जीवन को सुन्दर बना लें या फिर कुविचारों को आमंत्रण दें, जो हमारे जीवन को व्यर्थ बना देते हैं। जो विचार दूसरों को खुशी दें, ऐसे विचार अपने मन को शीतल बनाते ही हैं, साथ ही साथ आस-पास के वातावरण में रहने वाले लोगों को भी। 


सच ही किसी ने कहा है कि हमारा मन हमारा प्रतिबिम्ब होता है। हमें थोड़ा समय अपने मनरूपी प्रतिबिम्ब में अपने-आप को जरूर देखना चाहिए कि हमने क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया ? क्या सार्थक किया और क्या निरर्थक ? कहीं हमारा जीवन व्यर्थ तो नहीं जा रहा। हम अपने पीछे बीते दिनों को याद कर कहीं  अपना आने वाला कल तो नहीं बिगाड़ रहे ?


बार-बार पीछे की बातों को याद कर बीती गलतियों को सोच-सोच कर मन को परेशान कर हम अपने आप को दोषी ठहराते रहते हैं और ‘हम अभी भी जीवन में आगे कुछ अच्छा कर सकते हैं’ ऐसा सुन्दर विचार को मन में आने ही नहीं देते। ऐसे दूषित विचार से हमारा आज तो खराब होता ही है, हमारा आने वाला कल भी बिगड़ने की कगार पर आ जाता है।


तो मैं आप सभी से यही कहना चाहती हूँ कि पुरानी बीती बातों से पछतायें नहीं, बल्कि कुछ सार्थक रास्ता ढूँढें। क्योंकि हर क्षण कीमती होता है और उसे यूँ ही बर्बाद नहीं करना चाहिए। 


आइये, एक छोटी कहानी के माध्यम से सुन्दर सीख लेते हैं।

रविवार, 12 सितंबर 2021

आखिरी पड़ाव - भाग दो

 

AAKHIRI PADAV HINDI STORY part 2 - EK NAI DISHA



अभी तक आप ने पढ़ा  - आखिरी पड़ाव भाग एक

अब आगे ...


आपरेशन के लिए 10,000 डाॅलर की जरूरत है, ऐसी बात सुन सोनल ने अपने पति से कहा कि शुक्र है ! हमने बुआ का इन्श्योरेंस करवा लिया था, तो उसके पति ने उसे बताया कि बच्चे की भाग-दौड़ में उसके दिमाग से इन्श्योरेंस कराने की बात ही निकल गयी।


पर अब दोनों सोचने लगे कि 10,000 डाॅलर का इन्तजाम कहाँ से करें ? सोनल के पति ने बहुत जगह डाॅक्टरों से बात की, फिर एक अच्छी खबर मिली कि कोई डाॅक्टर 3000 डाॅलर में रानो के पैर का आपरेशन करने को तैयार था। 


रानो का आपरेशन हो गया। रानो पूरी तरह स्वस्थ्य होने के बाद घर आ गई और जब उसने अपने पैर जमीन पर रखा तो उसके पैर सीधे पड़ने की बजाय एक पैर टेढ़ा पड़ रहा था। रानो ने अपना सर पकड़ लिया। वो समझ गई थी कि वो अब अपाहिज हो गई है, उसके आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पर सोनल ने कहा- बुआ जी ! अब आप चल सकती हैं। ये क्या कम बड़ी बात है ! आप फिक्र ना करें। हम उसी डाॅक्टर से बात करते हैं।


सोनल उसे लेकर डाॅक्टर के पास गई तो डाॅक्टर ने बताया- लगता है कि हड्डी गलत तरफ से जुड़ गई है, इसका फिर से आपरेशन करके सही तरीके से लगाना  पड़ेगा और इस आपरेशन का खर्च 3000 डाॅलर  आयेगा।


डाॅक्टर की इस बात को सुनकर सोनल ने रानो से कहा- बुआ जी ! इतने पैसे हमारे पास नहीं हैं। हम खर्च नहीं कर सकते। आप वापस इंडिया चले जाईये, वहाँ आप अपना आपरेशन करा लीजियेगा। रानो यह सुनकर गहन चिन्ता में चली गयी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उसने सोच ही लिया था कि अब उसकी जिन्दगी बस ऐसे ही चलेगी।


तभी नर्स ने आवाज दी- मैडम ! डाॅक्टर आपसे मिलना चाहते हैं, वो आपका इन्तजार कर रहे हैं। सोनल तुरन्त रानो को डाॅक्टर के पास  ले गई। डाॅक्टर ने सोनल को बताया- कल ही एक हड्डी के स्पेश्लिस्ट डाॅक्टर पेरिस से हमारे यहाँ आये हैं। मैंने आपका केस उनसे डिस्कस किया है, वो आप से मिलना चाहते हैं।

रविवार, 5 सितंबर 2021

आखिरी पड़ाव- भाग एक

 

AAKHIRI PADAV HINDI STORY part 1 - EK NAI DISHA



आज घर में सुबह से ही चहल-पहल थी। आने-जाने वाले लोगों का तांता लगा था। कोने में एक बेहद सुन्दर लड़की दुल्हन की तरह सजी बैठी थी, मगर वह रो रही थी। ये आँसू विदाई के नहीं बल्कि दहेज की रकम न दे पाने और सगाई टूट जाने की वजह से थी। रानो नाम था उस प्यारी सी लड़की का, जिसके पिता से वर पक्ष के लोग अपने डाॅक्टर बेटे के ऊपर खर्च होने वाले रकम को वसूल करना चाहते थे। 


वर पक्ष के चले जाने के बाद स्थिति ऐसी थी, जैसे तूफान आने के बाद बर्बाद हुए खेतों की होती है। सभी दुःखी थे। रानो अपने तीन भाइयों में सबसे बड़ी थी। दिन बीतते गये। आज इस घटना को हुए पूरे दस वर्ष बीत गये, फिर रानो के लिए कोई अच्छा रिश्ता नहीं आया, अगर आया भी तो रानो ने उसे मना कर दिया । उसने शायद अपने दुःखों से समझौता कर अपने इस जीवन को स्वीकार कर लिया था।


वर्ष बीतते गये, अब रानो उम्र के जिस पड़ाव पर आ गई थी कि उसके लिए रिश्ता आना मुमकिन नहीं था। एक-एक कर तीनों छोटे भाईयों की शादी हो गई, सभी अपने परिवार में रम गये। रानो के पिता भी चल बसे। रानो अब अपनी माँ के साथ एक-एक कर सभी भाईयों के साथ उनके घर पर रहने लगी। 


बड़े भाई की बेटी की भी शादी हो गई और वो अपने पति के साथ अमेरिका चली गई और कुछ समय बाद उसके माँ बनने की खबर सभी को मिली। सभी बहुत खुश थे। 


एक दिन सोनल ने अपने पिता को फोन किया और उसने अपने पिता से कहा कि बुआ को मेरे पास अमेरिका भेज दीजिये, वो सब संभाल लेंगी। आपको तो पता है न यहाँ पर किसी कामवाली या बच्चे सम्भालने वाली ‘आया’ को रखुँगी तो घण्टे का चार्ज लेगी, जिससे हमारा बजट ही बिगड़ जायेगा और अगर बुआ आ जायेगी तो वो घर व बच्चे दोनों को संभाल लेगी। 


सोनल के पिता ने कहा-तुम्हारी बुआ के जोड़ों में दर्द रहता है, अगर उनको ले ही जाना है तो उनका पहले हेल्थ इन्श्योरेंस करता लो, जिससे डाॅक्टर का खर्च बच जायेगा और तुम दोनों को भी आसानी होगी।                        
 

मंगलवार, 31 अगस्त 2021

कृष्णा-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

 

HAPPY JANAMASTAMI 2021-EK NAI DISHA


'एक नई दिशा' की ओर से आप सभी को कृष्णा-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

ॐ जय श्री कृष्णा !


#KrishnaJanmashtami

Image:EK_NAI_DISHA_2021

रविवार, 15 अगस्त 2021

स्वतंत्रता दिवस 2021 की शुभकामनाएँ !

 

HAPPY INDEPENDENCE DAY - EK NAI DISHA



'एक नई दिशा' की ओर से आप सभी को स्वतंत्रता दिवस 2021 की हार्दिक शुभकामनाएँ  !

#IndiaAt75

#indiaIndependenceday

#स्वतंत्रतादिवस


Image:Ek_Nai_Disha_2021

मंगलवार, 10 अगस्त 2021

क्रोध

 

KRODH IN HINDI - EK NAI DISHA



आज मैं आप सभी से एक बहुत ही छोटी मगर बहुत ही महत्वपूर्ण भावना के बारे में बात करुँगी। ये हमारा मन बहुत ही कमाल की चीज होती है, जिसमें प्रेम, करुणा, क्रोध और ना जाने कितने प्रकार की भावनाएँ हैं। ये हमारे स्वयं की इच्छा पर  निर्भर करता है हम किस प्रकार की भावनाओं का प्रयोग करते हैं।


कभी-कभी ये भावनाएँ हमारे वश में नहीं होती हैं या फिर शायद हम इनको अपने वश में नहीं रख पाते हैं। जैसे कि अगर हमारे पास एक ऐसा कैंडीज से भरा बाक्स है, जो देखनें में एक जैसे हैं पर सभी का स्वाद एक दूसरे से अलग है। अब ये हम पर निर्भर करता है कि हम कौन सी कैंडी खायें और किसे संभाल कर रखें ? 


प्रेम और करुणा से हम दूसरों को सुख और खुशी देते हैं, पर क्रोध हमारे जीवन की वो कैंडी है, जिसमें बस एक ही स्वाद है- कड़वा, पर करेली व नीम जैसा नहीं। करेली तो स्वास्थ्यवर्धक है और नीम आरोग्य औषधी, पर क्रोध की कड़वाहत ऐसी है, जो कि जहाँ से जन्म लेती है, उसे तो कष्ट देती ही है, साथ ही साथ, आस-पास के वातावरण को भी कड़वाहट से भर देती है। जाने-अनजाने हमें खुद भी पता नहीं चलता कि हम छोटी-छोटी बातों पर कितना क्रोध करने लगे हैं।

रविवार, 1 अगस्त 2021

परवरिश

 

PARVARISH EK NAI DISHA IN HINDI



आज मैं आप सभी के समक्ष एक ऐसी स्टोरी लेकर आई हूँ जो हमारे परवरिश पर एक प्रश्न-चिह्न लगाती है। आइये पहले स्टोरी जानते हैं, आगे की बात बाद में करते हैं-


शैली एक बेहद  आधुनिक विचारों वाली महिला थी। उसे अपने स्टेटस, नाम, शोहरत से बेहद प्यार था। उसने शादी भी अपनी पसन्द से एक फोटोग्राफर से की थी। माता-पिता के मना करने के बावजूद उसने ऐसे व्यक्ति को अपना जीवन साथी बनाया था, जो उसे सूट करता था। अत्याधुनिक पाश्चात्य ड्रेस, विदेशी रहन-सहन, क्लब एवं बार में जाना, ताश खेलना, ड्रिंक करना तो जैसे उसकी दिनचर्या का हिस्सा ही थे। 


शैली एक बार क्लब में बैठी पत्ते खेल रही थी कि अचानक उसके फोन की घण्टी बजी। शैली ने खीजते हुए कहा- जब मैं बिजी होती हूँ तभी ये फोन बजता है। फिर न चाहते हुए उसकी किट्टी पार्टी की सहेलियों के कहने पर उसने पर्स से मोबाइल निकाला और  देखा तो उसमें एक अन्जान नम्बर शो कर रहा था। शैली ने न चाहते हुए फोन को उठाया। फोन पर कोई लड़की बात कर रही थी। उसने शैली से पूछा- आप शैली आण्टी बोल रही हैं न ? शैली ने ‘हाँ’ कहा, तो उस लड़की ने बताया- मैं सैमू की दोस्त बोल रही हूँ। सैमू की हालत बहुत खराब है। आप यहाँ आ जाइये। 


शैली तुरन्त ही वहाँ का पता लेकर बताये पते पर पहुँच गई। वहाँ पहुँच कर शैली के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। शैली ने अपनी बेटी को नशे में चूर पाया और उसके आस-पास सिगरेट के टुकड़े पूरे कमरे में बिखरे हुए थे। शैली ने तुरन्त सैमू को नींबू पानी उसके दोस्तों से मँगाकर पिलाया। वो जानती थी कि अगर नशे का असर कम हो सकता है तो वो नींबू पानी से ही कम हो सकता है। 


सैमू अभी पूरी तरह होश में नहीं आई थी, पर उसने आँख खोलकर अपनी माँ को देखा। शैली के होठों पर थोड़ी मुस्कुराहट आ गई। शैली समझ गई थी कि अब सब ठीक है। स्थिति नियन्त्रण में है। उसने सैमू को उसकी दोस्तों की मदद से सहारा देकर गाड़ी में बिठाया और घर लेकर आ गई। घर पहुँच कर उसने सारी बात अपने पति को बताया। 


माता-पिता दोनों बहुत परेशान थे। वे अपनी बेटी से जल्द से जल्द बात करना चाहते थे। शैली सैमू के लिए बहुत परेशान थी। 'सैमू को जबरन ड्रिंक किसने पिलाया या कहीं नशे में उसने कुछ... ?' वो इसी सोच में डूबी थी कि उसके पति ने उसे आवाज दी- सैमू को होश आ गया है, शैली, जल्दी आओ ! 

बुधवार, 21 जुलाई 2021

मेरी रसोई से-5

MERI RASOI SE-5


जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ये बारिश का मौसम है तो कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती ही रहती है। कभी-कभी तो मन करता है कि बस कुछ झटपट से बन जाये, तो हम किचन में पकौड़े बनाने चले जाते हैं पर हर दिन पकौड़ी खाना क्या एक हेल्दी आप्शन है ?  नहीं न। 


तो आज मेरी इस नई रेसिपी ‘हरियाली चाट’ को ट्राई करते हैं, जो हेल्दी होने के साथ ही साथ टेस्टी भी है।


आइये शुरु करते हैं-


सामग्री-

20 पालक के पत्ते
1 और 1/2 कप चने का आटा
1/4 चम्मच हल्दी
1 और 1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1 उबला आलू कटा हुआ
1/2 छोटा चम्मच अजवायन
1 कप दही
3 बारीक कटे हुए प्याज
4 बड़े चम्मच खजूर-इमली की चटनी
4 बड़े चम्मच हरी चटनी
2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर 
1/2 कप सेव
नमक स्वादानुसार
काला नमक स्वादानुसार।


विधि-
 

एक बाॅउल में चने का आटा लें। इसमें नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अजवायन डालें और अच्छी मात्रा में पानी डाल दें, जिससे कि इसका बैटर पतला हो जाये। इस बैटर को कुछ देर  छोड़ दें।


अब मीडियम साइज के पालक के पत्तों को धोकर अलग रख लें। दही को कपड़े से बाँधकर टाँग दें, जिससे उसका अतिरिक्त पानी निकल जाये । इस दही को एक बाॅउल में डालें और पिसी चीनी डालकर अच्छे से मिला लें।


अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। पालक पत्तों को बैटर में डालकर उसे भूरा होने तक फ्राई करें। फ्राई हो जाने के बाद इसे किसी सोखने वाले कागज पर निकाल लें। सर्व करने  से पहले इसे दो हिस्सों में काट दें। 


अब एक प्लेट में पत्तों के पकौड़ों को रखें। ऊपर से टमाटर-प्याज व एक चम्मच दही डालें। फिर सारी चटनियों को एक-एक करके डालें। उसके बाद ऊपर मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर, काला नमक छिड़कें। इसको अच्छे से सेव से ढ़क दें। 


अब पकौड़ों को दो-तीन हिस्सों में काटकर इसके ऊपर रखकर गरमा-गरम  तुरन्त सर्व करें। 


 Image:Google

गुरुवार, 15 जुलाई 2021

प्रारब्ध

 

PRARABDH IN HINDI


रीना आज  बेहद खुश थी। वह विनोद से मिलने जा रही थी। पहले कभी उसने विनोद को नहीं देखा था। उसकी दोस्ती फेसबुक पर हुई थी। पहले जान-पहचान, फिर दोस्ती और बाद में, रीना व विनोद मन ही मन एक दूसरे को चाहने लगे थे। 


रीना लाल सूट में नेट के दुपट्टे के साथ बेहद खुबसूरत दिख रही थी और उसने विनोद से सुबह 11 बजे मिलने को बुलाया था। 9 बजे से ही रीना तैयार हो कर घड़ी को देख रही थी पर समय तो बीतने का नाम ही नहीं ले रहा था। अब 11 बजने में 20 मिनट ही रह गये थे। रीना ने सोचा थोड़ा समय से पहले ही चली जाती हूँ, कहीं रास्ते में ट्रैफिक न मिले। रीना ने पर्स उठाया और अपनी स्कूटी पर निकल पड़ी। 


रीना अभी थोड़ी देर ही चली थी कि उसे सामने ब्लू शर्ट में खड़ा एक नौजवान दिखाई दिया। वो नौजवान बेहद आकर्षक व्यक्तित्व वाला था, जिससे रीना न चाहते हुए भी अपनी नजर नहीं हटा पा रही थी। उसने अपनी स्कूटी रोकी और विनाद को फोन मिलाने लगी। पर आश्चर्य की बात थी, घण्टी रीना के सामने खड़े लड़के के फोन पर बजी। 


रीना अब समझ चुकी थी कि यही विनोद है। विनोद भी रीना की सुन्दरता और सादगी पर मोहित हो गया। बात काॅफी से शुरू हुई पर उसकी मिठास दोनों के दिलों में समा गई।


अब दोनों किसी न किसी बहाने मिलने लगे और एक दूसरे के साथ जीवन बिताने का सपना देखने लगे। विनोद ने अपने माता-पिता से रीना को मिलवाया। विनोद के पैरेन्ट्स ने रीना को बहुत पसन्द किया। रीना ने भी विनोद को अपने मम्मी-पापा से मिलवाया। अब दोनों को शादी के लिए घरवालों की रजामन्दी मिल गई थी। अब बात कुण्डली मिलान की थी तो विनोद के घर पर रीना के माता-पिता और रीना सभी इकठ्ठा हुए।


शनिवार, 3 जुलाई 2021

परिवर्तन

PARIVARTAN IN HINDI



रवि और दिवाकर बहुत ही अच्छे दोस्त थे। अपना हर सुख-दुख एक दूसरे के साथ बाँटते थे, एक साथ समय बिताते और ऐसे ही एक दूसरे को जानते हुए उन्हें बीस वर्ष हो गये । ये बचपन के दोस्त जो थे। अब एक ही कम्पनी में जाॅब भी करते थे। पर एक दिन दिवाकर के मोबाइल में एक लड़की की तस्वीर देखकर रवि हैरान रह गया। उसने दिवाकर से प्रेम -प्रसंग छुपाकर रखने के कारण थोड़ा गुस्सा भी दिखाया। पर दिवाकर ने कहा- "मैंने इसकी थोड़ी मदद कर दी थी तो बस दोस्ती हो गयी, यार रवि जब कुछ ऐसा होगा तो, मैं सबसे पहले तुझे बताऊँगा।" 


पर रवि की आँखों में उस लड़की का चेहरा समा गया था। मन ही मन वो उसे चाहने लगा था। फिर एक दिन अचानक उस लड़की से रवि की मुलाकात हो गई। 'माया' नाम था उसका। वो किसी से ज्यादा मेल-मिलाप ना रखने वाली लड़की थी। पर दिवाकर का नाम सुनकर दोस्ती करने को तैयार हो गई और यह दोस्ती धीरे-धीरे कब प्यार में बदल गई ये रवि और माया दोनों को ही पता नहीं चला। 


एक दिन रवि ने माया से अपने दिल की बात कह दी पर माया ने शादी की बात को टाल दिया। फिर एक दिन अचानक लखनऊ जाने की बात कह कर चली गई और फिर उसका कोई अता-पता नहीं चला। रवि ने दिवाकर से अपने और माया के बारे में सारी बात बता दी तो दिवाकर से उसे उस कम्पनी का नाम और फोन नम्बर मिला जहाँ माया काम करती थी। कम्पनी ने उसे माया के घर का नम्बर दिया। रवि ने उसे घर पर फोन किया तो माया ने फोन उठाया और उसने कहा कि उसके पापा को हार्ट अटैक आया है और बीमार  हैं। वो उसकी शादी अपने दोस्त के बेटे के साथ जल्दी कराना चाहते हैं, जो एक अच्छी जगह पर जाॅब करता है। उसकी सैलरी बहुत अच्छी है, घर बहुत बड़ा है।  माया उस अन्जान शख्स के तारिफों के पुल बाँधती रही और रवि सुनता रहा। 

बुधवार, 23 जून 2021

अभिलाषा

 

अभिलाषा


सच कितना सुन्दर है यह हमारी अभिलाषा पर निर्भर करता है। पर कभी-कभी इसके परिणाम बहुत कष्टकारी हो सकते हैं। क्या हमनें कभी अपने चाहतों पर लगाम लगाई है ? शायद नहीं। दूसरों के अच्छे कपड़े देखे तो बढ़-चढ़ कर खरीदारी की। बड़ी गाड़ी देखी तो उसे पास होने की चाहत की। कोई नया मोबाइल देखा तो उसे पाने की चाहत की। और न जाने क्या-क्या ? 


ये चाहत रुपी राक्षस हमारे मन और दिलो-दिमाग पर इस प्रकार वार करता है कि हमें खुद भी समझ में नहीं आता कि हम न चाहते हुए भी कई बार शापिंग-माॅल से ऐसी कई चीजों को घर पर उठा लाते हैं, जिसकी ना तो हमें आवश्यकता होती है और ना ही जिन्दगी में जरुरत।


इसी ‘अनचाही अभिलाषा’ पर आप सभी के सामने प्रस्तुत है, एक छोटी सी स्टोरी, जो इसकी निरर्थकता को व्यक्त करती है।

शनिवार, 12 जून 2021

प्रतिबिम्ब

प्रतिबिम्ब


रावी आज सुबह से ही अपने खिड़की पर खड़ी होकर बाहर देख रही थी। आज उसे बाहर का मौसम बहुत ही सुहाना लग रहा था। तभी किसी ने उसे पुकारा, ‘‘रावी ! क्या बात है मैडम, कब तक इस मौसम का अकेले-अकेले लुफ्त उठाईयेगा ?’’ अचानक उसकी तन्द्रा टूटी। उसने पीछे देखा । ये कोई और नहीं बल्कि उसका पति विजय था। रावी को धीरे से विजय ने पकड़कर कुर्सी पर बिठाया और प्यार से थोड़ी डाँट लगाई, ‘‘डाॅक्टर ने आपको चलने-फिरने व बहुत देर तक खड़े रहने को मना किया है। आप को जो कुछ चाहिए, बस फरमाइये, बंदा आपकी खिदमत में लेकर हाजिर हो जायेगा।’’ 


विजय की ऐसी बातों से रावी के होठों पर मुस्कुराहत आ गई। विजय ने सूप के बाउल को हाथों से उठाया और रावी को एक चम्मच सूप पिलाना चाहा । रावी की आँखों में आँसू आ गये। आखिर क्या वजह थी कि रावी के इन आँसुओं की ?

 आइये पीछे की कहानी जानते हैं।


रावी बचपन से ही बेहद खुशमिजाज व खुबसूरत दिखती थी। उसने अपनी माँ की तरह हर चीज को सुव्यवस्थित रखना सीखा था। उसे वो हर चीज जो खूबसूरत व अच्छा दिखती थी, बहुत पसन्द आती थी। किसी भी चीज में जरा सी खामियों से वह चिढ़ सी जाती थी। यहाँ तक कि उसके कितने ही प्रिय खिलौने ही क्यों न हों,  जरा सा दाग या धूल लगने पर वह उसे फेंक दिया करती थी। रावी के माता-पिता उससे बहुत प्यार करते थे। जो भी चीज उसे पसन्द आती थी वे उसे वह चीज लाकर दे देते। 




रावी दिन-प्रतिदिन बड़ी होती गई और वह पहले से भी ज्यादा खुबसूरत और स्मार्ट दिखने लगी थी। उसने सभी दोस्त ऐसे बनाये थे, जो दिखने में उसके रंग-रूप व पहनावे के अनुरूप थे। रावी अब विवाह के योग्य हो गयी थी। एक से एक बड़े घरों के रिश्ते आये, मगर रावी को किसी में  कुछ कमी नजर आती तो किसी में कुछ, जिसकी वजह से उसकी उम्र भी बढ़ती जा रही थी और साथ ही साथ उसके पिता की चिन्ता। 

शनिवार, 29 मई 2021

डायरी के पन्नों से-5


 जब हम अधिकांश समय घर में ही व्यतीत कर रहे होते हैं या फिर हमारे घर के सदस्य ‘वर्क फ्राम होम’ में व्यस्त होते हैं तो घर के छोटों व बड़ों से कभी कुछ तो कभी कुछ खाने की फरमाइश होती रहती है। आइये चलिए जानते हैं कि अपने चटोरे मन को शांत करने के लिए तथा अपने खाने का जायका व स्वाद बढ़ाने के लिए छोटी-छोटी किचन-टिप्स क्या हैं ? 


ये सारी टिप्स आपके बहुत ही काम  आने वाली हैं।  बस इन्हें एक बार आजमाकर देखिये -


- डोसे को क्रिस्पी बनाने के लिए घोल में नमक के साथ एक चुटकी चीनी भी मिलायें।


- नमकपारे के आटा या मैदा गूँघते समय उसके घी और नमक के साथ थोड़ी सी सूजी मिला दें तो नमकपारे बहुत स्वादिष्ट बनते हैं।


- पनीर की सब्जी बनाने जा रहे हैं तो पनीर को दो मिनट गर्म पानी में उबाल लें, इससे स्वाद बढ़ जायेगा।


- दही बड़े के बैटर में एक उबला आलू मिलाया जाये तो दही बड़े एकदम साफ्ट बनते हैं।


शुक्रवार, 14 मई 2021

विवेक

 

विवेक

हम सभी ने गाँधी जी के द्वारा कही ये बात सुनी व पढ़ी होगी कि अहिंसा  ही हमारा सच्चा धर्म होना  चाहिए। कोई अगर एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर देना चाहिए। मैं गाँधी जी के विचारों व उनके नजरिये को गलत नही ठहरा रही, क्योंकि गाँधी जी मेरे लिए भी पूजनीय हैं। पर मैं बस अपना नजरिया रख रही हूँ कि क्या ऐसा करने से कोई तीसरी बार हमें थप्पड़ नहीं मारेगा ? क्या गाँधी जी के अहिंसा के इस विचार में इतनी शक्ति है कि क्या हमारा ऐसा कार्य उस व्यक्ति के हृदय को परिवर्तित कर सकता है ?
 

परिधी हमेशा से अपने माँ की अच्छी व सच्ची बेटी थी। परिधी की माँ ने हमेशा ही उसे विनम्रता का पाठ पढ़ाया, उसे ही सुनकर वह बड़ी हुई थी। परिधी स्कूल से कालेज जाने लगी थी। एक दिन परिधी बेहद परेशान थी। सुबह से वह अपने कमरे सं बाहर भी नहीं आई थी। माँ ने परेशान होकर दरवाजे पर दस्तक दिया-“परिधी ! क्या बात है ? सुबह से ही तुम रुम में हो। कितना पढ़ाई करोगी ? बाहर आ जाओ। कुछ खा लो।” माँ को परेशान देख परिधी ने दरवाजा खोल दिया। परिधी की आँखें नम थीं। उसने  कहा, “माँ ! आप ने आज तक मुझे जो कुछ बताया  वह गलत बताया। माँ आप तो कहती थीं कि विनम्रता से पत्थर को भी पिघलाया जा सकता है। हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिये” और यह कहते हुए वह रोने लगी। 

गुरुवार, 6 मई 2021

कोरोना को हराना, हमनें है ठाना

 

कोरोना को हराना, हमनें है ठाना


जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यह समय सभी के लिए कितना मुश्किलों भरा है, कोरोना जैसी महामारी के कारण किसी को पैसे की परेशानी है तो किसी को स्वास्थ्य की और कोई अपने परिवार के पास जाने के लिए दिन-रात मौत से लड़ाई करने को तैयार हैं तो कोई अपनों से दूर कहीं बेहद अकेला गुमसुम उदास  बैठने को मजबूर है। इस कोरोना ने सभी को दुःखी किया-क्या बच्चे, क्या बड़े और  क्या बुजुर्ग ?


पर अब समस्या आ गई है तो हम उसके सामने घुटने तो नहीं टेक सकते । हमारी लड़ाई उस न दिखने वाले दुश्मन से है और हम सब मिलकर उसे हराने की कोशिश करेंगे और हार नहीं मानेंगे। पर  ऐसा  हम कैसे कर सकते हैं ? ऐसा दुश्मन जो दिखता नहीं, जिसके हाथ नहीं, शरीर  नहीं, जिसे मार नहीं  सकते ।


तो दोस्तों ! इस दुश्मन को हम खुश रहकर, अपना  ख्याल रखकर, अपने आप  से प्यार करके, अपनी पुरानी संस्कृति का पालन कर, थोड़ी खुशियाँ बाँटकर इसे मुँह की खाने पर  मजबूर कर सकते  हैं।


आज मैं आप सभी से कुछ छोटी-छोटी सावधानियाँ और कुछ अनूठे प्रयोग रख रही हूँ , जिसे हम रोजमर्रा की जिन्दगी में शामिल कर लें तो इस दुश्मन से लड़ने के लिए एक योद्धा की तरह तैयार हो सकते हैं। 



रविवार, 25 अप्रैल 2021

नव-सृजन

 

NAV-SRIJAN IN HINDI

जब कोई हमें दर्द देता है, आहत करता है तो हमें ऐसा लगता है कि हमारे दिल में गाँठ सी बन गई है और गाँठ दिन-प्रतिदिन और भी मजबूत होती जाती है। यदि हम उसे नहीं खोलते हैं, उसे यूँ ही बना रहने देते है तो परेशानी बढ़ जाती है। यदि हम उस व्यक्ति को माफ कर दें तो हमें लगता है कि जैसे भूमि पर नये पुष्पों का सृजन हुआ और उन पुष्पों की कोमलता व सुन्दरता हमारे दिमाग व दिल को ठंडक पहुँचा रही हो। हम अपने भीतर एक नये ‘स्व’ का सृजन होते हुए पाते हैं, जो कुछ नया सोचता है, कुछ नया कर दिखाने की चाह रखता है, जो हमें दोबारा नयी उम्मीद देता है-खुद को महसूस करने की। 


यदि किसी की कही बात आपके मन को दुःख पहुँचा रही है और आपको लगता है कि वो आपका भला नहीं चाहता है, आपका शत्रु है तो ऐसी भावना आपके मन को विष से भरने का कार्य करती है, जो सिर्फ एक ही कार्य से ठीक हो सकती है कि उस इन्सान को माफ कर दिया जाये, जिसने आपको दुःख पहुँचाया है- पर पूरे हृदय से और पहचान करिये उन शक्तियों को जो ईश्वर ने जन्म के बाद निरन्तर  आपको प्रदान की है।

शनिवार, 10 अप्रैल 2021

मेरी रसोई से-4

 जय माता दी ! 

आप सभी जानते हैं कि नवरात्री शुरु होने वाली है और हम सभी व्रत करते ही हैं पर वही पुराने नाश्ते व खाने से, जो प्रायः हम व्रत-त्यौहारों में बनाते हैं, हम खा-खा कर बोर हो जाते हैं। तो आज मैं आप सभी के लिए लेकर आयी हूँ बिल्कुल नया व चटपटा फलाहारी नाश्ता, जिसे आप खाकर इतना पसन्द करेंगे कि रोज ही बनाना चाहेंगे। तो आइए शुरु करते हैं, और अगर आपको पसन्द आए तो आप अपना  फीडबैक जरुर दें।


फलाहारी डोसा

सामग्री-

1. डोसा बनाने के लिए

1 कप समा चावल

1/4  कप साबूदाना मीडियम साईज




2. फिलिंग के लिए

2 उबले आलू मैस किये हुए

सेंधा नमक स्वादानुसार

जीरा 1 चम्मच

हरा धनिया बारीक कटा-1 चम्मच

धनिया पाउडर- 1/2  चम्मच

काली मिर्च- 1/4  चम्मच

हरी मिर्च बारीक कटी हुई- 1/4  चम्मच

ड्राई फ्रूट बारीक कटे हुए


विधि- 

1. डोसा बनाने के लिए- समा के चावल व साबूदाने को मिक्सी में ग्राइंड कर के एक दम बारीक कर लें, फिर उसे एक बाउल में निकाल लें और थोड़ा गुनगुना पानी डाल कर 20 मिनट छोड़ दें।


2. फिलिंग के लिए- एक कड़ाही गर्म कर उसमें आवश्यकतानुसार तेल डालें। फिर जीरा व हरी मिर्च को फ्राई करें। बाद में मैस किए हुए आलू को डालकर भूने और सारे बचे मसाले व नमक डालकर अच्छे से फ्राई करें। आखिर में ड्राई फ्रूट्स व हरी धनिया डालें।


अब डोसा बैटर में स्वादानुसार नमक डाल दें और डोसा बैटर थोड़ा गाढ़ा होने पर गुनगुना पानी मिला कर बैटर को पतला कर लें। तवा गर्म हो जाने पर, तवे पर तेल लगा कर, तेल को तवे पर एक समान फैलाएँ। डोसा बैटर को एक चम्मच से डाल कर तवे पर पतला  फैलाएँ और  थोड़ा लाल हो जाने पर आलू मिक्चर को ऊपर से डालें व डोसे को रौल करें एवं लाल कुरकुरा होने तक सेकें।


लीजिए तैयार  हो गया आपका फलाहारी डोसा। इसे नारियल की चटनी के साथ सर्व करें और नवरात्री पर्व का आनन्द उठाएँ।


रविवार, 4 अप्रैल 2021

मूल्य जिंदगी का !

MOOLYA JINDAGI KA STORY IN HINDI


 सौम्या सुबह-सुबह बहुत ही परेशान थी। उसने न ठीक से नाश्ता किया और ना ही किसी काम में उसका मन लग रहा था। वह कभी इधर तो कभी उधर टहल रही थी। उसकी मनोदशा देखकर कोई भी जान सकता था कि वह बहुत परेशान है। पर क्या था उसकी परेशानी का कारण ? उसे यूँ परेशान उसकी माँ हमेशा ही देखती थी, क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर परेशान होना उसका स्वभाव ही बन गया था। पर इस बार उसकी दादी माँ गाँव से उसके घर उसके पास रहने आई थी। 


दादी से सौम्या की परेशानी देखी न गई और उन्होंने सौम्या को अपने पास बुलाया और अपनी गोद में सौम्या का सर  रखा। सौम्या ने अपनी परेशानी दादी से कह दी।  उसने बताया कि उसने दसवीं व बारहवीं कक्षा तो बहुत ही अच्छे नम्बर  से पास कर लिया पर बी.ए. फस्ट ईयर की परीक्षा में  उसे फेल होने का डर लग रहा हैै। उसने कहा कि अगर वह  फेल हो गई तो वह अपनी जान दे देगी और ऐसा कहकर वह रोने लगी। दादी माँ ने उसे ऐसे परेशान कभी नहीं देखा था। 


उन्होंने एक दम से कहा,‘‘तो फिर बेटा परिणाम का इन्तजार क्यूँ ? अभी दे दो अपनी जान, खतम कर दो अपनी जिन्दगी। अगर तुम्हें अपने परिणाम पर भरोसा नहीं है तो इन्तजार किस बात का ? पर क्या तुमने कभी सोचा है

सोमवार, 29 मार्च 2021

होली है !

HOLI HAI


सबसे पहले मैं अपने सभी मित्रों को होली की शुभकामनाएँ देना चाहती हूँ। कितनी खुशियों का त्यौहार है ये होली ! ये होली, ये रंग, ये रंग भरे चेहरे, मिठाईयाँ, गुलाल और ना जाने क्या-क्या ? हम सभी को न जाने कितनी खुशियाँ दे जाती हैं ये । अगर ये ना हो तो हमारी भागम-भाग भरी जिन्दगी में वक्त ही नहीं है कि हम खुद के लिए जी सकें। नहाना-धोना तो हम रोज ही करते हैं पर रंगो से सराबोर होने में जो आनन्द आता है, उसकी तो कोई तुलना ही नहीं है।




इसी बहाने हम ना जाने कितनी सुन्दर यादों को अपने जेहन में समेट लेते हैं, जो हमारे जीवन जीने की वजह होते हैं। इन रंगों का अर्थ ही यही है कि हम सब एक हो जायें। पर कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं, जो  रंग जाने के बाद भी अपने मन की मैल रुपी कालिमा को वैसे ही बनाये रखते हैं और इस खूबसूरत त्यौहार को अपनी बुरी हरकतों से बुरा और बदसूरत बना देते हैं। मैं ऐसे सभी लोगों से कहना चाहती हूँ कि किसी के जीवन में खुशियों के रंग भरिये, आँसू और दुःख के नहीं। यही होली त्यौहार का वास्तविक संदेश है।


आप सभी को रंगो के इस पर्व होली की एक बार फिर से हार्दिक शुभकामनाएँ।


Image:Google 

शनिवार, 20 मार्च 2021

तपिश की ठंडक

 

TAPISH KI THANDAK IN HINDI


मैं इस पोस्ट के द्वारा आप सभी के समक्ष एक बहुत महत्वपूर्ण टाॅपिक पर अपनी बात रखना चाहती हूँ , जिस पर हम सभी कभी ध्यान नहीं देते हैं या इस पर किसी के द्वारा कही गई बात अथवा सलाह शायद हमें अच्छी नहीं लगती है। हम सभी ने अपने बचपन में अपने माता-पिता को हमारी बहुत सारी महत्वपूर्ण माँगों के लिए अवश्य ही उन्हें न कहते पाया होगा, कभी दोस्तों की अच्छी चीजों को अपने पास भी होने की चाह में पिता के द्वारा मना कर देने से उन पर कभी हम क्रोधित भी हुए होंगे तो कभी दुखी। 


कभी उनकी  बिना वजह की रोक-टोक, तो कभी नाहक नाराजगी भी अपने ऊपर देखी होगी, जो हमें कभी पसन्द नहीं आई। माँ की डाँट में ‘फिक्र‘ और पिता के डाँट में ‘हमारे जीवन को सुन्दर और बेहतर बनाने की सीख‘ को हम हमेशा नजरअंदाज कर देते थे, पर उन बातों में हमारे लिए पूरे जीवन को मुश्किलों से लड़ने की जो सीख होती है, ये हम नहीं समझते हैं।


मैं अपने जीवन के तजुरबे से कह सकती हूँ कि हम सभी के माता-पिता ने हमारे लिए जो कुछ किया, हमें उसके लिए उन्हें दिल से धन्यवाद कहना चाहिए, ना कि उन्हें दोषी ठहराना चाहिए। 

गुरुवार, 11 मार्च 2021

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ

 

MAHASHIVRATRI IN HINDI


'एक नई दिशा' की तरफ से आप सभी मित्रों को 'महाशिवरात्रि' पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ !



Image:Google

सोमवार, 1 मार्च 2021

अंतर्मुखी

ANTARMUKHI IN HINDI


इस बात को हम सभी जानते हैं कि हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। हमे आँख, नाक, मुख, हाथ-पैर और जुबान तो जन्म से मिल जाते है, बस उनके विकास और अनुपात में वृद्धि होती है। पर एक ऐसी चीज जो इस दुनिया में अनमोल है, जो हमें ईश्वर के द्वारा नहीं बल्कि अपने चित्त और विवेक से प्राप्त होती है - वो है हमारा स्वभाव,  हमारा सभी के साथ पेश आने का तरीका, जिससे उस व्यक्ति की पहचान, नाम से कहीं ज्यादा उसके बर्ताव से दूसरे व्यक्ति के मन मस्तिष्क में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। जिसे हम 'सुव्यवहार' भी कह सकते हैं।


ऐसा वास्तविक में है और हम सभी ने देखा होगा कि किसी-किसी का स्वभाव होता है कि कुछ लोग अपने मन की बात को किसी के साथ सहजता से शेयर कर देते हैं और कुछ लोग ऐसे व्यवहार के भी होते हैं जो अपने भीतर अथाह बातों को सँजोकर रखते चले जाते हैं। जैसे मन ना हुआ स्टोर-रूम हो गया, जहाँ हम अपने पुराने सामानों को सहेज देते हैं। ऐसे व्यक्ति 'अंतर्मुखी' होते हैं, उनके भीतर की झिझक उनको किसी के सामने अपने दिल की बात रखने ही नहीं देती। उनके दिल में इतना डर समाया रहता है जिसकी वजह से वह अपने मन की बातें किसी से शेयर करना ही नहीं चाहते हैं। पर यहाँ मैं आप सभी से ये कहना चाहती हूँ कि प्रत्येक व्यक्ति को यह बात समझना बहुत आवश्यक हैं कि अपने व्यवहार में सन्तुलन रखना हमारे ही वश में होता है। हमें ना तो अधिक 'अंतर्मुखी' होना चाहिए और ना ही बहुत अधिक 'बहिर्मुखी'।

शनिवार, 16 जनवरी 2021

लॉकडाउन

 

LOCKDOWN IN HINDI


आज मैं लाॅक-डाउन के बारे में आप सभी से अपनी कुछ बातें शेयर करना चाहती हूँ , वैसे तो कहने को दो शब्द ही हैं, पर इस छोटेे से दो शब्दों ने हमारी पूरी जिन्दगी को हिलाकर रख दिया और हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम सभी अपने परिवार की तरफ जरा भी ध्यान नहीं दे रहे हैं, उनकी भावनाओं को नजर-अंदाज कर रहे हैं। 


इस लाॅक-डाउन को हम सभी नें पूरे दिल से स्वीकारा व हमारे देश में इस महामारी को रोकने में, जहाँ तक हो सका, हम सभी का प्रयास सराहनीय रहा। पर इस कोरोना काल ने हमें एक शिक्षा जरुर दी- अपने और परायों की, जो हमारे अपने थे, उन्होंने अपने साथ-साथ हमारे जीवन का भी ख्याल रखा। सामाजिक दूरी बना कर कुछ अनुभव कड़वे रहे और कुछ अनुभव मीठे। जाने-अनजाने उन पति देवों को सबक मिला, जो महीने में एक बार घुमाने का प्रोग्राम बना कर कैंसिल कर देते और कहते कि घर में रहो, क्या परेशानी है ? उनको हम महिलाओं का दर्द पता चला कि हम कैसे 24 घंटे बिना सैलरी के काम करते हैं और होठों पर मुस्कान लाते हैं। 


वो बुजुर्ग माता-पिता जिनको अपने बच्चों के साथ एक पल भी सुकून से चाय पीने का मौका नहीं मिलता था, वो सारे ख्वाब कोरोना-देव ने पूरा कर दिया। वो जिनको अपने घर आने का वक्त नहीं था, वो अपने घर आने को तरसे और उनको यह बात अच्छी तरह से समझ में आई कि घर तो घर ही होता है- ऐसा सुकून और सुरक्षा, और कहाँ !

शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

मंथन

MANTHAN IN HINDI

 

आज कितने दिनों के बाद फिर से मेरी इस डिजिटल की-बोर्ड रूपी कलम ने मुझे पुकारा और कहा कि क्या तुम मुझे भूल गई ? मैं तुम्हारी पुरानी दोस्त, जो तुम्हारे हर खट्टी-मीठी यादों की साझीदार, मुझे आज फिर से अपने हाथों में थामों, मुझे फिर से अपने छुअन से जीवन्त होने का एहसास कराओ। 


बस फिर क्या था ! मैंने उतारा अपनी परेशानियों और फिक्र का थैला और फिर से अपनी कलम से कर ली दोस्ती और इस ब्लाग के माध्यम से आप सबके सामने अपनी लेखनी के साथ पुनः प्रस्तुत हो गयी। 


सच में, मैं अपने एहसास के माध्यम से यह बात बताना चाहती हूँ , जब भी हम परेशान होते हैं, हमें कुछ भी समझ में नहीं आता है और मन में कैसे-कैसे अच्छे-बुरे ख्याल हमें घेर लेते हैं, उस समय हमें एक अच्छे दोस्त की आवश्यकता होती है, जो हमें सुने, जिससे हम अपनी बातें कह कर अपना मन हलका कर सके। पर सभी इतने खुशनसीब नहीं होते कि ऐसा शख्स उनके पास हो, जिनसे वो अपना दुःख-दर्द मिल बाँट कर अपना मन हल्का कर सके। तो ऐसे में हमें खुद को अपना दोस्त बना लेना चाहिए।