☀ ♥ अप्रैल , 2024 : दिन - :: ♥ ♥ : ''एक नई दिशा' में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन है ! -- जय श्री राम !॥ !♥ ♥" ♥☀ ♥

गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

अल्हड़पन

 हमने बच्चों को अक्सर खेलते हुए देखा होगा। कितनी ऊर्जा होती है उनके भीतर ! दिनभर हँसते  मुस्कुराते रहते है। उनके नन्हे कदम दिन-रात दौड़ते रहते हैं,फिर भी नहीं थकते। बच्चों के चेहरे देखकर ऐसा लगता है, जैसे ईश्वर ने उन्हें सारी खुशियाँ दे दी हैं। वो कितनी सुकून भरी जिंदगी जीते हैं ! 

बच्चों के वह खेल -खिलौने, वह बोतलों के ढक्क्न ,वह माचिस की डिबिया, वो नन्हे बर्तनों का पिटारा ,छोटी सी कार जिसमें दुनियाँ की सैर करते रहते हैं। बच्चों का जीवन भी क्या जीवन होता है ! हर कार्य को करने का कितना उत्साह भरा होता है उनमें !  पर ये ऊर्जा बड़े हो जाने पर कहाँ  खो जाती है ? 

हमने नन्हे बच्चे को देखा होगा,  जो अपने पराये का भेद नहीं जानते। जरा सा किसी का इशारा क्या मिला, खिलखिला कर हँस देते हैं। वो मासूम मुस्कराहट ऊँच-नीच ,गरीबी-अमीरी, अपने-पराये से कितनी अछूती है। और हम बड़े जब भी किसी से बात करते हैं, तो हम हमारे मन में मंथन करते रहतें हैं कि वह कैसा है ? हमारा क्या लगता है ? उसका स्टेटस कैसा है ? वगैरा -वगैरा। 

हम भी काश उन नन्हे बच्चों की तरह मासूम व स्वच्छ सोच रख पाते। ये नन्हे बच्चे हर कदम पर हमें ना जाने कितना कुछ सिखा जाते हैं । आपस में लड़ते -झगते हैं, फिर अगले ही पल सारी बातों को भुला कर ऐसे घुलमिल जाते है, जैसे कि  उनके बीच कुछ हुआ ही नहीं।

हम बड़े इतने बुद्धिमान, परिपक्व हो जाने के बावजूद, अगर हमें  किसी ने जरा सी ऐसी बात कह दी, जो हमें पसंद नहीं आई, तो नाराज होकर बैठ जातें हैं।   दोबारा उन रिश्तों की तरफ मुड़ कर देखना भी नहीं चाहते हैं। हम बच्चों को हमेशा नासमझ समझते रहते हैं। पर क्या बच्चे सचमुच नासमझ होते हैं ? हमारी समझदारी से बेहतर उनकी नासमझी है, जो हमें पल भर में दूसरों को माफ़ कर दुबारा प्रेम करना सिखा जाते हैं।

बात चंद हफ्ते पहले की है।  मेरे घर गर्मी की छुट्टी मनाने बच्चे आये थे। उसी शाम मेरे घर पर काम करने वाली महिला भी अपने दो नन्हे बच्चों के साथ काम करने आई। हम सभी नाश्ता कर रहे थे। हमने उस महिला को अपने बच्चों के साथ गैलरी में बैठने को कह दिया ,और सभी नाश्ता -चाय में मशगुल हो गए। 

फिर क्या था ! हम सभी की नजर घर के सबसे छोटे बच्चे पर पड़ी। वह अपनी प्लेट कही ले जा रहा था। हमने उसे डांटा और उसे रोकने के लिए पीछे गए। तो देखा कि वह बच्चा काम करने वाली महिला के बच्चों के साथ अपना नाश्ता शेयर करने लगा। हमने उस बच्चे  को डांटा। फिर दूसरी प्लेट में काम वाली के बच्चों को खाने को दिया।

और जब मैं अकेले में बैठी तो सोचने लगी- आज जो काम 3 वर्ष के बच्चे  किया ,ऐसा हम  सभी क्यों नहीं कर पाते  हैं ? वो निष्छल सोच हम सभी के अंदर  क्यों   नहीं आती है ? ऐसा इसलिए है, क्योंकि  हमने खुद  अपने आगे -पीछे, ऊँच -नीच ,अमीरी -गरीबी का ऐसा  घेरा बना लिया है कि जिसे तोड़ पाना  सम्भव नहीं है। क्योकि अब  हम नासमझ थोड़े ही  रहे, जो ऐसा  करेंगे ! अब तो हम समझदार हो गए है ,बेहतरीन समझदार। 

शनिवार, 24 जून 2023

ख्वाहिशें !

KHWAHISHE IN HINDI - EK NAI DISHA 2023


सपने कौन नहीं देखता ?  हर शख्स के आँखों में एक सपना होता है - कुछ कर दिखाने का । बहुत से ऐसे Lucky Person  होंगे, जिनके ऊपर अपने माता-पिता व ईश्वर का आशीर्वाद होता है और जो अपने सपने को पूरा कर पाते  हैं। कुछ लोग  जीवन में  परेशानियों  का  सामना करते-करते, उनके सपने उनकी खुद की नजर से धुंधले हो जाते हैं। 

उनके कन्धों पर जिम्मेदारियों का इतना बोझ होता है कि बस उसे निभाने में दिन रात लगे रहते हैं,  अपना सपना पूरा करने की  उनकी बारी आ ही नहीं पाती। ऐसे भी लोग होते हैं, जो सपना देखने से डरते हैं कि वो ना जाने पूरे हो सकेंगे या फिर नहीं। पर क्या हमें सपना देखना छोड़ देना चाहिए ?

हम मन में अपने कैरियर बनाने का सपना लिए बड़े होते हैं और जब निराशा हाथ लगती है तो मन बहुत परेशान हो जाता है। कैरियर बनाने का सपना सच करने के लिए न सिर्फ कठिन परिश्रम बल्कि अच्छी सूझ -बुझ का होना भी बहुत  अनिवार्य है। आगे एक Story पढ़िए, जो इसी तथ्य को दर्शाती  है । 

एक बुजुर्ग महिला की सूई खो गई थी। वो उसे रोड लाइट की रौशनी में ढूंढ रही थी। मगर उसके लाख प्रयत्नं करने के बाद भी उसको सूई नहीं मिल पा रही थी। तभी उस रास्ते से गुजर रहे एक युवक ने उस महिला की परेशानी जानकर वो उस महिला की सूई को ढूंढने लगा। देखते -ही -देखते, गाँव के सभी लोग उस महिला की सूई ढूंढने लगे। फिर भी सूई नहीं मिली। थोड़ी देर के बाद एक युवक ने महिला से पूछा," माता जी ! आपकी सूई वैसे  गिरी कहाँ थी ? हमें बता दीजिये, ताकि सूई जल्दी मिल जाये।" 

शनिवार, 20 मई 2023

जीवन के रंग

 

JEEVAN KE RANG IN HINDI - EK NAI DISHA 2023 
 
अपने जीवन में  प्रतिदिन हमने दिन -रात होते देखा होगा . बस हमारा मन भी इसी दिन -रात  की तरह ही है। कभी खुशियों का प्रकाश हमारे होठों  मुस्कराहट देता है, तो कभी गम के गहरे अंधियारे में हम कहीं खो जाते हैं। और जाने कब हमारे आँखों से आसूं छलक जाते हैं ? हमारा इन भावनाओं पर कोई वश नहीं होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कि  सूर्य उदय होने पर सूरज की किरणों को कोई धरती पर आने से कोई रोक नहीं सकता चाहे कितना भी घना कोहरा क्यों ना हो।

ये जीवन भी उसी प्रकार है इसमें परेशानियाँ ,सुख -दुःख, धूप छाव की तरह ही आते रहते हैं। जिन लोगो ने भी जन्म लिया है वो इन भावनाओं से अछूता नहीं रह सकता है। मैं ये मानती हूँ कि जीवन में कुछ परेशानियों का हल मिल पाना जल्दी सम्भव नहीं हो पता पर वो परेशानी भी तो हमेशा नहीं रहने वाली है। फिर कैसा घबराना  ? कैसी चिंता ? जीवन का निर्माण हुआ, तभी ये भावनाएं मन में उम्र के साथ स्वतः ही आ गई। जब ये भावना नहीं होगी तो सुख -दुःख की अनुभूति भी नहीं होगी ,फिर हमारा जीवन कैसा होगा जरा कल्पना कर के देखिये।  
 
कोई परेशानी इतनी भी बड़ी नहीं होती जिनसे हम पार  ना पा सके। उस समय हमें अपने  आत्मविश्वास की रक्षा  चाहिए कि वो कभी ना डगमगाए। जब मन दुखी होता  तो उस बात को अपने शुभ चिंतको  कहना चाहिए। क्योकि दुःख बांटने से कम होता है और ख़ुशी वो तो जितनी बाटी जाय उतनी बढ़ती है।

बुधवार, 26 अप्रैल 2023

जीवंतता

JEEVANTATA IN HINDI - EK NAI DISHA 2023

ऐसा हमारे साथ अक्सर होता है  कि हम  सामने वाले की कही बातों को मन से लगा लेते हैं और वो बातें हमारे मन पर इस प्रकार हावी  हो जाती हैं कि उनसे बाहर निकल पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। मैंने भी अपनी इसी कमजोरी के कारण न जाने कितने वर्षों तक खुद से संघर्ष किया है मगर आज मैं  लोगों के विचारों से खुद के मन को आहत नहीं होने देती हूँ।

जब भी कोई ऐसे  व्यक्ति का विचार जो मेरे मन को दुखी करता है तो मैं  स्वतः ही उससे बाहर  निकलने का प्रयास करती हूँ और मैं उसमे कामयाब भी हो जाती हूँ। सच मानिये मेरे पास ऐसा कोई भी नहीं है, जिसके साथ मैं  अपनी परेशानियों को बाँट  सकूँ। मगर मैंने जीवन से सीखा  है कि जब भी बुरे विचार  हावी हो तो उनको तुरंत मन से झटक देना चाहिए और नकारात्मक विचार वाले लोगों से दूरी बनाकर रखना चाहिए। ऐसा सभी  के साथ होता होगा। जब हमें कोई दिल को चुभने वाली बात कहता है तो हमारा मन  उदास हो जाता है।

हम दिन रात बस इसी सोच में डूबे रहते है कि उसने  ऐसा क्यों कहा ? उसने  वैसा  क्यों कहा ? पर मेरे प्यारे दोस्तों ! हम किसी की जुबान व सोच पर तो लगाम नहीं लगा  सकते हैं पर उन विचारों से खुद के  मन को दुखी होने से जरूर बचा  सकते हैं। क्या आप इस बात को समझते है कि जो व्यक्ति अपनी बातों से आपको दुःख पहुंचता है, उसकी नीयत  ही आपकी  मुस्कराहट को छीनना है।
 

रविवार, 29 मई 2022

आईना

 

AAINA IN HINDI - EK NAI DISHA

क्या आप सभी अपने बारे में जानते हैं ? क्या आप ये बता सकते हैं अपनी सच्चाई कि हम क्या हैं और आप अपने जीवन में क्या कर रहें हैं और आपका जीवन किस  दिशा में जा रहा है ? आपकी अपनी सोच, अपनी अभिलाषा, जीने का मकसद, और ऐसा सभी कुछ !

आप में से कुछ लोग कहेंगे- बेशक ! हम अपने बारे में सब कुछ जानते हैं, जीवन का मकसद भी और उद्देश्य भी। पर शायद नहीं। हम अपने बारे में कुछ भी नहीं जानते। बस एक रेस में लगे हैं, हम सभी - एक दूसरे को पीछे करने की रेस में और इस प्रतिस्पर्धा में हम ये भूल ही जाते हैं कि हमारे जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है ? क्या कभी आप ने इस विषय पर मनन-चिन्तन किया ? 

नहीं ना ! 

आप कर भी नहीं पायेंगे, क्योंकि हम सभी ने एक दिखाने का मुखौटा पहन रखा है और इस मुखौटे को उतारने से डरते हैं। आपने कभी आईना देखा है, वो कभी भी झूठ नहीं बोलता । शायद यही वजह है कि लोगों के चेहरे की वो सादगी कहीं खो सी गई है ?

सभी के चेहरे रंगे होते हैं। सभी ने अपने चेहरे को मुखौटों से ढँक कर रखा है- खुद से दूर। बोलते हैं कि आईने में खुद को उसी झूठ के रंग में रंग लेते हैं। पर आप उस अपने चेहरे से शायद खुद ही अन्जान हैं। 

क्या आप सभी को अपना बचपन याद है ? वो बचपन, जो सभी बात में बेफिक्र था। वो बचपन, जो हमने अपने दोस्तों, भाई-बहनों, साथियों के साथ जीया- ना साफ-गन्दे कपड़ों की सुध, न खाने-पीने की सुध, ना ही किसी डाँट-डपट की चिन्ता और ना ही बोली-भाषा का दिखावटी मुखौटा। ना ऊँच-नीच का फर्क। ना अहम् ना अहंकार। मिट्टी लगे पाँव व मैले चेहरे । 

पर हमने शायद ही बचपन में आईना कभी देखा होगा। कभी जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि हम जैसे थे, वैसे ही अच्छे थे। सादगी भरे सच्चे चेहरे। हम सभी बेहद सन्तुष्ट थे, खुश थे। पर आज क्या हम खुश हैं, सन्तुष्ट हैं, निडर हैं। 

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022

सुख और दुःख

 

SUKH AUR DUKH IN HINDI - EK NAI DISHA 2022

सुख और दुःख जीवन के महत्वपूर्ण पहलू है। जब बच्चा  जन्म लेता  है , तो  माँ  को जाने कितने कष्टों का सामना करना पड़ता है और उसके आँख खोलते ही सारे दुःख ख़ुशी में परिवर्तित हो जाते है। संसार में  जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति इस सुख -दुःख के चक्कर से बच नहीं सका है। जब कभी हम दुखी होते हैंतो हम बहुत अधिक निराश हो जातें हैं। हमें लगता है कि ये समय कब बीतेगा ,कैसे बीतेगा। 

 

और जब हम खुशियों के दिनों को एन्जॉय करते है तो हम अपने उन दिनों का स्मरण भी नहीं करना चाहते है। मगर ये सुख -दुःख हमारे जीवन की परछाईयाँ है, जिनसे हम कभी भाग नहीं सकते और जब हम जीवन में आये मुश्किलो से घिर जाते है तो तभी हमें अपने और परायों की परख होती है। क्योकि जो लोग हमारे अच्छे दिनों के  साथी होते है उनमें से  ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैंजो परेशानियों में  हमसे  सारे रिश्ते-नाते तोड़ लेते हैं। 

रविवार, 9 जनवरी 2022

आत्म-मंथनः सफलता की कुंजी

 

AATMA MANTHAN - EK NAI DISHA

असफलता ! क्या होती है ये ? हम सभी के साथ होता है, कभी न कभी हमने इसका मुख जरूर देखा होगा। तो क्या हमें असफल होने के बाद रूक जाना चाहिए ? जिस कार्य में सफलता ना मिले, उसे छोड़ देना चाहिए या टूट कर मन को दुःखी कर उस काम को छोड़ देना चाहिए ? क्या करना चाहिए ? क्या ठीक होगा ? कौन देगा हमारे इन प्रश्नों का उत्तर ? ये बात कभी आपने सोची है। 

एक बार मैं किसी बात से नाराज होकर उदास बैठी थी, बस लगता था कि सब कुछ खतम सा हो गया, कुछ भी ठीक नहीं हो पायेगा, पर एक रोशनी की छोटी-सी किरण ने मेरी लाइफ में उजाला करने का काम किया और ये रोशनी आप सभी के जीवन तक पहुँचे, मैं यही चाहती हूँ - और ये सब हुआ एक छोटी सी पाॅजीटिव स्टोरी के माध्यम से, जो मैं आपके साथ शेयर करना चाहती हूँ।

एक बार एक कपड़ों के व्यापारी को अपने कारोबार में बहुत ज्यादा घाटा सहना पड़ा। किस्मत की ऐसी मार पड़ी कि उसके मिल में आग लग गई। सब कुछ जलकर खाक हो गया। रातों-रात करोड़ों का करोड़पति कहलाने वाला व्यापारी रूपये की मद्द के लिए दर-दर भटकने लगा। उसे कुछ भी रास्ता नजर नहीं आ रहा था। 

सोमवार, 11 अक्तूबर 2021

मुस्कुराहट

 

MUSKURAHAT IN HINDI - EK NAI DISHA


हर इन्सान में एक विशेष गुण होते हैं, कुछ उनसे परिचित होते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,  जो अपने भीतर के गुणों से एकदम अनजान होते हैं। अगर उन गुणों की पहचान कर उनको निखार दिया जाये, तो वो गुण उन्हें उन्नति और प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँचा जाते हैं। 


हर व्यक्ति की एक अलग विशेषता होती है। कोई दयालु होता है तो कोई निर्भीक और कोई किसी की  मदद कर खुद में संतुष्टी का अनुभव करता है, तो किसी में अथाह धैर्य होता है।


इस समय जब चारों ओर एक भयावह वातावरण  है, नकारात्मकता फैली  हुई है, ऐसे में हमें एक-दूसरे को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की प्रेरणा प्रस्तुत करनी चाहिए ना कि किसी की कमियों को दिखाकर उसकी निंदा कर, उसे दुःखी करना चाहिए। 


किसी व्यक्ति में कमी निकालना, उस पर तंज कसना बहुत आसान होता है और कुछ लोगों की आदत में ये शामिल भी हो चुका है, पर मैं आप सभी से एक बात कहना चाहूँगी कि जब भी हम किसी की कमी को उजागर करते हैं या किसी की निन्दा करते हैं, तो हमारे चारों तरफ एक अन्जाना नकारात्मक वातावरण व्याप्त हो जाता है और हमारा मन भी अशान्ति व तनाव से भर जाता है।

शुक्रवार, 14 मई 2021

विवेक

 

विवेक

हम सभी ने गाँधी जी के द्वारा कही ये बात सुनी व पढ़ी होगी कि अहिंसा  ही हमारा सच्चा धर्म होना  चाहिए। कोई अगर एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर देना चाहिए। मैं गाँधी जी के विचारों व उनके नजरिये को गलत नही ठहरा रही, क्योंकि गाँधी जी मेरे लिए भी पूजनीय हैं। पर मैं बस अपना नजरिया रख रही हूँ कि क्या ऐसा करने से कोई तीसरी बार हमें थप्पड़ नहीं मारेगा ? क्या गाँधी जी के अहिंसा के इस विचार में इतनी शक्ति है कि क्या हमारा ऐसा कार्य उस व्यक्ति के हृदय को परिवर्तित कर सकता है ?
 

परिधी हमेशा से अपने माँ की अच्छी व सच्ची बेटी थी। परिधी की माँ ने हमेशा ही उसे विनम्रता का पाठ पढ़ाया, उसे ही सुनकर वह बड़ी हुई थी। परिधी स्कूल से कालेज जाने लगी थी। एक दिन परिधी बेहद परेशान थी। सुबह से वह अपने कमरे सं बाहर भी नहीं आई थी। माँ ने परेशान होकर दरवाजे पर दस्तक दिया-“परिधी ! क्या बात है ? सुबह से ही तुम रुम में हो। कितना पढ़ाई करोगी ? बाहर आ जाओ। कुछ खा लो।” माँ को परेशान देख परिधी ने दरवाजा खोल दिया। परिधी की आँखें नम थीं। उसने  कहा, “माँ ! आप ने आज तक मुझे जो कुछ बताया  वह गलत बताया। माँ आप तो कहती थीं कि विनम्रता से पत्थर को भी पिघलाया जा सकता है। हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिये” और यह कहते हुए वह रोने लगी। 

गुरुवार, 6 मई 2021

कोरोना को हराना, हमनें है ठाना

 

कोरोना को हराना, हमनें है ठाना


जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यह समय सभी के लिए कितना मुश्किलों भरा है, कोरोना जैसी महामारी के कारण किसी को पैसे की परेशानी है तो किसी को स्वास्थ्य की और कोई अपने परिवार के पास जाने के लिए दिन-रात मौत से लड़ाई करने को तैयार हैं तो कोई अपनों से दूर कहीं बेहद अकेला गुमसुम उदास  बैठने को मजबूर है। इस कोरोना ने सभी को दुःखी किया-क्या बच्चे, क्या बड़े और  क्या बुजुर्ग ?


पर अब समस्या आ गई है तो हम उसके सामने घुटने तो नहीं टेक सकते । हमारी लड़ाई उस न दिखने वाले दुश्मन से है और हम सब मिलकर उसे हराने की कोशिश करेंगे और हार नहीं मानेंगे। पर  ऐसा  हम कैसे कर सकते हैं ? ऐसा दुश्मन जो दिखता नहीं, जिसके हाथ नहीं, शरीर  नहीं, जिसे मार नहीं  सकते ।


तो दोस्तों ! इस दुश्मन को हम खुश रहकर, अपना  ख्याल रखकर, अपने आप  से प्यार करके, अपनी पुरानी संस्कृति का पालन कर, थोड़ी खुशियाँ बाँटकर इसे मुँह की खाने पर  मजबूर कर सकते  हैं।


आज मैं आप सभी से कुछ छोटी-छोटी सावधानियाँ और कुछ अनूठे प्रयोग रख रही हूँ , जिसे हम रोजमर्रा की जिन्दगी में शामिल कर लें तो इस दुश्मन से लड़ने के लिए एक योद्धा की तरह तैयार हो सकते हैं। 



रविवार, 25 अप्रैल 2021

नव-सृजन

 

NAV-SRIJAN IN HINDI

जब कोई हमें दर्द देता है, आहत करता है तो हमें ऐसा लगता है कि हमारे दिल में गाँठ सी बन गई है और गाँठ दिन-प्रतिदिन और भी मजबूत होती जाती है। यदि हम उसे नहीं खोलते हैं, उसे यूँ ही बना रहने देते है तो परेशानी बढ़ जाती है। यदि हम उस व्यक्ति को माफ कर दें तो हमें लगता है कि जैसे भूमि पर नये पुष्पों का सृजन हुआ और उन पुष्पों की कोमलता व सुन्दरता हमारे दिमाग व दिल को ठंडक पहुँचा रही हो। हम अपने भीतर एक नये ‘स्व’ का सृजन होते हुए पाते हैं, जो कुछ नया सोचता है, कुछ नया कर दिखाने की चाह रखता है, जो हमें दोबारा नयी उम्मीद देता है-खुद को महसूस करने की। 


यदि किसी की कही बात आपके मन को दुःख पहुँचा रही है और आपको लगता है कि वो आपका भला नहीं चाहता है, आपका शत्रु है तो ऐसी भावना आपके मन को विष से भरने का कार्य करती है, जो सिर्फ एक ही कार्य से ठीक हो सकती है कि उस इन्सान को माफ कर दिया जाये, जिसने आपको दुःख पहुँचाया है- पर पूरे हृदय से और पहचान करिये उन शक्तियों को जो ईश्वर ने जन्म के बाद निरन्तर  आपको प्रदान की है।

रविवार, 4 अप्रैल 2021

मूल्य जिंदगी का !

MOOLYA JINDAGI KA STORY IN HINDI


 सौम्या सुबह-सुबह बहुत ही परेशान थी। उसने न ठीक से नाश्ता किया और ना ही किसी काम में उसका मन लग रहा था। वह कभी इधर तो कभी उधर टहल रही थी। उसकी मनोदशा देखकर कोई भी जान सकता था कि वह बहुत परेशान है। पर क्या था उसकी परेशानी का कारण ? उसे यूँ परेशान उसकी माँ हमेशा ही देखती थी, क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर परेशान होना उसका स्वभाव ही बन गया था। पर इस बार उसकी दादी माँ गाँव से उसके घर उसके पास रहने आई थी। 


दादी से सौम्या की परेशानी देखी न गई और उन्होंने सौम्या को अपने पास बुलाया और अपनी गोद में सौम्या का सर  रखा। सौम्या ने अपनी परेशानी दादी से कह दी।  उसने बताया कि उसने दसवीं व बारहवीं कक्षा तो बहुत ही अच्छे नम्बर  से पास कर लिया पर बी.ए. फस्ट ईयर की परीक्षा में  उसे फेल होने का डर लग रहा हैै। उसने कहा कि अगर वह  फेल हो गई तो वह अपनी जान दे देगी और ऐसा कहकर वह रोने लगी। दादी माँ ने उसे ऐसे परेशान कभी नहीं देखा था। 


उन्होंने एक दम से कहा,‘‘तो फिर बेटा परिणाम का इन्तजार क्यूँ ? अभी दे दो अपनी जान, खतम कर दो अपनी जिन्दगी। अगर तुम्हें अपने परिणाम पर भरोसा नहीं है तो इन्तजार किस बात का ? पर क्या तुमने कभी सोचा है

शनिवार, 20 मार्च 2021

तपिश की ठंडक

 

TAPISH KI THANDAK IN HINDI


मैं इस पोस्ट के द्वारा आप सभी के समक्ष एक बहुत महत्वपूर्ण टाॅपिक पर अपनी बात रखना चाहती हूँ , जिस पर हम सभी कभी ध्यान नहीं देते हैं या इस पर किसी के द्वारा कही गई बात अथवा सलाह शायद हमें अच्छी नहीं लगती है। हम सभी ने अपने बचपन में अपने माता-पिता को हमारी बहुत सारी महत्वपूर्ण माँगों के लिए अवश्य ही उन्हें न कहते पाया होगा, कभी दोस्तों की अच्छी चीजों को अपने पास भी होने की चाह में पिता के द्वारा मना कर देने से उन पर कभी हम क्रोधित भी हुए होंगे तो कभी दुखी। 


कभी उनकी  बिना वजह की रोक-टोक, तो कभी नाहक नाराजगी भी अपने ऊपर देखी होगी, जो हमें कभी पसन्द नहीं आई। माँ की डाँट में ‘फिक्र‘ और पिता के डाँट में ‘हमारे जीवन को सुन्दर और बेहतर बनाने की सीख‘ को हम हमेशा नजरअंदाज कर देते थे, पर उन बातों में हमारे लिए पूरे जीवन को मुश्किलों से लड़ने की जो सीख होती है, ये हम नहीं समझते हैं।


मैं अपने जीवन के तजुरबे से कह सकती हूँ कि हम सभी के माता-पिता ने हमारे लिए जो कुछ किया, हमें उसके लिए उन्हें दिल से धन्यवाद कहना चाहिए, ना कि उन्हें दोषी ठहराना चाहिए। 

गुरुवार, 28 जुलाई 2016

लकीरें किस्मत की

Lakeeren Kismat Ki in Hindi


आज,  क्यों ना हम सभी अपने हाथों में खींची हुई लकीरों की बात करें।  हमारे हाथों में जन्म से न जाने कितनी छोटी -बड़ी, टेढ़ी-सीधी रेखाएँ होती हैं और जैसे -जैसे हम बड़े होते जाते हैं,  इन रेखाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होती चली जाती है। आखिर ये रेखाएँ हमारे हाथ में क्यों होती हैं  ? क्या इनका हमारे जीवन से सचमुच कोई संबंध होता है ? बहुत ही विचारणीय प्रश्न है ये। इन रेखाओं के द्वारा क्या हमारा भाग्य निर्धारित होता है ? क्या ये हमारे किस्मत का फैसला करतीं हैं ?   हम सभी के मन में  हाथ की इन रेखाओं से जुड़े ना जाने कैसे -कैसे प्रश्न होते  हैं  ? पर आज -तक हमें इसका कोई उत्तर नहीं मिल सका है। 

अपने हाथ की रेखा को जानने, समझने तथा इससे जुड़ी अपने किस्मत को जानने के लिए हम ना जाने कितने ज्योतिषियों -पंडितों की जेब को गर्म करते हैं और वो हमें तरह-तरह के उपायों को बता कर हमारी  मुश्किलों को और ज्यादा बढ़ाते हैं। ना जाने कितने पूजा-पाठ, मंत्र-तंत्र ,व्रत-अनुष्ठान हमसे करवाते हैं। पर क्या इन कार्यों को करने से हमें उचित समाधान मिल जाता है ? क्या इससे हमारे हाथ की लकीरें विपरीत दिशा में बदल कर  हमें सौभाग्यशाली बना देंगी ? हमारी  सभी परेशानियों को दूर कर देंगी ?

गुरुवार, 21 जुलाई 2016

अधूरे सपने

Adhoore Sapne in Hindi

सपने कौन नहीं देखता  ? हर शख्स के आँखों में एक सपना होता है - कुछ कर दिखाने का। बहुत से ऐसे Lucky Person होंगे, जिनके ऊपर अपने माता-पिता व ईश्वर का आशीर्वाद होता है और जो  अपने सपने को पूरा कर पाते  हैं। कुछ लोग  जीवन में परेशानियों का सामना करते -करते, उनके सपने उनकी खुद की नजर से धुंधले हो जाते हैं। उनके कन्धों पर जिम्मेदारियों का इतना बोझ होता है कि बस उसे निभाने में दिन रात लगे रहते हैं,  अपना सपना पूरा करने की  उनकी बारी आ ही नहीं पाती। ऐसे भी लोग होते हैं, जो सपना देखने से डरते हैं कि वो ना जाने पूरे हो सकेंगे या फिर नहीं। पर क्या हमें सपना देखना छोड़ देना चाहिए ?

हम मन में अपने कैरियर बनाने का सपना लिए बड़े होते हैं और जब निराशा हाथ लगती है तो मन बहुत परेशान हो जाता है। कैरियर बनाने का सपना सच करने के लिए न सिर्फ कठिन परिश्रम बल्कि अच्छी सूझ -बुझ का होना भी बहुत  अनिवार्य है। आगे एक Story पढ़िए, जो इसी तथ्य को दर्शाती  है । 

बुधवार, 27 अप्रैल 2016

खुल कर जिओ


ऐसा हमारे साथ अक्सर होता है  कि हम  सामने वाले की कही बातों को मन से लगा लेते हैं और वो बातें हमारे मन पर इस प्रकार हावी  जाती हैं कि उनसे बाहर निकल पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। मैंने भी अपनी इसी कमजोरी के कारण न जाने कितने वर्षों तक खुद से संघर्ष किया है मगर आज मैं  लोगों के विचारों से खुद के मन को आहत नहीं होने देती हूँ।

 जब भी कोई ऐसे  व्यक्ति का विचार जो मेरे मन को दुखी करता है तो मैं  स्वतः ही उससे बाहर  निकलने का प्रयास करती हूँ और मैं उसमे कामयाब भी हो जाती हूँ। सच मानिये मेरे पास ऐसा कोई भी नहीं है, जिसके साथ मैं  अपनी परेशानियों को बाँट  सकूँ। मगर मैंने जीवन से सीखा  है कि जब भी बुरे विचार  हावी हो तो उनको तुरंत मन से झटक देना चाहिए। और नकारात्मक विचार वाले लोगों से दूरी बनाकर रखना चाहिए। ऐसा सभी  के साथ होता होगा। जब हमें कोई दिल को चुभने वाली बात कहता है तो हमारा मन  उदास हो जाता है।

सोमवार, 4 अप्रैल 2016

नये-पुराने

Naye Purane in Hindi

कंकड़ -एक छोटा सा टुकड़ा ,जो शिला से टूटकर अलग हो जाने से स्वतः ही बन जाता है। जो अपने अस्तित्व की पहचान बनाने के लिए निरन्तर प्रयास करता रहता है। एक शिला, जो की गढ़े जाने के बाद  धर्म और आस्था की प्रतिमूर्ति बन  जाती  है,  पर हमारा ध्यान उस  नन्हें कंकड़  पर नहीं  जाता है, जो उस  शिला का हिस्सा था, जिसे छीनी हथौड़े की चोट से अलग कर दिया जाता है।  क्या कसूर  होता है उसका ? कुछ लोगों  का जीवन भी  उस छोटे से कंकड़ के सामान ही होता है, जो निरन्तर अपने अस्तित्व की तलाश में प्रयत्नशील रहता है।

मैं सोचतीं हूँ कि क्या  सिर्फ ऊँचे कुल में जन्म ले लेने मात्र से कोई महान  व्यक्ति  जाता है ? क्या वो सारे  गुण उस व्यक्ति के  व्यवहार में स्वतः ही आ जाते हैं ? नहीं। मेरा मानना है कि व्यक्ति के सुन्दर व्यक्तित्व और अच्छे मन का आइना उसके अच्छे कर्म होते है। यही सब उसके व्यक्तित्व की एक पहचान बनाते हैं। जो लोग ऐसा सोचतें हैं कि ऊँची जात, ऊँचे कुल में जन्म ले लेने मात्र से ही उनका भाग्योदय हो जाता है, तो उनकी ऐसी सोच गलत है। अपने कर्मों  द्वारा  व्यक्ति दूसरों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाता है, जो जीवन पर्यन्त नहीं मिटती।  हमें अपने कर्मों पर हमेशा भरोसा  रखना चाहिए।  क्योंकि कर्मो के द्वारा ही हम अपने भाग्य को संवार सकते है।  समय का क्या है, वह कभी एक जैसा नहीं रहता।

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

सकारात्मक सोच

Sakaratmak Soch in Hindi

आजकल जहाँ कही भी देखिये, लोगों में एक बात सबसे कॉमन  रूप से देखने को मिल जाती है और वो है कि -- दूसरों में दोष निकालना। चाहे वह व्यक्ति किसी भी उम्र का क्यों न हो, दूसरों पर  दोषारोपण करने की आदत सभी की हो गई है। हमें दूसरों में दोष ही दिखाई देता है और उनकी कमी का पता चलते ही हम उसका मजाक बनाने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसी भावना  हमारे मन में क्यों आती है ? क्या कोई व्यक्ति सर्वगुणसम्पन्न  होता है ? सभी में एक न एक कमी अवश्य ही होती है। 

जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो वह सिर्फ खाना ,रोना और नित्य कर्म को ही  जानता है। मगर दुनिया में आँख खोलने के बाद माता -पिता और समाज की सहायता के द्वारा ही जीवन जीने के गुणों और व्यवहारों को सीखता है। फिर हम किसी व्यक्ति का  दोषारोपण  कैसे करे सकते है, जिसको हमने खुद ही साँचे में ढाल  कर निकाला है। अगर किसी में कोई दोष है, तो उस पर हँसने वालों की कोई कमी नहीं है। और जिसका मजाक बनाया जाता है, उसके मन पर क्या बीतती है इसके बारे में कोई सोचता तक नहीं है। अगर हम एक बार खुद के अंदर झांक कर देखते हैं तो क्या हमारा दिल हमें सबसे बेस्ट मनाता है ? ये जवाब हम खुद से नहीं पूछ सकते हैं, क्योंकि खुद की खामियों को स्वीकारनें के लिए बहुत बड़े जिगर की जरुरत होती है, जो सभी में नहीं होता है।  मगर जो खुद की कमियों को स्वीकारतें है, वह ही  उसको दूर करने में सफल भी होतें हैं।

शुक्रवार, 18 मार्च 2016

पेन्सिल


नमस्कार ! आज मैं हम सभी के बचपन की  उस प्यारी पेन्सिल के बारे बात करना चाहती हूँ। बचपन के दिनों में पढाई के वक्त हम सभी ने  ये पेन्सिल नामक यन्त्र का इस्तेमाल किया होगा। उससे हजारों गलतियां भी की होंगी और उसके बेस्ट मित्र रबड़ ने  उन गलतियों को मिटाने में हमारी  मदद भी की होगी। ऐसा हमने न जाने कितनी बार किया होगा।  कभी अक्षरों को दुरुस्त किया होगा, तो कभी टेड़े- मेढे  लेटरों को ठीक किया होगा और आर्ट के पेपरों में न जाने कितने गिलास ,कप ,पतंग और लोगो के चेहरे को बनाया होगा। जहाँ -तहाँ दीवालों पर भी चित्रकारी का प्रदर्शन किया होगा। आपने  भी किया है न ! मैं जानती हूँ।  क्यों याद आया ना ? आपकी होठों  की मुस्कुराहट इस बात का सबूत  है। 

उस पेन्सिल की याद आते ही एक सुखद अनुभूति होती है। क्या दिन थे वो भी ? कितना लगाव हुआ करता था उस मुट्ठी भर के पेन्सिल से। न जाने क्यों, हम उसे फेंकना नहीं चाहते थे। माँ बोलती थी, टीचर डांटते थे कि छोटी पेन्सिल से मत लिखो। मगर मन में उस पेन्सिल से इतना प्रेम क्यों था ? मुझे समझ नहीं आता था। एक उम्र का दौर बीत जाने के बाद आज समझ में आता है कि हमें हमारी उस पेन्सिल से इतना प्रेम क्यों था ? वो हमारी बचपन की तरह ही मासूम था। जिससे लाख गलतियां कर जाने के बाद भी दोबारा मिटा कर सही किया जा सकता था। जैसे लोग छोटे बच्चे की नासमझी भरी बातों को भुला देते हैं। गलती कैसी भी हो और उनको माफ़ कर देतें हैं।

बुधवार, 16 मार्च 2016

अंतर्मन

Antarman in Hindi

हमारे मन-मष्तिस्क  में हर रोज हजारों विचारों का संचार होता रहता है। यहाँ तक कि जब हम सोतें है, तब भी हमारे  मष्तिस्क की  इन्द्रियाँ काम करती रहती हैं। ये विचार नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही प्रकार के होते हैं। कुछ लोग ज्यादा सकारात्मक सोच को  और कुछ लोग ज्यादा  नकारात्मक सोच को  रखने वाले होतें हैं। ये भी एक  सच है कि  हम अपने जीवन से संतुष्ट नहीं है, चाहे वो उच्च आय वर्ग के हों या फिर निम्न आय वर्ग के। सभी को अपने जीवन से शिकायतें हैं। हमें जो कुछ जीवन से मिलता है, हमें कम ही हमेशां लगता है। 

मैं मानती हूँ कि  कुछ लोगों को परेशानियां है ,जिनकी आय काम है या जो दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ नहीं कर पाते। सुबह से शाम तक काम करने के बाद भी उनके परिवार के सदस्य आधा पेट भोजन खा कर जीवन जीने को मजबूर हैं। मगर ऐसे लोग भी हैं ,जो मंहगे -महंगे सुख सुविधाओं से लैस होने के बावजूद असंतुष्ट  हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हमें हमेशा दूसरों का जीवन बेस्ट लगता है। हम खुद की हमेशा दूसरे व्यक्तियों से तुलना  करते रहतें हैं। आज आप अपने अंतर्मन से एक बार जरूर पूछिये कि क्या ये सही है ? दूसरे से खुद की तुलना मत करिये, क्योंकि  हम अपने आप में सबसे बेस्ट हैं।