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मंगलवार, 24 मई 2016

धूप-छाँव

Dhoop-Chhav in Hindi

अपने जीवन में  प्रतिदिन हमने दिन -रात होते देखा होगा . बस हमारा मन भी इसी दिन -रात  की तरह ही है। कभी खुशियों का प्रकाश हमारे होठों  मुस्कराहट देता है, तो कभी गम के गहरे अंधियारे में हम कहीं खो जाते हैं। और जाने कब हमारे आँखों से आसूं छलक जाते हैं ? हमारा इन भावनाओं पर कोई वश नहीं होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कि  सूर्य उदय होने पर सूरज की किरणों को कोई धरती पर आने से कोई रोक नहीं सकता चाहे कितना भी घना कोहरा क्यों ना हो।

ये जीवन भी उसी प्रकार है इसमें परेशानियाँ ,सुख -दुःख, धूप छाव की तरह ही आते रहते हैं। जिन लोगो ने भी जन्म लिया है वो इन भावनाओं से अछूता नहीं रह सकता है। मैं ये मानती हूँ कि जीवन में कुछ परेशानियों का हल मिल पाना जल्दी सम्भव नहीं हो पता पर वो परेशानी भी तो हमेशा नहीं रहने वाली है। फिर कैसा घबराना  ? कैसी चिंता ? जीवन का निर्माण हुआ, तभी ये भावनाएं मन में उम्र के साथ स्वतः ही आ गई। जब ये भावना नहीं होगी तो सुख -दुःख की अनुभूति भी नहीं होगी ,फिर हमारा जीवन कैसा होगा जरा कल्पना कर के देखिये।  

शनिवार, 21 मई 2016

पेट की भूख

Pet Ki Bhookh in Hindi

ऐसा  हम सभी के साथ होता है  कि हम जब कुछ अच्छा करते हैं  तो हमारे दिल में एक अलग प्रकार की सुख की अनुभूति होती है और जब गलत करते हैं , उस वक़्त उस पल जरूर हमारे मन को थोड़ा अच्छा लगता है ,लेकिन जीवन में जब हमारा किसी  परेशानी से वास्ता  होता है तो हमें पहले की हुई गलती का पश्चाताप होता है ,जिसे हम कभी भी पीछे जाकर सुधार नहीं सकते।

 इस बदलते ज़माने के दौर में जहाँ लोग रिश्तों को फायदे से तोलने के बाद बनाते हैं , रिश्तें के  अपनापन में पुश्त - दर -पुश्त  बदलाव आता जा रहा है। पहले के लोग रिश्ते  के प्रति इमोशनल होते थे। फिर एक दौर आया, जब लोग रिश्तों को प्रेक्टिकल हो कर देखने लगे कि किन रिश्ते को जोड़ने में हमें फायदा होगा उसी से खुद को जोड़ने लगे। आज -कल की सोच तो सबसे ज्यादा स्वार्थ पूर्ण हो गई है। आज के युग के लोग किस रिश्ते में कितना प्रतिशत फायदा पहुंचेगा ये सोच कर बनाते  हैं।

क्या भावना किसी के हाथ की कठपुतली है  कि जैसे जी चाहा उसका डोर वैसे ही खींचेंगे ?  खैर इस पर जितनी चर्चा की जाय कम है। आज मैं किन बातों को लेकर बैठ गई और सोच के किस समंदर में डूब गई और उसके छीटें आप सभी पर पड़े। माफ़ कीजियेगा !

शनिवार, 14 मई 2016

तलाक़

Talak in Hindi

जीवन में हम सभी रोज किसी न किसी उलझनों से घिरे रहते हैं। कुछ उलझन तो बिन बुलाये आ जाते हैं ,और कुछ हमारे द्वारा निमंत्रण देने पर आते हैं, जिसके लिए हम खुद जिम्मेदार होते हैं।

एक वो भी दौर हुआ करता था, जब शादी हो जाने के बाद पति -पत्नी एक दूसरे के ऊपर अपना सारा जीवन न्योछावर कर देते थे। एक दूसरे की भावनाओं का  सम्मान करते थे व एक दूसरे में अपनी पूरी दुनियाँ समझकर जीवन जीते चले जाते थे। हमने कभी भी ये नहीं सुना होगा कि दादा -दादी में नहीं निभी तो उन लोगों ने तलाक ले लिया। या फिर ताऊ जी, जो ज्यादा बड़ी माँ पर गुस्सा करते थे, तो ताई जी ने अलग होने का निर्णय ले लिया। ऐसा तो हमने अपने माता -पिता के साथ भी नहीं देखा। पर आजकल की पीढ़ी ,जो जरा सी परेशानी की हवा क्या चली एक दूसरे का मुँह तक नहीं देखना चाहते। थोड़ी सी ऊंच -नीच होने पर उनको एक मिनट भी नहीं लगता- अलग होने का फैसला लेने में। सच कितनी मॉडर्न हो गई है आज कल की  पीढ़ी !

शुक्रवार, 6 मई 2016

छल भाग-2

Chhal Part-2 in Hindi


इस कहानी को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

करन ने  नेहा को कॉल लगाई, फिर नेहा ने करन से कहा ," तुमने पहले कितने लड़कियों के साथ रात गुजारी है ? " नेहा की बात सुन करन हतप्रभ रह गया। चार दिनों तक वह ठीक से खाना भी नहीं खा सका। फिर करन ने खुद को सम्भाला और अगले दिन करन ने कॉल फिर से  लगाया ,पर नेहा का फोन नहीं उठ रहा था, जैसे वह जान बूझ कर करन को तड़पाने के लिए ऐसा कर रही थी। फिर करन की नेहा से बात हुए एक महीना होने को आया।

करन रोज मार्केट जाता था ,इसी आशा  में की कही नेहा की एक झलक देखने को मिल जाये। फिर एक दिन संजोगवश  नेहा की सहेली बैंक में मिल गई ,उसने बताया ,"नेहा अब I.A.S. की तैयारी कर रही है। उसने कहा है कि तुम अगर नेहा से शादी करना चाहते हो तो तुमको I.A,S. Clear करना होगा।तभी वो तुमसे शादी करेगी ,वरना उसे भूल जाओ।"

बुधवार, 4 मई 2016

छल भाग-1

Chhal Part-1 in Hindi

मैं आज बहुत खुश हूँ। आप सभी के विचार Comment के द्वारा  मुझ तक पहुंच रहे हैं। आप सभी Viewers, जिन्होंने  Comments किया और जिन लोगों ने नहीं किया उनका भी,  तहेदिल से शुक्रिया !

छलावा - इसे  हम आँखों का भ्रम भी कह सकतें हैं। कुछ चीजें ना होने पर भी हमें उनके होने का अहसास होता है और ये हमारी भावनाओं को भी कष्ट पहुँचा देती हैं। बहुत से ऐसे लोग होंगे, जो सामने वाले की Activity देखकर भ्रमित हो जाते  हैं। उनको अच्छा या बुरा समझ लेते हैं और उनसे धोखा खा जाते हैं। तो क्या इसमें दोष किस व्यक्ति का होता है ? सिर्फ धोखा खाने वाले का या फिर धोखा देने वाले का भी । मैं ये जानती हूँ कि इस प्रश्न का उत्तर देना थोड़ा कठिन कार्य है। पर हमें खुद को इस भ्रम के चक्कर से बचाकर  रखना चाहिए। ताकि कोई हमारा फायदा ना उठा सके व हमारी कोमल दिल की भावनाओं को कोई आहत ना कर सके।