☀ तथ्य ☀ :: 27 नवंबर ♥ 1. आज के दिन प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर का 1888 में जन्म हुआ। 2. आज ही के दिन प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन का 1907 में जन्म हुआ। 3.आज ही के दिन अल्फ्रेड नोबेल ने 1895 में नोबेल पुरस्कार की स्थापना की। ♥

शुक्रवार, 6 मई 2016

छल भाग-2

Chhal Part-2 in Hindi


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करन ने  नेहा को कॉल लगाई, फिर नेहा ने करन से कहा ," तुमने पहले कितने लड़कियों के साथ रात गुजारी है ? " नेहा की बात सुन करन हतप्रभ रह गया। चार दिनों तक वह ठीक से खाना भी नहीं खा सका। फिर करन ने खुद को सम्भाला और अगले दिन करन ने कॉल फिर से  लगाया ,पर नेहा का फोन नहीं उठ रहा था, जैसे वह जान बूझ कर करन को तड़पाने के लिए ऐसा कर रही थी। फिर करन की नेहा से बात हुए एक महीना होने को आया।

करन रोज मार्केट जाता था ,इसी आशा  में की कही नेहा की एक झलक देखने को मिल जाये। फिर एक दिन संजोगवश  नेहा की सहेली बैंक में मिल गई ,उसने बताया ,"नेहा अब I.A.S. की तैयारी कर रही है। उसने कहा है कि तुम अगर नेहा से शादी करना चाहते हो तो तुमको I.A,S. Clear करना होगा।तभी वो तुमसे शादी करेगी ,वरना उसे भूल जाओ।"

करन फिर  नेहा की उम्मीदों पर खरा उतरने की तैयारियों में जी जान से जुट  गया। ताकि वो नेहा को अपनी जीवन संगिनी बना सके। फिर I.A.S. Written Exam में करन की बहुत अच्छी Rank आई। 10 दिन के बाद Interview था। फिर करन को कुछ सामान लेना था, तो वह मॉल गया। वहां जो नजारा उसने देखा, उसे देखकर कोई  भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाता।

करन ने देखा कि एक लड़का और एक लड़की कुछ सामान देख रहे थे और लड़की को उसके साथ का लड़का पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था और लड़की को उस लड़के के ऐसे बर्ताव से असहज भी नहीं महसूस हो रहा था, जैसे ये उसका हमेशा का काम हो। करन ने मुस्कुरा कर नजरें फेर लीं। फिर जब लड़की ने पलटा, तो करन आश्चर्यचकित  रह गया। ये लड़की कोई और नहीं, उसका प्यार नेहा थी, जिसके साथ वह पूरा जीवन बीतने के सपने संजो  रहा था। 

करन का अब सर घूम रहा था की ये सब सच है या आँखों  का धोखा ? पर ये सब सच था। करन का दिल चाह रहा था कि  नेहा के मुंह पर जोरदार  तमाचा जड़ दे और उससे पूछे की उसने उसके साथ इतना गन्दा प्यार का खेल क्यों खेला ? पर  उसके कदम नहीं उठ रहे थे। फिर करन ने खुद पर काबू किया और घर वापस आकर नेहा की यादों को अपने दिल,  अपने जेहन से निकलने की कोशिश करने लगा। जाने करन ने नेहा के फरेब से खुद को कैसे सम्भाला ? उसके बारे में अंदाजा भी लगाना बे मायने है।

नेहा  जैसी लड़कियाँ, करन जैसे मासूम दिलों से खिलौने की तरह खेलती हैं और इस्तेमाल कर छोड़ देती हैं। करन ने तो खुद को तो संभाल लिया, पर हर लड़के ऐसा नहीं कर पाते हैं। कुछ इतने गलत कदम उठा लेते हैं कि जिसका खामयाजा जीवन  भर उनके परिवार को भुगतना पड़ता है। नेहा जैसी कुछ  लड़कियाँ हैं, जो प्यार को मजाक समझती हैं। मैं उन नेहा जैसी लड़कियों से इस बात को कहना चाहती हूँ कि  प्यार की इज्जत करना सीखो। प्यार करने वालों के दिलों से मत खेलो। वरना ऐसा ना हो जाये कि एक दिन तुम खुद ही लोगों के हाथ का खिलौना बन कर रह जाओ। संभल जाओ ! अभी  समय है, क्योकि हर लड़का करन नहीं होता। 

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