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सोमवार, 28 नवंबर 2022

कर्त्तव्य-निष्ठा

 

KARTAVYANITHA IN HINDI - EK NAI DISHA 2022

क्या हमारे कर्म हमारे व्यक्तित्व का निर्धारण करते है  ? ये तो मुझे नहीं पता , पर इतना जरूर जानती हूँ कि हम जैसा कर्म करते है हमारी  पहचान भी वैसी ही बनती चली जाती है। हमारे बुजुर्गों ने ये बात तो 16 आने सही कही है कि व्यक्ति केवल दो तरह के कार्यों को करके ही ज्यादा नाम काम सकता है या तो उसके  कर्म बहुत अच्छे हों या फिर बहुत ही बुरे। अब तो हमें खुद से ही निर्णय लेना है कि हम  किस पंक्ति में खड़े होना चाहते हैं। हम जब  भी कोई कार्य  करते है तो पहला प्रश्न उठता है कि ये किसका बेटा /बेटी है  और कौन इनके माता पिता होंगे। जब भी हम किसी के प्रति गलत व्यवहारों को अपनाते है तो प्रश्न हमारे माता - पिता के संस्कारों पर उठता है और लोग ये सोचने के लिए मजबूर हो जाते है उनके माता पिता भी इसी प्रवृति के होंगे , जिससे उनका बच्चा ऐसा है।

 

सभी माता -पिता अपने बच्चे को वो सुख-सुविधाएं और अच्छे संस्कार देना चाहते हैं जिनको वो  खुद भी अपने  बचपन में नहीं पा सके। जितना उनके सामर्थ्य में होता है, जितना अच्छा जीवन  वो दे सकते है, वो उसे   अपने बच्चे को देने की कोशिश करते है। तो हमारा भी ये फर्ज बनता है कि अपने जन्मदाता के नजरों को कभी झुकने ना दें। हमारा कर्म ऐसा हो कि सभी हमारे माता पिता के दिए संस्कारो पर गर्व करें और हमारे व्यक्तित्व से प्रेरणा लें। हमारे माता पिता भी हर जन्म में हमें अपने औलाद के रूप में देखना चाहें।

 

दुनियाँ में एक बच्चे के लिए अपने पिता से धनी और माँ से भला चाहने वाला कोई शख्स नहीं होता। सब नजरिये का फर्क है। कभी -कभी हमें लगता है कि हमारे पिता हमें प्यार नहीं करते, हमें हमें आये दिन कुछ   कुछ  सुनाते  रहते है। पर पिता के डांट में उनके जीवन में मुश्किल हालात में सामना करने का तजुर्बा छिपा होता है जिनको हमें बस समझने की जरुरत है और माँ की गोद दुनिया की जन्नत से कम नहीं होती है जहाँ सर रखते ही सारे  दुःख -दर्द छूमंतर हो जाते है। ये प्यार का ऐसा नजराना है  ,जो हमें उस ईश्वर की  ऒर से बिन  मांगे मिलता है।

 

जो अपना प्रेम और अपनापन हमारे ऊपर अपने आखिरी साँस तक न्योछावर करते  हैं, उनके निःस्वार्थ  समर्पण हमें यही सीख दे जाते हैं कि यदि जीवन में किसी की जिम्मेदारी मिले तो उस पर  अपनी आखिरी साँस तक समर्पित होना चाहिए। माता पिता  द्वारा मिली शिक्षा हम बड़े -बड़े विद्यालयों से  भी नहीं प्राप्त  कर  सकते हैं। यही वजह है कि जब हम खुद  माता -पिता बनते हैं तो अपने बच्चे पर खुद को भी समर्पित कर देना चाहते हैं। सच है कि हमारे माता -पिता जितना कुछ  हमारे लिए का देते है, उतना तो हम खुद भी अपने लिए कभी नहीं कर पते है। आज हम सभी सफल और सक्सेसफुल  व्यक्ति बनना चाहते हैं पर क्या यही  सक्सेस और सफलता  हैंजो व्यक्ति  अपने माता और पिता के नजरों में सफल और बेहतर इंसान है वही  वास्तविक सफल है।

 

 बस इतना ही।

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सोमवार, 24 अक्तूबर 2022

शुभ दीपावली !

 

HAPPY DIWALI - EK NAI DISHA


'एक नई दिशाकी ओर से आप सभी को 'दीपावली पर्व2022 की हार्दिक शुभकामनायें !


#दीपावली
#HappyDeepavali
#Ek_Nai_Disha

Image:Google

शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

कृष्णा-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ !

 

HAPPY JANAMASTAMI 2022 - EK NAI DISHA


'एक नई दिशा' की ओर से आप सभी को कृष्णा-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ !

ॐ जय श्री कृष्णा !


#KrishnaJanmashtami


Image:EK_NAI_DISHA_2022

सोमवार, 15 अगस्त 2022

स्वतंत्रता दिवस 2022 की शुभकामनाएँ !

 

HAPPY INDEPENDENCE DAY 2022 - EK NAI DISHA

'एक नई दिशाकी ओर से आप सभी को स्वतंत्रता दिवस 2022 की हार्दिक शुभकामनाएँ  !


#IndiaAt76

#indiaIndependenceday

#स्वतंत्रतादिवस



Image:Ek_Nai_Disha_2022

रविवार, 29 मई 2022

आईना

 

AAINA IN HINDI - EK NAI DISHA

क्या आप सभी अपने बारे में जानते हैं ? क्या आप ये बता सकते हैं अपनी सच्चाई कि हम क्या हैं और आप अपने जीवन में क्या कर रहें हैं और आपका जीवन किस  दिशा में जा रहा है ? आपकी अपनी सोच, अपनी अभिलाषा, जीने का मकसद, और ऐसा सभी कुछ !

आप में से कुछ लोग कहेंगे- बेशक ! हम अपने बारे में सब कुछ जानते हैं, जीवन का मकसद भी और उद्देश्य भी। पर शायद नहीं। हम अपने बारे में कुछ भी नहीं जानते। बस एक रेस में लगे हैं, हम सभी - एक दूसरे को पीछे करने की रेस में और इस प्रतिस्पर्धा में हम ये भूल ही जाते हैं कि हमारे जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है ? क्या कभी आप ने इस विषय पर मनन-चिन्तन किया ? 

नहीं ना ! 

आप कर भी नहीं पायेंगे, क्योंकि हम सभी ने एक दिखाने का मुखौटा पहन रखा है और इस मुखौटे को उतारने से डरते हैं। आपने कभी आईना देखा है, वो कभी भी झूठ नहीं बोलता । शायद यही वजह है कि लोगों के चेहरे की वो सादगी कहीं खो सी गई है ?

सभी के चेहरे रंगे होते हैं। सभी ने अपने चेहरे को मुखौटों से ढँक कर रखा है- खुद से दूर। बोलते हैं कि आईने में खुद को उसी झूठ के रंग में रंग लेते हैं। पर आप उस अपने चेहरे से शायद खुद ही अन्जान हैं। 

क्या आप सभी को अपना बचपन याद है ? वो बचपन, जो सभी बात में बेफिक्र था। वो बचपन, जो हमने अपने दोस्तों, भाई-बहनों, साथियों के साथ जीया- ना साफ-गन्दे कपड़ों की सुध, न खाने-पीने की सुध, ना ही किसी डाँट-डपट की चिन्ता और ना ही बोली-भाषा का दिखावटी मुखौटा। ना ऊँच-नीच का फर्क। ना अहम् ना अहंकार। मिट्टी लगे पाँव व मैले चेहरे । 

पर हमने शायद ही बचपन में आईना कभी देखा होगा। कभी जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि हम जैसे थे, वैसे ही अच्छे थे। सादगी भरे सच्चे चेहरे। हम सभी बेहद सन्तुष्ट थे, खुश थे। पर आज क्या हम खुश हैं, सन्तुष्ट हैं, निडर हैं। 

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022

सुख और दुःख

 

SUKH AUR DUKH IN HINDI - EK NAI DISHA 2022

सुख और दुःख जीवन के महत्वपूर्ण पहलू है। जब बच्चा  जन्म लेता  है , तो  माँ  को जाने कितने कष्टों का सामना करना पड़ता है और उसके आँख खोलते ही सारे दुःख ख़ुशी में परिवर्तित हो जाते है। संसार में  जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति इस सुख -दुःख के चक्कर से बच नहीं सका है। जब कभी हम दुखी होते हैंतो हम बहुत अधिक निराश हो जातें हैं। हमें लगता है कि ये समय कब बीतेगा ,कैसे बीतेगा। 

 

और जब हम खुशियों के दिनों को एन्जॉय करते है तो हम अपने उन दिनों का स्मरण भी नहीं करना चाहते है। मगर ये सुख -दुःख हमारे जीवन की परछाईयाँ है, जिनसे हम कभी भाग नहीं सकते और जब हम जीवन में आये मुश्किलो से घिर जाते है तो तभी हमें अपने और परायों की परख होती है। क्योकि जो लोग हमारे अच्छे दिनों के  साथी होते है उनमें से  ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैंजो परेशानियों में  हमसे  सारे रिश्ते-नाते तोड़ लेते हैं। 


सभी को जीवन में आने वाली परेशानियों के लिए हमेंशा  तैयार रहना चाहिए। क्योंकि  परेशानी कभी भी दरवाजे पर दस्तक दे कर नहीं  आती। वो  जब भी आती है, हमें सँभलने का अवसर भी नहीं देती। हम आने वाली परेशानियों को  रोक तो नहीं  सकते, मगर उससे उबरने के लिए तैयारी जरूर कर सकते हैं।  हमें  रोजमर्रा के खर्चों में से थोड़ा इन्वेस्मेंट जरूर करना चाहिए। बैंक में अपना खाता जरूर खुलवाना चाहिए।  घर  पर भी हमें बचत की आदत डालनी चाहिए। गुल्लक में अपने सामर्थ्य के अनुसार रोजाना रूपये डालने चाहिए। हम वो सिक्के, जिनकी हमें जरुरत नहीं होती उन्हें भी उसमें डाल सकते हैं। 

 

आपको यकींन नहीं होगा कि इन छोटी-छोटी अच्छी आदतों से जाने कितने पैसों की बचत हो जाएगी। यही छोटी सी बचत हमारे लिए बहुत उपयोगी बन सकती है। मैंने अपनी आदतों में इसे शामिल किया है, उसी बचत के द्वारा जाने कितनी बेहद जरुरी सामानों  की खरीदारी की है, जिससे मेरे घर का बजट भी प्रभावित नहीं हुआ  

 

बच्चों  को भी प्रारम्भ से ही बचत करना सिखाना चाहिये। ताकि वे जीवन की जटिल परिस्थितियों का  सामना  सकें। मैंने एक ऐसे ही बचत के तरीके को अपने मित्र के घर देखा था।  जिसके परिवार के प्रत्येक सदस्यों की यह  आदत थी कि जब वो पूजाघर में प्रभु को सुबह प्रणाम करते थे, तो वहां रखे गुल्लक में सिक्के या  रूपये डालते थे। उसके घर के सभी बड़ों एवं बच्चो की आदतों में ये शामिल था। मेरी मित्र ने  बताया की इस गुल्लक  के बचत के पैसो के द्वारा उसके यहाँ तीज -त्योहारों में खरीदारी होती है और घर का बजट भी नहीं बिगड़ता। मैंने  इसको फॉलो किया है।  आप सभी इसे जरूर करके देखें। हमारी एक-एक रूपये की बचत हमारे खुशियों को पंख लगा देगी  


आज के लिए इतना ही


धन्यवाद  


Image:Google