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शनिवार, 17 दिसंबर 2016

बेसहारा

Besahara in Hindi

एक महिला ब्लू साड़ी में कार से उतर कर बच्चों के  अनाथ आश्रम  में आई। वार्डेन ने महिला को देखते ही कहा," प्लीज, मिसेज़ भट्टाचार्या ! आप यहाँ मत आया करें।" उस महिला के हाथ में कुछ खिलौने व चॉकलेट थे,जो उसने वार्डेन को देते हुए, नमन से मिलने की बात की।  आखिर कौन था नमन ? जिससे मिलने वह महिला कार में आया करती थी और क्यों उस महिला को  वार्डेन, नमन नाम के बच्चे से मिलने नहीं देना चाहती थी ? आखिर क्या वजह थी ? पर  उस दिन महिला के बार-बार कहने पर , वार्डेन ने महिला को एक कापी दी, जो उस बच्चे की थी, जिसे पढ़ कर महिला के आँखों से आंसू छलक गए और वह  नमन से मिले बिना ही लौट गई।

उस कॉपी में लिखा था - "माँ ! आपने मुझे क्यों छोड़ दिया ? मुझे आपकी बहुत याद आती है।  माँ ! मुझे पता है कि मैं आपका बेटा नहीं हूँ, पर मेरी माँ तो आप ही थी, जिसके साथ मैं जीवन भर रहना चाहता था।  आप मुझसे मेरी कमी की वजह से नाराज हो, पर माँ ! आप ही बताओ, इसमें मेरा क्या दोष है ? मैं भी सबकी तरह बातें  करना चाहता हूँ। सबकी बातें  सुनना चाहता हूँ।  पर  माँ मुझे आपके विधाता ने सुनने व बोलने की शक्ति ही नहीं दी तो मैं क्या करूँ माँ ?  मुझे यह बात समझ में आ गई है कि आप मेरी कमी की वजह से मुझे यहाँ छोड़ गई हो। मेरा आपके  जीवन  और परिवार में कोई स्थान नहीं है। इस वास्तविकता को मैंने अब स्वीकार कर लिया है।  मैंने  इन अनाथ बच्चों को अब अपना परिवार बना लिया है। अब यही मेरा परिवार है। अब मुझे दुबारा अनाथ मत कर देना माँ।"

आखिर ऐसा क्या था, जिसने एक बच्चे की सोच को  अपने माँ के प्रति  इतना परिवर्तित कर दिया था ? इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए आइये पहले की कहानी को जानते है... 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

आराधना

Aaradhana in Hindi

क्या होती है आराधना ? इससे तो हम सभी परिचित होंगे। सभी के दिल में अपने आराध्य के प्रति सम्मान व प्रेम होता है ,जिसे झुठलाया नहीं जा सकता है। हम ऐसी शक्तियों को पूजते हैं, जो हमें जीवन जीने की शक्ति प्रदान करते हैं, जो हमें हर मुश्किलों से लड़ने की शक्ति देते हैं और जो हमारे हृदय में प्रेम रुपी पुष्प की बगिया को सींचने में हमारी मदद करते हैं।  हम सभी के दिल में अपने आराध्य की प्रतिमूर्ति विद्यमान रहती है, जिसे सभी अलग -अलग रूपों में पूजते हैं। मैं भी पूजती हूँ, आप भी पूजते होंगे। और इस आराधना से हमने अपने भीतर एक शक्ति का संचार होते हुए भी महसूस किया होगा । 

पर यदि हमारी आराधना हमें थका दे ! हमें भीतर तक तोड़ कर रख दे ! तो क्या ऐसी आराधना उचित है ? यदि हमें आराधना के बदले धिक्कार  मिले ! आराध्य हमें अप्रिय समझे ! हमारी तपस्या का प्रतिफल हमें दुख और आंसू से मिले ! तो क्या हम अपनी आराधना निःस्वार्थ भाव से कर सकेंगे ? आज मैं आपको एक ऐसी आराधिका से मिलवाती हूँ। 

मंगलवार, 15 नवंबर 2016

काला धन


Kala Dhan

एक भारतीय नागरिक होने के नाते , आज मैं आप सभी से कुछ अपने दिल की बात कहना चाहती हूँ। शायद यह उस हर भारतीय के दिल की बात होगी, जो अपने मातृभूमि से प्रेम करते होंगे। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्रधान मंत्री जी के द्वारा हमारे देश के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यह कदम उस काले धन के विकराल राक्षस को मारने हेतु उठाया गया सार्थक कदम है, जिसकी सूचना 8 नवम्बर की रात को हमारे टी वी चैनलों के माध्यम से हमें पता चली। हम सभी उस वक़्त थोड़े परेशान हो गए कि अब क्या होगा ? हमारी मेहनत की कमाई, जो ज्यादातर लोग 1000 ,500 के नोट में ही रखते हैं- मैंने भी रखी थी- वो  क्या यूँ ही बर्बाद हो जाएगी ? फिर एक आशा की किरण ने हमारे चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी।  फिर हमें पता चला कि इतना बड़ा कदम आखिर क्यों उठाया गया है ? मैं प्रधान मंत्री श्री मोदी जी को धन्यवाद देना चाहती हूँ- इतने बड़े व सार्थक कदम को उठाने के लिए।

ये बात सच है कि हम सभी को अपने मेहनत के रुपयों को एक्सचेंज करने में थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ेगा ,पर उन लोगों के बारे में सोचिये जो ऐसे रुपयों से अमीर बन बैठे है, जिसका  न तो उनके पास हिसाब होता है और ना ही वो सरकार को अपने आय घोषित करते हैं, जिसे सभी 'काला धन' के नाम से जानते हैं। इनकी बहुत लम्बी कतारें हैं। यदि इनको आज पनिश नहीं किया गया तो एक दिन ऐसा आएगा कि ईमानदारी के रुपयों की दुनियां से कद्र ही ख़त्म हो जाएगी, जिसकी भरपाई कर पाना सम्भव नहीं हो पायेगा। मैं सोचती रही कि रातो -रात एक बुद्धिमान व जिम्मेदार देश का मुखिया ऐसा फैसला कैसे ले सकते हैं ? फिर मुझे समझ में आया कि  देश के हित  के लिए इतना बड़ा कदम रातो रात नहीं लिया गया। बल्कि  ये  दिग्गज सरकारी टीम की एक सफल मुहीम है- काले धन को सामने लाने के लिए ।

सोमवार, 7 नवंबर 2016

'बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द मंथ' अवार्ड

Best Hindi Blogger


आप सभी मित्रों का  मेरे ब्लॉग के प्रति प्रेम व साथ  को देखते हुए मुझे    i-

blogger के द्वारा सम्मानित किया गया है। इस सम्मान की हकदार सिर्फ 

मैं ही नहीं, अपितु आप सभी हैं।  मैं आप सभी के साथ इस ख़ुशी को शेयर 

करना चाहती हूँ। क्योकि मैं कोई लेखिका नहीं थी, पर आपके साथ ने मुझे 

बेहतर से  बेहतर लिखने को प्रेरित किया। आप सभी मित्रों का मैं अपने 

इस पोस्ट के माध्यम से  धन्यवाद देना चाहती हूँ। 

गुरुवार, 3 नवंबर 2016

मेरी रसोई से-3

हम सभी को इन दिनों छुट्टियाँ मिली होंगी और इन दिनों घर पर बहुत सारे स्नैक्स बनाये जा रहे होंगे। कभी समोसे, तो कभी पकौड़ी या फिर फ्रेंच -फ्राइज़ और ना जाने क्या -क्या ? पर ऐसे खाने के लिए, इसके साथी मिस चटनी की भी तो जरुरत होती है और रोज -रोज वही सॉस ! हमारे स्पेशल नाश्ते के स्वाद को फीका कर देता है। तो लीजिये, आपकी परेशानी को दूर कर देते हैं। यहाँ आप चटनियों को बनाने की विधि को जानिए और अपने खास रेसिपी को और खास बनाइये -

दही की चटनी -

सामग्री: 1 कप दही, 1 चम्मच कसा नारियल, 1 /2 चम्मच पिसा अदरक , हरी मिर्च और नमक स्वादानुसार। 

विधि: बिना मलाई वाली दही लेकर उसमें सभी सामग्री मिक्स करें,  सर्व करें।

शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

दीपावली की शुभकामनाएँ Happy Diwali

Happy Diwali


'एक नई दिशा' की तरफ से आप सभी मित्रों को 
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ! 

Image-Google

गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

वजूद

Wajood in Hindi

रात को मैं और मेरे पति टीवी देख रहें थे ,जिसमें मुस्लिम महिलाओं के विचार और अकारण ही पुरुषों द्वारा दिए जाने वाले तलाक के विषय पर गम्भीर चर्चा चल रही थी। रिमोट मेरे हाथों में था। चूँकि मुझे न्यूज़ व राजनीतिक खबरों का ज्यादा शौक नहीं है, तो मैंने अपने पसंद के मुताबिक चैनल बदल लिया। अपने पति के कहने के बाद, ना चाहते हुए, दुबारा न्यूज़ चैनल  लगा दिया ,फिर किचन में काम करने चली गई। मेरे कानों में ख़बरों की आवाज आ रही थी। मैंने देखा, तब जाकर मुझे अहसास हुआ क़ि हमारे भारत देश की मुस्लिम धर्म की महिलाएँ जीवन भर कैसी मनोदशा से  गुजरती हैं।

ना उन्हें खुल कर जीने की आजादी है , ना पसंद के कपडे पहनने की और   सबसे कीमती जीवन जो हमारे विधाता ने हमें दी है, उसे भी मन मुताबिक जी नहीं सकती हैं। हमारे भारत वर्ष को आजाद हुए तकरीबन 70 वर्ष हो गए हैं और यहाँ पर सभी को अपना जीवन अपने तरीके से जीने का अधिकार है। महिलाओं की बात करें, तो यहाँ पर सभी महिलाओँ को  समान रूप से कानून व समाज द्वारा स्वेच्छा से अपना जीवन जीने का अधिकार है। फिर ये मुस्लिम महिलाओं के साथ क्यों भेद -भाव हो रहा है ? किसी भी धर्म में दो विवाह को करने का अधिकार नहीं दिया गया है। यदि एक पत्नी के जीवित रहते पुरुष दूसरा विवाह करता है तो कानून उसके साथ कड़क लहज़े में पेश आता है और जेल भी हो जाती है। ये मुस्लिम धर्म का कैसा न्याय है ? कैसा धर्म है ? किसी भी धर्म में किसी को कष्ट देना नहीं बताया जाता है।

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

सुकून

Sukoon in Hindi

ये तो हम सभी जानते हैं कि जीवन मुश्किलों का घर है। अगर हम इस सच्चाई से अनभिज्ञ रहें तो जीवन कितना आसान लगता है ! और यदि हम इस सच्चाई से परिचित हो जाते हैं ,तो हमारा जीवन जीना  बहुत मुश्किल हो जाता है। हमारी मनोदशा भी ऐसी हो जाती है कि मानो  सारी मुसीबतों का पहाड़ हम पर ही  टूट पड़ा है और हम इससे शायद कभी उबर ही नहीं पाएंगे। मैंने पहले भी इस प्रकार की चर्चा अपने नन्हे से पोस्ट में की थी। आपको शायद याद  भी होगा ,जो बाबा युवक को अपने सर पर पत्थर रख  कर चलने को कहते हैं। क्यों याद आया ? पर इस बार मैं आपके लिए कुछ अलग लाई हूँ। 

मैं जानती हूँ कि सभी के जीवन में कोई - न -कोई अपनी परेशानी होती है। कभी हम इसे चुटकियों में दूर कर लेते हैं , तो कभी यह हमारे सामर्थ्य से बाहर  की होती हैं।  बहुत से ऐसे भी मित्र होंगे, जो छोटी -छोटी परेशानियों से बाहर ही नहीं आ पाते हैं और इन परेशानियों के घेरे में उदास और परेशान होकर अपने जीवन को जीते जाते हैं। ये तो 16 आने सच्ची बात है कि परेशानी ना तो कभी बता कर आती है और ना ही हमारे पसन्द के मुताबिक ही होती है। और इन परेशानियों से कौन दोस्ती करना चाहेगा ? कोई भी नहीं ! क्योकि, भाई ! जिसे दोस्त बनाओगे, वो तो आपसे मिलने हर दूसरे रोज आया जाया करेगा। पर हम दूसरों की परेशानियों से दोस्ती कर लें तो ! क्या ख्याल है आपका ?  यदि हम किसी की परेशानियों को  समझकर,हमसे जो बन पड़े, अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद करें तो क्या बुराई है ? आइये, हम सभी एक अनोखे मददगार के बारे में जाने। 

सोमवार, 10 अक्तूबर 2016

दशहरा की बधाई Happy Dashara

Happy Dashara


'एक नई दिशा' की तरफ से आप सभी मित्रों को दशहरा की बधाई ! 

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गुरुवार, 6 अक्तूबर 2016

छाँव की आस

Chhav ki Aas in Hindi

हम सभी अपने जीवन में बहुत ज्यादा व्यस्त हैं।  हमारे पास जरा सा भी समय नहीं है कि हम अपने बारे में सोचें, अपनी खुशी को जिए , और जब जीवन के आखिरी समय  में  इस भाग-दौड़ में ठहराव आता है तो हमें उसे जीने की, शरीर में  ना तो शक्ति होती है और ना ही सामर्थ्य। अब ऐसे ठहराव का क्या अर्थ है ?  अगर जीवन में  यही ठहराव, जीवन के बीच में आ जाये तो ? आइये, मैं आज आपको एक ऐसी महिला से मिलवाती हूँ।

रिया एक सामान्य घर की खुले विचार वाली पढ़ी लिखी महिला थी। उसकी शादी को तीन वर्ष हो गए थे। घर में सास -ससुर, पति और 2 वर्ष के बेटे सहित उसका  खुशियों भरा संसार था। पर ना जाने ईश्वर को क्या मंजूर था ? एक  वक्त की आंधी ने रिया के खुशियों के घरौंदे को बिखेर कर रख दिया। जब उसे यह पता चला कि एक्सीडेंट में उसके पति की मौत हो गई तो परिवार की जिम्मेदारी अब रिया के कंधे पर आ गई थी। उसने अपने पति के ऑफिस में जॉब के लिए अप्लाई किया। शिक्षित होने की वजह से रिया को जॉब मिल गई। कुछ ही दिनों में रिया ने अपने जिम्मेदारियों को अच्छे से संभाल लिया। 

रविवार, 28 अगस्त 2016

उत्तर-दायित्व

Uttar-Dayitva in Hindi

क्या हमारे कर्म हमारे व्यक्तित्व का निर्धारण करते है  ? ये तो मुझे नहीं पता , पर इतना जरूर जानती हूँ कि हम जैसा कर्म करते है हमारी  पहचान भी वैसी ही बनती चली जाती है। हमारे बुजुर्गों ने ये बात तो 16 आने सही कही है कि व्यक्ति केवल दो तरह के कार्यों को करके ही ज्यादा नाम काम सकता है या तो उसके  कर्म बहुत अच्छे हों या फिर बहुत ही बुरे। अब तो हमें खुद से ही निर्णय लेना है कि हम  किस पंक्ति में खड़े होना चाहते हैं। हम जब  भी कोई कार्य  करते है तो पहला प्रश्न उठता है कि ये किसका बेटा /बेटी है  और कौन इनके माता पिता होंगे। जब भी हम किसी के प्रति गलत व्यवहारों को अपनाते है तो प्रश्न हमारे माता - पिता के संस्कारों पर उठता है और लोग ये सोचने के लिए मजबूर हो जाते है उनके माता पिता भी इसी प्रवृति के होंगे , जिससे उनका बच्चा ऐसा है। 

गुरुवार, 25 अगस्त 2016

जन्माष्टमी Happy Janamashtami

Happy Janamashtami


'एक नई दिशा' की ओर से आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। 

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रविवार, 14 अगस्त 2016

15 अगस्त Happy Independence Day

Happy Independence Day



 'एक नई दिशा' की ओर से आप सभी मित्रों को स्वतंत्रता    दिवस की हार्दिक बधाईयाँ। 

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सोमवार, 8 अगस्त 2016

पहला प्यार

Pehla Pyar in Hindi

क्या होता है प्यार ? इसकी  एक अद्धभुत छवि हमारे मन-मस्तिष्क में हमेशा विद्यमान रहती है और जब 'प्यार' लब्ज़ हमारे कानों में पड़ता है तो  हमारी इन्द्रियाँ भावुक हो जाती हैं, हमारा हृदय कोमल हो जाता है और बात  जब पहले प्यार की हो तब  ?  पहले प्यार के अहसास से शायद ही कोई शख्स अछूता होगा। इस पहले प्यार की  भावना ने सभी के दिल में कभी ना कभी दस्तक जरूर दी होगी। पहले प्यार की बात आते ही हम अपने अतीत को खंगालने में लग जाते हैं। इसकी स्मृतियाँ ना जाने कितने समय तक हमें घेरे रहती हैं। हमारे ह्रदय को कभी ना कभी इस पहले प्यार के अहसास ने जरूर छुआ होगा, जो हमारे अविस्मृत पल हैं , जिनको शायद भूला पाना  हमारे वश में नहीं है।  अगर ये पल  अच्छे होते हैं तो हमारे मन को सुकून पहुँचाते हैं और होठों को एक मुस्कुराहट दे जाते है। यदि बुरे अनुभव से हमारा वास्ता हुआ है, तो ये हमारे मन -मस्तिष्क  को कष्ट भी पहुँचा जाते हैं।

पर ये पहला प्यार आखिर में होता क्या है ? क्या दिल में किसी के प्रति  उठने वाली भावना को प्यार कहते हैं या फिर आकर्षण को ? क्या प्यार को उम्र के बंधन में बांधा जा सकता है ? नहीं ना। 

मंगलवार, 2 अगस्त 2016

पत्थर दिल

Pathar Dil in Hindi

हम सभी ने ये बात सुनी होगी कि एक पुरुष की कामयाबी के पीछे एक महिला का हाथ होता है। वो महिला उसकी माँ ,बहन ,पत्नी ,दोस्त या फिर टीचर हो सकती है। पर क्या आपने कभी ये कभी सुना है कि किसी महिला की कामयाबी के पीछे किसी पुरुष का हाथ है ? नहीं ना ! मैंने भी नहीं सुना है। यहाँ तक कि  ये बात किसी मैग्जीन या न्यूजपेपर में भी नहीं पढ़ी। जब एक महिला  सफल होती  है तो उसका पूरा श्रेय हम उसी महिला की मेहनत ,लगन व प्रतिभा को  देते हैं। उसकी सफलता के पीछे किसी पुरुष का हाथ हो सकता है, ऐसी बात हमारे दिलों -दिमाग में कोने - कोने तक कही आती ही नहीं है। ना ही हम सभी ये जानना चाहते हैं।

जबकि बचपन से एक शक्ति हम सभी महिलाओं का साथ निभाते चली आई है। उसके  भी कई रूप है- पिता ,भाई ,दोस्त या फिर पति। ये शक्तियाँ निरन्तर सुरक्षा की दीवार बनकर सदा हमारा साथ निभाती आई हैं। हर पल हमारा ख्याल रखती हैं, चाहे कैसी भी मुश्किल क्यों ना हो ? पहले उसे इस मजबूत दीवार से टकराना होता है, उसके बाद ही वह हमारे तक आ सकती हैं। 

गुरुवार, 28 जुलाई 2016

लकीरें किस्मत की

Lakeeren Kismat Ki in Hindi


आज,  क्यों ना हम सभी अपने हाथों में खींची हुई लकीरों की बात करें।  हमारे हाथों में जन्म से न जाने कितनी छोटी -बड़ी, टेढ़ी-सीधी रेखाएँ होती हैं और जैसे -जैसे हम बड़े होते जाते हैं,  इन रेखाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होती चली जाती है। आखिर ये रेखाएँ हमारे हाथ में क्यों होती हैं  ? क्या इनका हमारे जीवन से सचमुच कोई संबंध होता है ? बहुत ही विचारणीय प्रश्न है ये। इन रेखाओं के द्वारा क्या हमारा भाग्य निर्धारित होता है ? क्या ये हमारे किस्मत का फैसला करतीं हैं ?   हम सभी के मन में  हाथ की इन रेखाओं से जुड़े ना जाने कैसे -कैसे प्रश्न होते  हैं  ? पर आज -तक हमें इसका कोई उत्तर नहीं मिल सका है। 

अपने हाथ की रेखा को जानने, समझने तथा इससे जुड़ी अपने किस्मत को जानने के लिए हम ना जाने कितने ज्योतिषियों -पंडितों की जेब को गर्म करते हैं और वो हमें तरह-तरह के उपायों को बता कर हमारी  मुश्किलों को और ज्यादा बढ़ाते हैं। ना जाने कितने पूजा-पाठ, मंत्र-तंत्र ,व्रत-अनुष्ठान हमसे करवाते हैं। पर क्या इन कार्यों को करने से हमें उचित समाधान मिल जाता है ? क्या इससे हमारे हाथ की लकीरें विपरीत दिशा में बदल कर  हमें सौभाग्यशाली बना देंगी ? हमारी  सभी परेशानियों को दूर कर देंगी ?

गुरुवार, 21 जुलाई 2016

अधूरे सपने

Adhoore Sapne in Hindi

सपने कौन नहीं देखता  ? हर शख्स के आँखों में एक सपना होता है - कुछ कर दिखाने का। बहुत से ऐसे Lucky Person होंगे, जिनके ऊपर अपने माता-पिता व ईश्वर का आशीर्वाद होता है और जो  अपने सपने को पूरा कर पाते  हैं। कुछ लोग  जीवन में परेशानियों का सामना करते -करते, उनके सपने उनकी खुद की नजर से धुंधले हो जाते हैं। उनके कन्धों पर जिम्मेदारियों का इतना बोझ होता है कि बस उसे निभाने में दिन रात लगे रहते हैं,  अपना सपना पूरा करने की  उनकी बारी आ ही नहीं पाती। ऐसे भी लोग होते हैं, जो सपना देखने से डरते हैं कि वो ना जाने पूरे हो सकेंगे या फिर नहीं। पर क्या हमें सपना देखना छोड़ देना चाहिए ?

हम मन में अपने कैरियर बनाने का सपना लिए बड़े होते हैं और जब निराशा हाथ लगती है तो मन बहुत परेशान हो जाता है। कैरियर बनाने का सपना सच करने के लिए न सिर्फ कठिन परिश्रम बल्कि अच्छी सूझ -बुझ का होना भी बहुत  अनिवार्य है। आगे एक Story पढ़िए, जो इसी तथ्य को दर्शाती  है । 

रविवार, 17 जुलाई 2016

मेरी रसोई से-2

ॐ नमः शिवाय


अब सावन का महीना आ गया है। इस माह में हम भोले नाथ की पूजा अर्चना करते हैं। भगवान शिव को तीनों लोकों का स्वामी माना जाता है। सावन के  महीने में जो भी  उनकी पूजा अर्चना करता है, उसकी सारी मनोकामनायें पूर्ण हो जाती हैं। भगवान भोले नाथ  सिर्फ एक बूंद  जल से प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी महिमा  अपार है। इस महीने पूजा और व्रत हम सभी करते हैं तो क्यों ना आज कुछ व्रत के व्यंजनों  की बात जाय --

शनिवार, 9 जुलाई 2016

अवधारणा

Avdharna in Hindi

 जब भी किसी परिवार में लड़की का जन्म होता है, तो  परिवार के सभी सदस्य उदास हो जाते हैं। उनके चेहरे ऐसे उतरे होते हैं, जैसे कि रुपयों से भरा बैग किसी ने उनसे छीन लिया हो। और इसके विपरीत यदि घर में बेटे का जन्म होता है, तो  इस बात की खुशी सभी के चेहरे पर झलकती है। सब खुश हो जाते हैं। कैसा अन्याय है ये ! कैसी सोच है ये ! एक ही गर्भ से जन्म  लिए हुए एक माता के दो संतान के प्रति लोगो के विचार इतने अलग कैसे हो सकते हैं ?

बेटियाँ ,एक ऐसा अमूल्य वरदान होती हैं, जो हमें अच्छे कर्म करने के फलस्वरूप प्राप्त होती हैं। सभी को ईश्वर इतनी जिम्मेदारी के काबिल नहीं समझता और जो उनके योग्य होते हैं, उनको ही ये वरदान प्राप्त होते हैं। बेटियां बचपन से ही माँ -बाप का सहारा बन कर रहती हैं और अपने गुण और माता - पिता से प्राप्त संस्कारों को लेकर अपने ससुराल जातीं हैं और  वहाँ के परिवार को भी  सहेजती ,संभालती हैं।

बुधवार, 6 जुलाई 2016

ईद मुबारक

Eid Mubarak in Hindi


"एक नई दिशा " की तरफ से आप सभी मित्रों को ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ !



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सोमवार, 4 जुलाई 2016

डायरी के पन्नों से-3

             पिछला पन्ना - डायरी के पन्नों से-2

बहुत दिन हो गए हमने अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचा भी नहीं। हम सभी कार्यों को तो भली भाति भाग -दौड़ कर निपटा लेते हैं पर हमें घर के सभी सदस्यों की देखभाल करने में और खुद के बारे में सोचने की फुर्सत ही नहीं मिल पाती है। और जब हमारे आराम का समय आता है तो हमें पता चलता है कि हमें सर्दी ,सर दर्द ,जुकाम व ना जाने कितनी मौसम की बीमारियों ने जकड़ रखा है। अगर ऐसे समय अगर घर पर संयोगवश दवा भी खत्म हो गई हों तो फिर क्या करें  ? मैं आपके ऐसी ही मुश्किलों को दूर करने के लिए कुछ घरेलू टिप्स ले कर आई हूँ जिनकी  डिस्पेंसरी तो खुद हमारी स्वयं की किचन होती है, जिनसे न केवल स्थाई रूप से आराम मिल सकता है वरन हमारी कठिन व जटिल परिस्थिति में हमारे मददगार जरूर साबित हो सकते हैं -

तो यह हैं कुछ घरेलू नुस्खे .... 


-कैसी भी खाँसी आने पर अदरक के छोटे -छोटे टुकड़े देशी घी में पकाकर हल्का गर्म ही खाने से आराम मिल जाता है। 


-जुकाम होने पर गर्म दूध में थोड़ी सी देशी घी व छुहारा उबालकर इसमें थोड़ी इलाइची ,केशर मिलकर सेवन करने से जुकाम ठीक हो। 


- यदि गर्म दूध में थोड़ी हल्दी पकाकर हल्का गर्म पिया जय तो मौसमी बिमारियों से काफी राहत मिल जाती है। 

-गुड़ व काली मिर्च को थोड़े पानी में पकाकर चाय की तरह पिया जाय तो सर्दी -जुकाम ठीक हो जाता है। 

शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

यारियाँ

Yaariyan in Hindi

दोस्ती हमारे जीवन में बनने वाले उन सभी रिश्तों में सबसे अनूठा, एक अलग प्रकार की अनुभूति कराने  वाला रिश्ता होता है। सभी रिश्ते तो हमें बने बनाए मिल जाते हैं ,पर  हम दोस्ती तो स्वयं अपने मन पसंद, दिल को अच्छा लगने वाले साथी से ही करते हैं। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसमें ऊंच -नीच ,जात -पात ,गरीबी -अमीरी नहीं होती। एक सच्चा मित्र मिल जाने के बाद जीवन में आने वाली ना जाने कितनी मुश्किलों का समाधान मिलता चला जाता है। 

सबसे अनोखी होती है हमारे बचपन की दोस्ती। इसके क्या कहने ! इसमें हर छोटी सी छोटी चीज शेयर करने का अपना अलग ही आनंद होता है। लंच में माँ ने कितनी भी टेस्टी चीज खाने को क्यों ना दीं हों, पर दोस्त के साथ निवाला खाये बिना सब फीका लगता है। वो हमारी पानी की बॉटल, जो हम सभी दोस्तों के ना जाने कितनी बार होठों से लगकर हमारी प्यास बुझाया करती थी, ना जाने उस बॉटल में ऐसा क्या था जो , फिर भी जूठी नहीं होती थी।

शनिवार, 18 जून 2016

अपरिपक्वता

Aparipakvata in Hindi

हमने बच्चों को अक्सर खेलते हुए देखा होगा। कितनी ऊर्जा होती है उनके भीतर ! दिनभर हँसते  मुस्कुराते रहते है। उनके नन्हे कदम दिन-रात दौड़ते रहते हैं,फिर भी नहीं थकते। बच्चों के चेहरे देखकर ऐसा लगता है, जैसे ईश्वर ने उन्हें सारी खुशियाँ दे दी हैं। वो कितनी सुकून भरी जिंदगी जीते हैं ! बच्चों के वह खेल -खिलौने, वह बोतलों के ढक्क्न ,वह माचिस की डिबिया ,वो नन्हे बर्तनों का पिटारा ,छोटी सी कार जिसमें दुनियाँ की सैर करते रहते हैं। बच्चों का जीवन भी क्या जीवन होता है ! हर कार्य को करने का कितना उत्साह भरा होता है उनमें !  पर ये ऊर्जा बड़े हो जाने पर कहाँ  खो जाती है ? 

हमने नन्हे बच्चे को देखा होगा,  जो अपने पराये का भेद नहीं जानते। जरा सा किसी का इशारा क्या मिला, खिलखिला कर हँस देते हैं। वो मासूम मुस्कराहट ऊँच -नीच ,गरीबी -अमीरी ,अपने -पराये से कितनी अछूती है। और हम बड़े जब भी किसी से बात करते हैं, तो हम हमारे मन में मंथन करते रहतें हैं कि वह कैसा है ? हमारा क्या लगता है ? उसका स्टेटस कैसा है ? वगैरा -वगैरा। 

मंगलवार, 14 जून 2016

नफ़रत

Nafrat in Hindi


बात उन दिनों की है ,जब शेखर स्कूल में पढता था। वह पढाई में बहुत ही होनहार था। उसके जीवन में एक ही शख्स था और वो थीं उसकी दादी, जिनसे शेखर बेइंतहां नफरत करता था। उसके माता -पिता के गुजर जाने के बाद दादा और दादी ने शेखर को सम्भाला। जब शेखर मात्र 7 वर्ष का था, तभी दादाजी ने भी दुनियां को अलविदा कह दिया। अब महज शेखर की दादी ही थीं ,जो शेखर का ख्याल रखतीं थी।  पर ऐसी क्या वजह थी जो शेखर अपनी दादी माँ से इतनी नफरत करता था ? उसकी वजह  दादी का एक आँख का होना था। जिसके कारण शेखर के दोस्त उसे चिढ़ाते थे। शेखर के घर कोई भी दोस्त आना नहीं चाहते थे। शेखर का  दादी के प्रति नफरत दिन -ब -दिन बढ़ता  जा रहा था ।

एक दिन शेखर अपना टिफिन घर पर भूल गया  और  दादी शेखर को टिफिन देने के लिए शेखर के स्कूल चली गईं। फिर वही हुआ जिसका शेखर को डर  था। जैसे ही दादी स्कूल में आई, शेखर को दादी के जाते  ही
 बच्चे  चिढ़ाने लगे। शेखर को यह बाद इतनी बुरी लगी कि उसने घर आकर अपनी दादी से कह दिया कि आप भी दादा जी की तरह भगवान के पास क्यों नहीं चली जातीं ? मैं आपकी शक्ल भी नही  देखना चाहता हूँ।

गुरुवार, 2 जून 2016

मिठास की कड़वाहट

Mithas ki Kadvahat in Hindi

क्या बात थी ? आज रामू बहुत खुश था। बहुत ही ज्यादा खुश। आज जीवन में पहली बार उसकी हाथों में मीठे ,शुद्ध देशी घी से बने पेड़ा का दोना जो  था,  जिसकी केसर और इलायची  खुशबू रामू के तन -बदन को महका रही थी। वह बस एक टक पेड़े के  दोने को देखे जा रहा था। तभी मालकिन की आवाज सुन कर रामू की तन्द्रा टूटी।  मालकिन ने  रामू से कहा," साहब ने  जो कागज दिया था, वो कहाँ है ?"। रामू  को  मालिक ने जो कागज दफ्तर से घर ले जाकर देने को कहा था, उसने उसे मालकिन के हाथों में पकड़ाते  हुए, वह  एक बार फिर से  पेड़ों की मिठास की दुनियां में खो गया। वह यही सोच रहा था कि ये पेड़े खाने में कितने स्वादिष्ट  होंगे।

तभी मालकिन ने रामू से कहा,"रामू ! बैठे क्यों हो ? खाओ ना। " मालकिन की बात सुन कर रामू को रहा न गया और उसने एक पेड़ा उठाकर मुंह में रख ही लिया। फिर  उस पेड़े की मिठास से रामू का रोम -रोम आनन्दित हो गया। एक पेड़ा खाने के बाद उसको अपने परिवार का ख्याल आया।  

मंगलवार, 24 मई 2016

धूप-छाँव

Dhoop-Chhav in Hindi

अपने जीवन में  प्रतिदिन हमने दिन -रात होते देखा होगा . बस हमारा मन भी इसी दिन -रात  की तरह ही है। कभी खुशियों का प्रकाश हमारे होठों  मुस्कराहट देता है, तो कभी गम के गहरे अंधियारे में हम कहीं खो जाते हैं। और जाने कब हमारे आँखों से आसूं छलक जाते हैं ? हमारा इन भावनाओं पर कोई वश नहीं होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कि  सूर्य उदय होने पर सूरज की किरणों को कोई धरती पर आने से कोई रोक नहीं सकता चाहे कितना भी घना कोहरा क्यों ना हो।

ये जीवन भी उसी प्रकार है इसमें परेशानियाँ ,सुख -दुःख, धूप छाव की तरह ही आते रहते हैं। जिन लोगो ने भी जन्म लिया है वो इन भावनाओं से अछूता नहीं रह सकता है। मैं ये मानती हूँ कि जीवन में कुछ परेशानियों का हल मिल पाना जल्दी सम्भव नहीं हो पता पर वो परेशानी भी तो हमेशा नहीं रहने वाली है। फिर कैसा घबराना  ? कैसी चिंता ? जीवन का निर्माण हुआ, तभी ये भावनाएं मन में उम्र के साथ स्वतः ही आ गई। जब ये भावना नहीं होगी तो सुख -दुःख की अनुभूति भी नहीं होगी ,फिर हमारा जीवन कैसा होगा जरा कल्पना कर के देखिये।  

शनिवार, 21 मई 2016

पेट की भूख

Pet Ki Bhookh in Hindi

ऐसा  हम सभी के साथ होता है  कि हम जब कुछ अच्छा करते हैं  तो हमारे दिल में एक अलग प्रकार की सुख की अनुभूति होती है और जब गलत करते हैं , उस वक़्त उस पल जरूर हमारे मन को थोड़ा अच्छा लगता है ,लेकिन जीवन में जब हमारा किसी  परेशानी से वास्ता  होता है तो हमें पहले की हुई गलती का पश्चाताप होता है ,जिसे हम कभी भी पीछे जाकर सुधार नहीं सकते।

 इस बदलते ज़माने के दौर में जहाँ लोग रिश्तों को फायदे से तोलने के बाद बनाते हैं , रिश्तें के  अपनापन में पुश्त - दर -पुश्त  बदलाव आता जा रहा है। पहले के लोग रिश्ते  के प्रति इमोशनल होते थे। फिर एक दौर आया, जब लोग रिश्तों को प्रेक्टिकल हो कर देखने लगे कि किन रिश्ते को जोड़ने में हमें फायदा होगा उसी से खुद को जोड़ने लगे। आज -कल की सोच तो सबसे ज्यादा स्वार्थ पूर्ण हो गई है। आज के युग के लोग किस रिश्ते में कितना प्रतिशत फायदा पहुंचेगा ये सोच कर बनाते  हैं।

क्या भावना किसी के हाथ की कठपुतली है  कि जैसे जी चाहा उसका डोर वैसे ही खींचेंगे ?  खैर इस पर जितनी चर्चा की जाय कम है। आज मैं किन बातों को लेकर बैठ गई और सोच के किस समंदर में डूब गई और उसके छीटें आप सभी पर पड़े। माफ़ कीजियेगा !

शनिवार, 14 मई 2016

तलाक़

Talak in Hindi

जीवन में हम सभी रोज किसी न किसी उलझनों से घिरे रहते हैं। कुछ उलझन तो बिन बुलाये आ जाते हैं ,और कुछ हमारे द्वारा निमंत्रण देने पर आते हैं, जिसके लिए हम खुद जिम्मेदार होते हैं।

एक वो भी दौर हुआ करता था, जब शादी हो जाने के बाद पति -पत्नी एक दूसरे के ऊपर अपना सारा जीवन न्योछावर कर देते थे। एक दूसरे की भावनाओं का  सम्मान करते थे व एक दूसरे में अपनी पूरी दुनियाँ समझकर जीवन जीते चले जाते थे। हमने कभी भी ये नहीं सुना होगा कि दादा -दादी में नहीं निभी तो उन लोगों ने तलाक ले लिया। या फिर ताऊ जी, जो ज्यादा बड़ी माँ पर गुस्सा करते थे, तो ताई जी ने अलग होने का निर्णय ले लिया। ऐसा तो हमने अपने माता -पिता के साथ भी नहीं देखा। पर आजकल की पीढ़ी ,जो जरा सी परेशानी की हवा क्या चली एक दूसरे का मुँह तक नहीं देखना चाहते। थोड़ी सी ऊंच -नीच होने पर उनको एक मिनट भी नहीं लगता- अलग होने का फैसला लेने में। सच कितनी मॉडर्न हो गई है आज कल की  पीढ़ी !

शुक्रवार, 6 मई 2016

छल भाग-2

Chhal Part-2 in Hindi


इस कहानी को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

करन ने  नेहा को कॉल लगाई, फिर नेहा ने करन से कहा ," तुमने पहले कितने लड़कियों के साथ रात गुजारी है ? " नेहा की बात सुन करन हतप्रभ रह गया। चार दिनों तक वह ठीक से खाना भी नहीं खा सका। फिर करन ने खुद को सम्भाला और अगले दिन करन ने कॉल फिर से  लगाया ,पर नेहा का फोन नहीं उठ रहा था, जैसे वह जान बूझ कर करन को तड़पाने के लिए ऐसा कर रही थी। फिर करन की नेहा से बात हुए एक महीना होने को आया।

करन रोज मार्केट जाता था ,इसी आशा  में की कही नेहा की एक झलक देखने को मिल जाये। फिर एक दिन संजोगवश  नेहा की सहेली बैंक में मिल गई ,उसने बताया ,"नेहा अब I.A.S. की तैयारी कर रही है। उसने कहा है कि तुम अगर नेहा से शादी करना चाहते हो तो तुमको I.A,S. Clear करना होगा।तभी वो तुमसे शादी करेगी ,वरना उसे भूल जाओ।"

बुधवार, 4 मई 2016

छल भाग-1

Chhal Part-1 in Hindi

मैं आज बहुत खुश हूँ। आप सभी के विचार Comment के द्वारा  मुझ तक पहुंच रहे हैं। आप सभी Viewers, जिन्होंने  Comments किया और जिन लोगों ने नहीं किया उनका भी,  तहेदिल से शुक्रिया !

छलावा - इसे  हम आँखों का भ्रम भी कह सकतें हैं। कुछ चीजें ना होने पर भी हमें उनके होने का अहसास होता है और ये हमारी भावनाओं को भी कष्ट पहुँचा देती हैं। बहुत से ऐसे लोग होंगे, जो सामने वाले की Activity देखकर भ्रमित हो जाते  हैं। उनको अच्छा या बुरा समझ लेते हैं और उनसे धोखा खा जाते हैं। तो क्या इसमें दोष किस व्यक्ति का होता है ? सिर्फ धोखा खाने वाले का या फिर धोखा देने वाले का भी । मैं ये जानती हूँ कि इस प्रश्न का उत्तर देना थोड़ा कठिन कार्य है। पर हमें खुद को इस भ्रम के चक्कर से बचाकर  रखना चाहिए। ताकि कोई हमारा फायदा ना उठा सके व हमारी कोमल दिल की भावनाओं को कोई आहत ना कर सके।

शनिवार, 30 अप्रैल 2016

फुरसत के दो पल

Furasat Ke Do Pal in Hindi

आज कल हम सभी को क्या हो गया है  ? हम सभी किस अंधी दौड़ में शामिल होते जा रहे हैं  ? हमारा सुबह उठने के बाद सिर्फ एक ही लक्ष्य हो गया है- कामयाबी और पैसा कमाना । पर क्या आपने कभी ये सोचा है कि जब हम सभी जीवन के ऐसे मोड़ पर पहुँचेंगे, जब हमें ये दोनों चीजें हासिल तो हो गई होंगी तो  फिर  हमें याद आएंगे हमारे वो बीते हुए अनमोल पल, जो हमने यूू  ही  भाग -दौड़ में गवां दिए और जब अपने बच्चों को अपनी Life Enjoy करते देखेंगे तो हमारा दिल खुद को क्या माफ़  कर   सकेगा ?

हमारे चेहरे  की सिलवटे हमसे सवाल करेंगी कि   हमने खुद के खुशियों का गला क्यों घोट दिया  ? क्या वो लम्हे हमें फिर से कोई जीने को दे सकता है  ? नहीं ना ! ये हम सभी जानते व मानते है कि कही हुई बात और बीता  हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता। तो क्या अपने और अपने दिल से अजीज लोगो के साथ हम सही कर रहे हैं ? अब कौन  सा समय निकल गया है इस भाग-दौड़  की Life में कुछ    मीठे पल  हमारे उन अपनों  के नाम कर दीजिये जिन्होंने अपने जीवन को हमारे लिए  समर्पित किया है।

बुधवार, 27 अप्रैल 2016

खुल कर जिओ


ऐसा हमारे साथ अक्सर होता है  कि हम  सामने वाले की कही बातों को मन से लगा लेते हैं और वो बातें हमारे मन पर इस प्रकार हावी  जाती हैं कि उनसे बाहर निकल पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। मैंने भी अपनी इसी कमजोरी के कारण न जाने कितने वर्षों तक खुद से संघर्ष किया है मगर आज मैं  लोगों के विचारों से खुद के मन को आहत नहीं होने देती हूँ।

 जब भी कोई ऐसे  व्यक्ति का विचार जो मेरे मन को दुखी करता है तो मैं  स्वतः ही उससे बाहर  निकलने का प्रयास करती हूँ और मैं उसमे कामयाब भी हो जाती हूँ। सच मानिये मेरे पास ऐसा कोई भी नहीं है, जिसके साथ मैं  अपनी परेशानियों को बाँट  सकूँ। मगर मैंने जीवन से सीखा  है कि जब भी बुरे विचार  हावी हो तो उनको तुरंत मन से झटक देना चाहिए। और नकारात्मक विचार वाले लोगों से दूरी बनाकर रखना चाहिए। ऐसा सभी  के साथ होता होगा। जब हमें कोई दिल को चुभने वाली बात कहता है तो हमारा मन  उदास हो जाता है।

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

उम्मीद बेटी की

Ummeed Beti Ki in Hindi

"माँ" एक ऐसा शब्द है,जो  बच्चे के मुख से निकलने वाला पहला शब्द होता है। उसके लिए अपनत्व का पहला अहसास, जिसके पास वो  जीवन को सुरक्षित समझता है।  इस रिश्ते के अनुभव से बच्चा प्यार जैसी भावना का अहसास करता  है। और माँ की बच्चे के प्रति निस्वार्थ प्रेम की अनुभूति हमें यही शिक्षा देती  है कि जब हम किसी को दुनिया में लाने  की वजह होते है तो उसके प्रति हमारी जिम्मेदारियाँ और ज्यादा बढ़ जाती हैं। कौन सा  ऐसा शख्स होगा जो अपनी माँ को प्यार नहीं करता होगा  ?

मैंने माँ पर पहले एक स्टोरी आप सभी के साथ शेयर की थी, जो माँ के  रिश्ते का एक कड़वा अनुभव थी। पर हर माँ ऐसी नहीं होती है। माँ का प्यार एक ऐसे फूल के समान होता है, जो  जहाँ भी खिला होता है, वहाँ का वातावरण शुद्ध व सुगंधमयी कर देता है ।  कभी कभी जीवन की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हमें अपने परिवार की खुशियों के लिए, उनको अच्छा जीवन देने के लिए अपने माता -पिता से दूर हमें अपने परिवार को साथ लेकर रहना मज़बूरी बन जाती है। पर हमें अपने माता पिता के प्रति अपने कर्तव्यों को हमेशा याद रखना चाहिए।

गुरुवार, 14 अप्रैल 2016

नज़रिया

Nazaria in Hindi

मेरी शादी को कई वर्ष बीत गए हैं।  पर जब मैं अपने कॉलेज के  दिनों के बारे में सोचती हूँ ,तो मन में जो तस्वीर सामने आती है, वो आज भी वैसी की वैसी ही है। हम बदल गए। हमारा रहन -सहन ,पहनावा, यहाँ तक कि  हमारे खान -पान में भी काफी परिवर्तन आ गया है। मगर आज जो नहीं बदला वो है- लोगों की आदतें। उस वक्त के कुछ  लड़कों का काम था कि उनको जब भी समय मिलता, वे गली-नुक्क्ड़ पर खड़े हो जाया करते थे। उस समय भी मुझे उन मनचले लड़कों की कमेंट पास करने की मानसिकता समझ में नहीं आती थी।  और आज भी जब ऐसी घटना के बारे में मैं अपने आस -पास सुनती हूँ  तो उन लड़को पर हंसी  भी आती है और गुस्सा भी। वो लड़के क्यों इस बात को नहीं समझते हैं कि उनके इस तरह के व्यवहार से सामने वाले पर क्या गुजरती होगी ? 

मुझे आज भी याद आता है, कॉलेज जाते समय, मैं  रास्ते में अपनी दोस्त के घर उसे साथ लेने के लिए जाती थी। उसके  घर तक जाने के लिए एक  गली पार  करनी होती थी । उसी गली में कुछ लड़कों  की टोली बैठा करती थी। मैं और मेरी दोस्त जब भी कॉलेज जाने के लिए निकलते थे ,तो वो ना जाने क्या उलटी -सीधी बातें बोलने लगते थे। हम दोनों उन लड़कों के इस व्यवहार से गली से गुजरने में बहुत ही असहज महसूस किया करते थे। आखिर उनको क्या आनंद आता था, ऐसा करते हुए। पर उनके ऐसे अभद्र व्यवहार से हमारे मन में उन लोगो की बहुत बुरी छवि बनती थी, जो उन लड़कों को शायद नहीं पता था। 

मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

हमारे मददगार

Hamaare Madadgaar in Hindi

आजकल महंगाई की वजह से हर कोई परेशान है, चाहे वो किसी भी आय- वर्ग का क्यों ना हो। हर आय-वर्ग के परिवार का मुखिया परिवार के दायित्वों को अच्छी  तरह निभाने के लिए दिन रात लगा हुआ है। वो सदस्यों की जरूरतों को पूरी करते -करते परेशान  हो जाता है।  जरा सोचिये ! जिन घरों का चूल्हा रोज की कमाई से जलता हो तो इस बढ़ती महंगाई ने उन लोगों पर क्या प्रभाव डाला होगा ? गरीब घरों की अशिक्षित महिलायें अपने घरों को चलाने के लिए दूसरों के घरों का काम -काज करने के लिए कितनी मजबूर हो जाती हैं ? 

हमारे हेल्पर, जिनको हम अपने आराम  के खातिर  उनको  काम करने के लिए रखते हैं, वो कैसे अपने घर का काम और साथ में  हमारे जैसे ना जाने कितने घरों का काम करती हैं। वो इतना काम कैसे कर पाती हैं, सोच कर आश्चर्य होता है ! मेरे घर में भी एक हेल्पर आती हैं।  अपने पति के देहान्त हो जाने के बाद बच्चों के पालन -पोषण की जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने  के लिए मज़बूरी वश ये काम करतीं हैं । कभी-कभी मैं ये सोचती हूँ कि  कितना कठिन काम है उनका ? वो  कार्य  जो हमारे  खुद के घर के होते हैं , हमें उनको  करने में कठिनाई  होती है। और हम अपने हेल्परों को वो सारे  काम चंद रूपये देकर अधिकारपूर्वक करवाते हैं। 

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

हमारी सेहत

Hamaari Sehat in Hindi
विश्व स्वास्थ्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इससे ठीक  पहले मोटापे को लेकर बेहद चौका देने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है। इसके अनुसार दुनिया भर में मोटापा युवाओं को बड़ी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। 2014 तक के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट मेडिकल जनरल दि लैसेंट में प्रकाशित हुई थी। इसके अनुसार 2025 तक हर पाँचवा युवा मोटापे की आगोश में होगा, जिसमें 18 % पुरुष व 21 % महिलाएं होंगी।

आप बी एम आई के द्वारा  खुद पता लगा सकतें है कि मोटापे की खतरे की रेखा के ऊपर हैं या फिर नीचे। ,यह जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको अपनी लम्बाई के वर्गमीटर का अपने वजन (किलो ग्राम ) में भाग देना होगा, जिससे आपको अपना बी एम आई प्राप्त हो जायेगा। (जैसे किसी व्यक्ति की लम्बाई 5 वर्गमीटर है और वजन 70 किलो ग्राम तो 70 /5 =14 तो इस प्रकार उस व्यक्ति की बी एम आई 14 होगी।)
इसमें आये परिणाम के द्वारा अपनी खतरे की अवस्था का पता लगाया जा सकता है--

सोमवार, 4 अप्रैल 2016

नये-पुराने

Naye Purane in Hindi

कंकड़ -एक छोटा सा टुकड़ा ,जो शिला से टूटकर अलग हो जाने से स्वतः ही बन जाता है। जो अपने अस्तित्व की पहचान बनाने के लिए निरन्तर प्रयास करता रहता है। एक शिला, जो की गढ़े जाने के बाद  धर्म और आस्था की प्रतिमूर्ति बन  जाती  है,  पर हमारा ध्यान उस  नन्हें कंकड़  पर नहीं  जाता है, जो उस  शिला का हिस्सा था, जिसे छीनी हथौड़े की चोट से अलग कर दिया जाता है।  क्या कसूर  होता है उसका ? कुछ लोगों  का जीवन भी  उस छोटे से कंकड़ के सामान ही होता है, जो निरन्तर अपने अस्तित्व की तलाश में प्रयत्नशील रहता है।

मैं सोचतीं हूँ कि क्या  सिर्फ ऊँचे कुल में जन्म ले लेने मात्र से कोई महान  व्यक्ति  जाता है ? क्या वो सारे  गुण उस व्यक्ति के  व्यवहार में स्वतः ही आ जाते हैं ? नहीं। मेरा मानना है कि व्यक्ति के सुन्दर व्यक्तित्व और अच्छे मन का आइना उसके अच्छे कर्म होते है। यही सब उसके व्यक्तित्व की एक पहचान बनाते हैं। जो लोग ऐसा सोचतें हैं कि ऊँची जात, ऊँचे कुल में जन्म ले लेने मात्र से ही उनका भाग्योदय हो जाता है, तो उनकी ऐसी सोच गलत है। अपने कर्मों  द्वारा  व्यक्ति दूसरों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाता है, जो जीवन पर्यन्त नहीं मिटती।  हमें अपने कर्मों पर हमेशा भरोसा  रखना चाहिए।  क्योंकि कर्मो के द्वारा ही हम अपने भाग्य को संवार सकते है।  समय का क्या है, वह कभी एक जैसा नहीं रहता।

बुधवार, 30 मार्च 2016

क़सक

Kasak in Hindi

"बाबा ! अगर मैं मर गई, तो इन दहेज़ के लालचियों को सजा जरूर दिलवाना। मेरी लाश को सफ़ेद कफ़न में ओढ़ाना। मैं अब किसी की सुहागन नहीं हूँ। मैं एक विधवा हूँ।"

प्रेमा की लिखी बातें पढ़कर पिता की आँखें नम  हो गईं। दिल में बस यही कसक रह गई  थी कि काश ! उस रात   फोन उठाया होता तो, प्रेमा आज अपने बाबा के साथ होती।

 प्रेमा अपने पिता की लाडली बेटी थी,जैसे  हर बेटी अपने पिता के जीवन का प्यारा हिस्सा होती है। प्रेमा की  माँ का स्वर्गवास तभी हो गया था,जब वह 4 वर्ष की थी।  वह अपने पिता से माँ और बाबा दोनों का प्यार पाती थी। प्रेमा के बाबा ने उसे कभी भी माँ की कमी महसूस नहीं होने दी। अब प्रेमा ग्रैजुएट हो गई थी। प्रेमा की शादी की चिंता उसके बाबा को सताने लगी, मगर प्रेमा और पढ़ना चाहती थी। बाबा के कहने पर वो शादी के लिए राजी हो गई । शादी की बात चलते ही, प्रेमा बहुत उदास रहने लगी थी। उसे अपने बाबा की चिंता थी कि  उसकी शादी के बाद उनका ख्याल कौन रखेगा ?

सोमवार, 28 मार्च 2016

तनाव से मुक्ति कैसे पाएँ ?

How to Remain Tension Free ?

तनाव हम सभी के जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा  है। कभी -कभी हम इसकी  गिरफ्त में इतनी ज्यादा आ जातें हैं ,जो  हमारे लिए हर  तरह से नुकसानदायक होता है। कई बार तो हमें ये ज्ञात भी नहीं हो  पाता  है कि  हमें तनाव है। इसलिए इसे समझकर इससे निजात पाना बहुत जरुरी  है। नीचे तनाव दूर करने के कुछ नायब तरीकें है, जो तनाव की स्थिति को काबू में करने  व  उसको दूर करने में सहायक सिद्ध होंगे -

-आप अपने विचारों का मूल्यांकन करें, इससे आपकी चीजें साफ और स्पष्ट होंगी। आपको अपने लक्ष्यों को पानें व साफ  देखने में मदद मिलेगी।

-समस्याओं के बारें में जानना ही काफी नहीं है ,जरुरी यह भी है कि  सही व साइंटिफ़िक तरीके से समस्या को समझ कर उसे दूर किया जाय।

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

सकारात्मक सोच

Sakaratmak Soch in Hindi

आजकल जहाँ कही भी देखिये, लोगों में एक बात सबसे कॉमन  रूप से देखने को मिल जाती है और वो है कि -- दूसरों में दोष निकालना। चाहे वह व्यक्ति किसी भी उम्र का क्यों न हो, दूसरों पर  दोषारोपण करने की आदत सभी की हो गई है। हमें दूसरों में दोष ही दिखाई देता है और उनकी कमी का पता चलते ही हम उसका मजाक बनाने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसी भावना  हमारे मन में क्यों आती है ? क्या कोई व्यक्ति सर्वगुणसम्पन्न  होता है ? सभी में एक न एक कमी अवश्य ही होती है। 

जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो वह सिर्फ खाना ,रोना और नित्य कर्म को ही  जानता है। मगर दुनिया में आँख खोलने के बाद माता -पिता और समाज की सहायता के द्वारा ही जीवन जीने के गुणों और व्यवहारों को सीखता है। फिर हम किसी व्यक्ति का  दोषारोपण  कैसे करे सकते है, जिसको हमने खुद ही साँचे में ढाल  कर निकाला है। अगर किसी में कोई दोष है, तो उस पर हँसने वालों की कोई कमी नहीं है। और जिसका मजाक बनाया जाता है, उसके मन पर क्या बीतती है इसके बारे में कोई सोचता तक नहीं है। अगर हम एक बार खुद के अंदर झांक कर देखते हैं तो क्या हमारा दिल हमें सबसे बेस्ट मनाता है ? ये जवाब हम खुद से नहीं पूछ सकते हैं, क्योंकि खुद की खामियों को स्वीकारनें के लिए बहुत बड़े जिगर की जरुरत होती है, जो सभी में नहीं होता है।  मगर जो खुद की कमियों को स्वीकारतें है, वह ही  उसको दूर करने में सफल भी होतें हैं।

बुधवार, 23 मार्च 2016

होली है !

Holi Hai in Hindi


"एक नई दिशा !" की तरफ से आप सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !





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मंगलवार, 22 मार्च 2016

आकर्षण

Aakarshan in Hindi

हर व्यक्ति जीवन में उम्र के कितने ही दौर से गुजरता है। उसकी विचारधारा में परिवर्तन आता रहता है ,और उसकी मनःस्थिति  हमेशा बदलती रहती है। बचपन, सभी चिंताओं से मुक्त, जवानी, मस्ती भरा जीवन व वृद्धावस्था में, हमारे विचार व व्यवहार में स्वतः ही गंभीरता व शालीनता आ जाती है। आज मैं उम्र की उस पड़ाव के बारे में बात करना चाहती हूँ , जो बचपन और जवानी की  उम्र के बीच आता है।  उस समय हमें अच्छे मार्ग-दर्शन की आवश्यकता होती है , क्योंकि  व्यक्ति उम्र के उस दहलीज़ पर खड़ा रहता है ,जहाँ पर उसे किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं भाती । वह अपनी मर्जी के अनुसार जीवन जीना चाहता है और इस उम्र में माता-पिता के मित्रवत सम्बन्ध की सबसे ज्यादे आवश्यक्ता पड़ती है।

इस उम्र के दौरान ,बच्चों में अक्सर किसी व्यक्ति को लेकर आकर्षण उत्पन्न होना वाजिब है।  ऐसा शारीरिक रूप से परिवर्तन की वजह से होता है। उस समय हमें जरूरत है ,अपने बच्चों को समझने की , न कि अपनी बातों को उन पर जोर-जबरदस्ती  से थोपने की। ऐसा करने से वो आक्रामक हो सकते हैं और ऐसा व्यक्तित्व अपना सकते हैं, जो उनके भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उस समय एक माँ का उत्तरदायित्व सबसे ज्यादा हो जाता है कि वो अपने बच्चे के साथ मित्रवत सम्बन्ध बनाये रखे ताकि बच्चा अपने दिल की हर छोटी -बड़ी बात अपनी माँ से शेयर करे।

शुक्रवार, 18 मार्च 2016

पेन्सिल


नमस्कार ! आज मैं हम सभी के बचपन की  उस प्यारी पेन्सिल के बारे बात करना चाहती हूँ। बचपन के दिनों में पढाई के वक्त हम सभी ने  ये पेन्सिल नामक यन्त्र का इस्तेमाल किया होगा। उससे हजारों गलतियां भी की होंगी और उसके बेस्ट मित्र रबड़ ने  उन गलतियों को मिटाने में हमारी  मदद भी की होगी। ऐसा हमने न जाने कितनी बार किया होगा।  कभी अक्षरों को दुरुस्त किया होगा, तो कभी टेड़े- मेढे  लेटरों को ठीक किया होगा और आर्ट के पेपरों में न जाने कितने गिलास ,कप ,पतंग और लोगो के चेहरे को बनाया होगा। जहाँ -तहाँ दीवालों पर भी चित्रकारी का प्रदर्शन किया होगा। आपने  भी किया है न ! मैं जानती हूँ।  क्यों याद आया ना ? आपकी होठों  की मुस्कुराहट इस बात का सबूत  है। 

उस पेन्सिल की याद आते ही एक सुखद अनुभूति होती है। क्या दिन थे वो भी ? कितना लगाव हुआ करता था उस मुट्ठी भर के पेन्सिल से। न जाने क्यों, हम उसे फेंकना नहीं चाहते थे। माँ बोलती थी, टीचर डांटते थे कि छोटी पेन्सिल से मत लिखो। मगर मन में उस पेन्सिल से इतना प्रेम क्यों था ? मुझे समझ नहीं आता था। एक उम्र का दौर बीत जाने के बाद आज समझ में आता है कि हमें हमारी उस पेन्सिल से इतना प्रेम क्यों था ? वो हमारी बचपन की तरह ही मासूम था। जिससे लाख गलतियां कर जाने के बाद भी दोबारा मिटा कर सही किया जा सकता था। जैसे लोग छोटे बच्चे की नासमझी भरी बातों को भुला देते हैं। गलती कैसी भी हो और उनको माफ़ कर देतें हैं।

बुधवार, 16 मार्च 2016

अंतर्मन

Antarman in Hindi

हमारे मन-मष्तिस्क  में हर रोज हजारों विचारों का संचार होता रहता है। यहाँ तक कि जब हम सोतें है, तब भी हमारे  मष्तिस्क की  इन्द्रियाँ काम करती रहती हैं। ये विचार नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही प्रकार के होते हैं। कुछ लोग ज्यादा सकारात्मक सोच को  और कुछ लोग ज्यादा  नकारात्मक सोच को  रखने वाले होतें हैं। ये भी एक  सच है कि  हम अपने जीवन से संतुष्ट नहीं है, चाहे वो उच्च आय वर्ग के हों या फिर निम्न आय वर्ग के। सभी को अपने जीवन से शिकायतें हैं। हमें जो कुछ जीवन से मिलता है, हमें कम ही हमेशां लगता है। 

मैं मानती हूँ कि  कुछ लोगों को परेशानियां है ,जिनकी आय काम है या जो दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ नहीं कर पाते। सुबह से शाम तक काम करने के बाद भी उनके परिवार के सदस्य आधा पेट भोजन खा कर जीवन जीने को मजबूर हैं। मगर ऐसे लोग भी हैं ,जो मंहगे -महंगे सुख सुविधाओं से लैस होने के बावजूद असंतुष्ट  हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हमें हमेशा दूसरों का जीवन बेस्ट लगता है। हम खुद की हमेशा दूसरे व्यक्तियों से तुलना  करते रहतें हैं। आज आप अपने अंतर्मन से एक बार जरूर पूछिये कि क्या ये सही है ? दूसरे से खुद की तुलना मत करिये, क्योंकि  हम अपने आप में सबसे बेस्ट हैं।

सोमवार, 14 मार्च 2016

काश !

Kaash in Hindi

कुछ घटनायें हमारे सामने ऐसी भी आ जाती हैं ,जिनपर भरोसा  करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। जो हमें ये सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या इंसान भी ऐसे हो सकते हैं ?  ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना का प्रतिरूप है मानव। मगर हममें से ही कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनकी मानसिकता के बारे में बताया जाय तो विश्वास करना मुश्किल होगा। आज जो कुछ मैं  आपके समक्ष रख रहीं हूँ ,ये कोई कहानी नहीं है, ये मेरी आँखों देखी मर्मास्पद  वास्तविक घटना है, जो  मेरे हृदय को भीतर तक छलनी कर देती है। 

'माँ' एक ऐसा शब्द है ,जिसके नाम में ही पूरी दुनिया समाहित है। एक बच्चे के लिए माँ ही उसकी आदर्श होती है। आज मैं किसी माँ की  भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती हूँ , किँतु इस पोस्ट से किसी के दिल को ठेस पहुंचे तो माफ़ करियेगा। आज मैं एक ऐसी माँ के बारे में बताउंगी, जिसके बारे में  न आपने पहले कभी सुना होगा, न ही देखा होगा। 

शनिवार, 12 मार्च 2016

दस्तक

Dastak in Hindi

अपनी बुद्धि का इस्तेमाल न करके अपने कर्म को परिणाम में परिणत न करने वाले व्यक्ति खुद अपने  साथ  न्याय नहीं करते। हम सदैव ही दूसरों से अपेक्षायें करते रहतें हैं कि  दूसरा व्यक्ति हमारा सम्मान नहीं करता। पर  कभी हमने खुद के अंतर्मन में झाँक कर  कभी देखा है कि  क्या हम खुद के साथ हम न्याय करते हैं ? हमें सबसे पहले खुद का सम्मान करना सीखना होगा और  बाद में हम दूसरें लोगों से उम्मीद करेंगे। 

बहुत से  ऐसे लोग हैं, जो दूसरों की गलत बातों को जानते हुए भी सहन करते जाते हैं। उनका विरोध नहीं करते।   खुद की गलती न होने पर भी खुद को कुसूरवार समझने लगते हैं। और बस मन में सोचते रहते हैं कि कोई क्यों मेरा सम्मान नहीं करता ? मैं कहती हूँ कि जब तक उस व्यक्ति को अहसास नहीं  दिलायेंगे  तो वो अपनी गलतियों का अहसास कैसे कर पायेगा ? कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो सम्मान पाने योग्य कार्य कभी नहीं करते मगर सम्मान पाने के इक्षुक होते हैं।  ऐसे लोगो से  मैं कहना चाहती हूँ कि उन दुर्व्यवहारों और दुष्विचारों  को खुद से दूर रखिये, जो हमारे सुन्दर व्यक्तित्व को दूषित करते हैं।

बुधवार, 9 मार्च 2016

बस बहुत हुआ !

 हमारी माँ ,वो प्यारी माँ, जिसे अपने बच्चे में सारी दुनिया दिखाई देती है और हर बच्चे के दिल में अपने माँ के लिए भी बहुत आदर -सम्मान होता है। वो अपनी माँ को कभी दुखी नहीं देख सकता है ,न ही उसके आँखों में आँसू देख पाता  है। अगर जाने -अनजाने हमारी माँ को कोई कष्ट पहुँचाता है, तो हमारा खून खौलने लगता है। हम उस व्यक्ति से लड़ने -झगड़ने को पहुंच जाते है। वह व्यक्ति हमें दुनियां का सबसे बुरा व्यक्ति लगने  लगता है। 

आज मैं एक ऐसी ही माँ के बारे में आप सभी से कुछ कहना चाहती हूँ। जिनके हम सभी बच्चे हैं। आज हमारी माँ रो रही  है ,उनकी आखों में आसूँ है।  वो चीख -चीख कर के जेऐनयू  के छात्रों से  कह रही है ,"मेरे लाल ! मैंने तुझ पर अपना जीवन न्योछावर कर दिया। पर तुमने मुझे क्या दिया ? मैंने तुझे अपना दूध पिलाया था। पर  मेरे लाल ! तेरे रगों में मेरे खिलाफ जहर कैसे  भर गया ?" ये बातें कहने वाली  माँ और कोई नहीं, हमारी भारत माँ हैं। जिनकी आँचल की छाँव में हम सभी चैन की साँस लेते हैं। कुछ चंद लोग हम सभी  की  भारत माँ को गालियां दे रहें हैं। मैं  पूछती हूँ उन नवजवानों  से, जो खुद को ज्यादा समझदार समझते हैं, जिनको लगता है कि वो दुनियां को बदलने का दम  रखते हैं-क्या ऐसे ही दुनियाँ को बदलेंगे ? 

रविवार, 6 मार्च 2016

नई सोच की सुबह

हेलो फ्रेंड्स ! मैं ब्लॉगअड्डा साइट पर एरियल #ShareTheLoad  कैंपेन को सपोर्ट कर  रही हूँ , जिसका उद्देश्य है -हमें उन पूर्वाग्रहों से मुक्त होना है जो की प्रायः हमारे घर में दिखते  हैं और जिन्हें हम एक जेनेरेशन से दुसरे जेनेरेशन को शिफ्ट करते हैं, जैसे कि घर के घरेलू काम-काज (I am joining the Ariel #ShareTheLoad campaign at BlogAdda and blogging about the prejudice related to household chores being passed on to the next generation.) इस सन्दर्भ में मेरे अनुभव व् विचार कुछ इस प्रकार हैं। ... 

हम सभी ने अपने माता-पिता को घर के कार्यों को पूर्ण जिम्मेदारी के साथ करते हुए देखा होगा।  हमनें अपने पिता  को अक्सर माँ से कहते हुए यह भी देखा होगा कि," तुम अपना काम ठीक से किया करो।शर्ट में दाग लगा है, जो तुमने ठीक से धोये नहीं। " और माँ से भी सुना होगा जो पिता जी को हमेशा बिज़नेस अच्छा न चलने के कारण कहती हैं,"आप घर में खर्च कम दे रहे हैं। बच्चों और परिवार की गृहस्थी का भरण-पोषण करना आपकी जिम्मेदारी है।" हम भी शादी होने के बाद उन संस्कारों को जाने-अनजाने ग्रहण कर लेते हैं और पति से बाहर  जा कर कमाने को उनका काम समझते हैं। जबकि हमारे पति घर के कार्यों का उत्तरदायित्व हमें सँभालने को कहते हैं। मगर क्या हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने बच्चों के रगो में यही संस्कार खून की तरह नहीं दौड़ा रहे हैं ?

शनिवार, 5 मार्च 2016

डायरी के पन्नों से -2



पिछला पन्ना - डायरी के पन्नों से-1 

आज  मैं आप सभी के साथ कुछ बहुत जरुरी रोजमर्रा की परेशानियों को कम समय में दूर करने की टिप्स लाई हूँ, जिनको आप सभी अपनाकर अपने समय और मेहनत की बचत कर सकते हैं। ये  बहुत ही आसान और घरेलु टिप्स हैं -

  • दही जल्दी जमाना  हो तो, जमाते समय एक साबुत लाल सूखी मिर्च डालने  से जल्दी  जमता है।                                                                                                                                                                    
  • खटाई  में कीड़े न पड़े इसके लिए  थोड़ा  नमक डालें।                                                                                
  • फ्रीजर में डिफ्रास्ट करने के बाद बर्फ निकाल कर बर्तन के भीतर ग्लिसरीन लगाएं। अगली बार डिफ्रॉस्ट करेंगी तो, जमा बर्फ आसानी से निकलेगा।                                                                                          
  • यदि बर्थडे केक पर मोमबत्ती लगाना चाहती हैं, तो मोमबत्ती के नीचे टूथपिक कोंच कर केक पर खड़ा करें। केक ख़राब नहीं होगा।                          
  • मिक्सी के ब्लेड की धार तेज करने के लिए नमक को मिक्सी में पीसेंगे।                                                                                                
  • लाइटर अगर ख़राब हो गया हो तो, उसमें सिलाई मशीन का तेल की कुछ बूँदे डाल देने से वह ठीक हो जाता है।                                                                                                                                                       

शुक्रवार, 4 मार्च 2016

प्यार का अंत

Pyar Ka Ant in Hindi

आज कल हमारे देश ने कितनी तरक्की कर ली है। आज के बच्चे चाँद को मामा नहीं बल्कि एक ग्रह मानते हैं।  विज्ञान की दुनियाँ में हमने न  जाने  कितनी ही उपलब्धियाँ हासिल कर ली हैं। फिर  भी हमारे देश में ऐसे न जाने कितने लोग देखने को मिल जायेंगे, जो अभी तक अंधविश्वास के जाल में फसें हुएं हैं। इस को मानने वाले लोगो को अन्धविश्वास ने इतना जकड़ रखा है कि वो इससे बाहर आना ही नहीं  चाहते हैं। इस अंधविश्वास की परम्परा को कायम रखने में कुछ ढोंगी लोगों का  कार्य होता है, जो इन लोगों को  ठग कर  पैसा कमाते हैं। आज मैं आप के आमने एक ऐसे ही अंधविश्वासी  परिवार की कहानी ले कर आई हूँ।

वाइट शर्ट , ब्लैक पैंट और लाल टाई पहन कर तैयार होकर जय कमरे से बाहर आया और उसने माँ -बाबूजी का आशिर्वाद  लिया। माँ ने उसे दही खिलाई और " बेसट आफ पलक "कह दिया। जय ने माँ को राईट करते हुए बोला," माँ !,"बेस्ट ऑफ लक। " "  माँ ने कहा,"हाँ !अब जा। वरना आज पहले दिन ही  देर न  हो जाए।" जय का ऑफिस में पहला दिन था। सभी से हाय हैलो हुई। फिर जय ने देखा कि सामने से सीमा आ रही है। सीमा,और कोई नहीं, जय के कॉलेज की पुरानी दोस्त थी, जिसे दिल-ही-दिल में वो चाहता था।  सीमा भी उसको देख कर बहुत खुश हुई।  दोनों के बीच बातें शुरू हो गईं।  सीमा भी जय को पसंद करने लगी थी। 

गुरुवार, 3 मार्च 2016

कर्मयोग

Karmyoga in Hindi

वह काम जो तबियत से  किया जाये  ,मन लगाकर किया जाये  और  निष्ठा के साथ किया जाये , तो वह काम कम पूजा ज्यादा बन जाता है। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। जिस कार्य के द्वारा हमारे परिवार का भरण-पोषण अच्छे से हो जाये ,वह काम किसी साधना से  कम नहीं  है। इस सन्दर्भ में मुझे एक कहानी याद आती है, जो हमें यह सिखाती हैं कि वास्तविक योग साधना क्या होती है ?

एक तपस्वी थे। जंगल में तप कर रहे थे। उनको तप  से शक्तियाँ प्राप्त हो गईं। उन्होंने जैसे ही आँख उठा कर पेड़ को देखा , पेड़ पर बैठी चिड़िया जलकर भस्म  गई। उनको अभिमान हो गया की वो बहुत  बड़े योगी हैं।  एक घर में भिक्षा मांगने गए। स्त्री अपने पति, जो बीमार था. उसको खाना खिला रही थी। स्त्री ने कहा ,"अभी ठहरिये ! मैं योगाभ्यास  कर रही हूँ। पूरा करने के बाद आपको भोजन कराऊंगी।" योगी जी ने खिड़की से आँख उठाकर देखा और बोले "तू तो कह रही है कि योग अभ्यास कर रही है, मगर तू  अपने पति को तो रोटी खिला रही थी।" स्त्री बोली,"बाबाजी चुप होकर बैठ जाइये, मैं कोई चिड़िया नहीं जो आप मुझे जला देंगे।" जब वह सेवा करके आई तो उसने बाबा जी को भिक्षा दिया। 

मंगलवार, 1 मार्च 2016

रिश्ते

Rishte in Hindi

रिश्ते की डोर बहुत नाजुक होती  है, जिसको बहुत संभाल  कर रखना चाहिए। जिस प्रकार आकाश में उड़ती पतंग की डोर को अधिक ढीला छोड़ दिया जाय, तो वो उड़ने की  बजाय जमीन पर गिरने लगेगी और जोर से खीचने पर  डोर टूट जाएगी।  उसी प्रकार रिश्तों के साथ भी जबरदस्ती की जाती है, तो उसके टूटने का डर  रहता है, और यदि उसका ध्यान ना रखा जाय  तो रिश्ते तनाव ग्रस्त होने लगतें हैं। रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण होतें हैं। यदि हमारें रिश्ते मधुर है तो हम जिंदगी का पूरा मज़ा उठा सकतें है और उनमें अगर कड़वाहट आ  जाये  तो यह हमारा जीवन जीना  मुश्किल कर देता है। 

आज कल ऑफिस और परिवार के बीच ताल मेल बैठाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है। जब हम छोटी -छोटी बातों  के लिए सही  गलत के झगड़े करते हैं, तो उन्हें सुलझाना कठिन हो जाता है। एक दूसरे के विचारों को भी ना समझ पाना रिश्तों में दूरियों की वजह बन जाता है। इस लिए यह जरुरी है कि दूसरें व्यक्तियों के विचारों को भी महत्व दिया जाय। उन्हें भी सुना व समझा जाय। इसी से  रिश्तों में बढ़ रहीं दूरियों को कम  किया जा सकता है। हमेशा हमें ये याद रखना चाहिए कि हमारे अपनों के रिश्ते अपनेपन और प्यार से संवरते हैं , न कि जबरदस्ती से। हमें रिश्तों को सँवारने के लिए सामने वाले की गलतियों को माफ़  सीखना होगा और यदि खुद से गलती हो जाती है तो माफ़ी मांगने में शर्म भी महसूस नहीं होनी चाहिये। अक्सर देखा गया है ,जो लोग शक्तिशाली होते हैं वह कम शक्ति वाले लोगों पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते रहते हैं।हमें सभी की भावनाओं को समझना चाहिए व उनकी कद्र करनी चाहिए। 

सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

वफ़ा

Wafa in Hindi

वफ़ा क्या होती है ? क्या हम इसे भली -भाँति  समझते हैं ? दूसरों का ख्याल रखना ,बात को मानना या फिर  प्रेम को जाहिर करना, क्या इसी को वफ़ा कहतें हैं ?  कुछ लोग सामने वाले की नाराजगी और  घृणा को सह कर भी अपनी वफ़ा को प्रदर्शित करते हैं। मगर मैं नहीं मानती ऐसे वफ़ा को। क्योंकि हम  इंसान हैं। हमें  हक़ है अपने बारे में सोचने का। हमारे पास ईश्वर की कृपा से मस्तिष्क रूपी यन्त्र है, जिसके द्वारा  हमें सही और गलत के फर्क का ज्ञान होता है। 

मगर वो बेजुबान, जिनको ईश्वर ने जुबान भी नहीं दिया और जो अपनी भावनाओं को कह कर व्यक्त भी नहीं कर सकतें  हैं , उनके बारे में हमनें क्या कभी सोचा है ? हमने अक़्सर फल मंडी,सब्जी मंडी,  बाजारों में जानवरों को फलों -सब्जियों में मुँह लगाने  पर मार खाते देखा होगा। दुकानदारों के हाथों में जो कुछ भी आता है, वो उसी से मारने  लगतें हैं - कभी -कभी जानवरों के  पैर टूट जातें हैं ,और चोट खाने से उनकी त्वचा तक फट जाया करती है। वो  कुछ कर नहीं पाते। 

रविवार, 28 फ़रवरी 2016

खरा सोना

Khara Sona in Hindi

आज कल  एकल परिवार की ही प्रथा हर कही देखनें को मिल रही  है। कोई भी संयुक्त परिवार में  रहना नहीं चाहता। जब हम कभी  परेशानियों में होते है और हमें किसी की राय की जरूरत  महसूस होती  है तो हमें लगता है कि हमारे सिर पर बड़े बुजुर्गों का हाथ नहीं है। उनके जीवन के अनुभवों से हमारी जिंदगी कितनी आसान हो जाया  करती थी । एकल  परिवार के बच्चों में वो संस्कार ,सदस्यों से भावात्मक जुड़ाव कहाँ  देखने को मिलते है ? वो कहानियां, जो बच्चों के बौद्धिक विकास में सहायक होती थी, जिनके द्वारा वो ना जाने कितने ज्ञान बिना किताबों के हासिल  लेते थे, आज गायब सी हो गयी हैं ।  बच्चों के हाथ में आज केवल टी.वी का रिमोट होता है, जिससे  वो सिर्फ कार्टून देखते हैं या वीडियो गेम्स खेलते हैं। आइये, आज शहर में रहने वाले एकल परिवार की जिंदगी के बारे में जानते हैं। 

अलार्म की आवाज से सुधा की नींद टूटी उसने देखा सुबह के 8 :00 बज गएँ हैं, वह  घबरा कर कमरे से बाथरूम की तरफ भागी फिर उसने बच्चों को जगा कर तैयार किया।  सुधा ने अपने पति रवि को भी जगाया। तब तक काफी समय हो गया था। सुधा ने रवि से कहा ,"बच्चों को   रास्ते में कुछ खिला देना और तुम भी कुछ खा लेना। मैं कुछ बना नहीं सकी। मैं ऑफिस जा  रही हूँ। " फिर सभी अपनी-अपनी मंजिल पर निकल गए। 

शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

सच्ची खुशी

Sachchi Khushi in Hindi

कल से  मेरा मन बहुत उदास था। वजह  तो नहीं जानती, मगर कुछ करने का मन नहीं कर रहा था। बस मन में यही बात थी कि  कोई मुझसे बात न करे और  मैं चुप-चाप बस सोचती ही रहूँ।  परेशानी सिर्फ मुझे ही नहीं, मेरे जैसे ना जाने कितने लोगों को  है।  छोटी -छोटी बातों   को दिल पर  ले कर न जाने कितने समय तक हम सभी  परेशान रहतें हैं ,उससे बाहर ही नहीं आ पाते। आखिर  हमारे इन दुखों की वजह क्या है  ? मैं मानती हूँ कि कुछ बातें ऐसी होती है, जो हमारे मन में घर कर जाती है, जिनको भूलना आसान नहीं होता।  मगर क्या हमनें कभी  सोचा है कि उन मुश्किलों का हम खुद ही ऐसा जाल बुन लेते हैं कि जिससे बाहर नहीं निकल पाते। आखिर हम खुश क्यों नहीं हैं ? हमारे दुख की वजह क्या है ?

धीरज नाम का युवक एक ऐसी ही परेशानी का हल ढूढ़ने एक बाबाजी के पास गया। बाबा जी सभी तरह की परेशानियों का समाधान करते थे। धीरज  ने भी दुखों की लम्बी -चौड़ी  लिस्ट  बाबा जी  के सामने रख दी, जिसका वो समाधान चाहता था। बाबाजी ने धीरज  कहा," बेटा ! अभी घर जाओ कल आना और अपने साथ एक बड़ा पत्थर  ले आना।" अगले दिन धीरज घर से एक बड़ा पत्थर  ले आया और उसने उसे बाबा जी के सामने  रख दिया। फिर बाबाजी ने  धीरज को उस पत्थर को हाथ में उठाने के लिए कहा। फिर बोले नीचे रख दो। एक बार फिर सिर  पर रखने को बोले । फिर वापस नीचे रखवा दिया। थोड़ी देर बाद जाने लगे और धीरज से पत्थर को सिर  पर रख कर अपने पीछे आने को कहा।धीरज ने वैसा ही किया।