मंगलवार, 22 मार्च 2016

आकर्षण

Aakarshan in Hindi

हर व्यक्ति जीवन में उम्र के कितने ही दौर से गुजरता है। उसकी विचारधारा में परिवर्तन आता रहता है ,और उसकी मनःस्थिति  हमेशा बदलती रहती है। बचपन, सभी चिंताओं से मुक्त, जवानी, मस्ती भरा जीवन व वृद्धावस्था में, हमारे विचार व व्यवहार में स्वतः ही गंभीरता व शालीनता आ जाती है। आज मैं उम्र की उस पड़ाव के बारे में बात करना चाहती हूँ , जो बचपन और जवानी की  उम्र के बीच आता है।  उस समय हमें अच्छे मार्ग-दर्शन की आवश्यकता होती है , क्योंकि  व्यक्ति उम्र के उस दहलीज़ पर खड़ा रहता है ,जहाँ पर उसे किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं भाती । वह अपनी मर्जी के अनुसार जीवन जीना चाहता है और इस उम्र में माता-पिता के मित्रवत सम्बन्ध की सबसे ज्यादे आवश्यक्ता पड़ती है।

इस उम्र के दौरान ,बच्चों में अक्सर किसी व्यक्ति को लेकर आकर्षण उत्पन्न होना वाजिब है।  ऐसा शारीरिक रूप से परिवर्तन की वजह से होता है। उस समय हमें जरूरत है ,अपने बच्चों को समझने की , न कि अपनी बातों को उन पर जोर-जबरदस्ती  से थोपने की। ऐसा करने से वो आक्रामक हो सकते हैं और ऐसा व्यक्तित्व अपना सकते हैं, जो उनके भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उस समय एक माँ का उत्तरदायित्व सबसे ज्यादा हो जाता है कि वो अपने बच्चे के साथ मित्रवत सम्बन्ध बनाये रखे ताकि बच्चा अपने दिल की हर छोटी -बड़ी बात अपनी माँ से शेयर करे।

 मैं इस उम्र के आकर्षण से सम्बंधित एक ऐसी बच्ची की कहानी ले कर आई हूँ, जो आप को पसंद आएगी। दिल्ली शहर में एक फैमिली रहती थी। परिवार में पति -पत्नी और उनकी बेटी अनु थी। मकान बड़ा होने की वजह से वो एक किरायेदार की तलाश में थे। फिर एक शर्मा फैमिली उनके घर में किराये पर रहने आई। शर्मा जी की फैमिली में सिर्फ उनकी पत्नी और शर्मा जी थे। उनकी शादी को 6 महीने ही हुए थे। एक दिन अनु की माँ ने अनु से कहा,"शर्मा अंकल के रूम में जाकर पूछ लेना कि उनको किसी चीज की जरुरत तो नहीं है। " अनु ने माँ से कहा,"माँ ! वो मेरे अंकल नहीं हैं, वो सुधीर सर हैं।"अनु की माँ ने अनु की बातों को अनदेखा कर दिया।

 फिर  करवा चौथ का दिन आया । अनु की माँ तैयारियों में लगी थी।  तभी अनु ने भी माँ से चूड़ियाँ लेने की जिद करने लगी। शाम को पूजा में सभी छत पर आये। सुधीर और उनकी पत्नी भी आये। सुधीर को देखते ही अनु शरमा  गई और उसने अपनी माँ से कहा," माँ ! मैं भी आगे साल व्रत रखूगीं। चूड़ियाँ पहन कर पूजा में बैठूंगी। " सभी ने बच्ची की बातों को  सुनकर  मुस्कुरा दिया। अगले दिन, जब सुधीर बाजार जा रहे थे तो अनु ने उनको रास्ते में देख कर बुलाया,"सुधीर सर !" सुधीर ने पलट कर पीछे देखा तो रेड रंग के ड्रेस पहन कर अनु खड़ी थी।  हाथों में उसने लाल रंग की चूड़ियाँ पहन रखी थी। अनु ने कहा "मैं कैसी लग रहीं हूँ ? सुधीर सर ! "सुधीर ने कहा,"बिलकुल नन्ही शहज़ादी !"अनु ने कहा ,"तो शाम को फिल्म देखनें चलेंगे आप ? पैसे की चिंता मत करिये, मेरे पॉकेट मनी में बहुत पैसा है और मैं यही चूड़ियाँ पहन कर चलूंगी। आपको लाल रंग की चूड़ियाँ पसंद है ना !"

सुधीर को अब अनु की बातें बचकानी नहीं लग रही थी .सुधीर ने कहा,"मैंने तुमसे कब कहा ?"अनु ने कहा,"आप जब अपनी पत्नी  से कह रहे थे, तो सुन लिया था।" सुधीर ने मन में सोचा कि बच्ची है समझ जाएगी। मगर एक दिन सुधीर से अनु ने शादी करने की बात कह दी। उसने कहा कि अब वह रोटियाँ बना लेती है। सुधीर ने अब अनु के माता -पिता से बात करना जरुरी समझा। सुधीर अनु के घर अपनी पत्नी के साथ गया। अनु के माता -पिता ने उन लोगों  से माफ़ी मांगी और कहा,"आपके अच्छे संबंधों को देख कर मेरी बेटी आपके प्रति आकर्षित हो गयी है, मुझसे उसने ना जाने कितनी बार कहा था कि वो आपको पसंद करती है। मैंने उसकी बातों को सुनकर बच्ची का आपके प्रति प्रेम समझकर अनदेखा कर दिया।  मैंने कभी ये नहीं सोचा था कि  अनु आपके बारे में ये सब सोचती है।  कृपा कर के मेरे बेटी को माफ़ करियेगा।" सुधीर की पत्नी ने कहा ,"अब तो प्रश्न है कि उस बच्ची को कैसे समझाया जाये कि जो वो सोच रही है, उसके लिए न उसकी सही उम्र है न ही वह सही व्यक्ति।" सभी ने एक निर्णय लिया।

 अगली सुबह अनु जब सुधीर के दरवाजे पर पहुँची, तभी सुधीर की पत्नी के रोने की आवाज आई। वह चीख-चीख कर कह रही थी कि सब के सामने अच्छा बनने का ढोंग रचते हो ? घर में बीवी को मारते हो ? शराब पी कर आते हो ?  मैं भी इंसान हूँ। मेरे ऊपर खाने की थाली मत फेंको। मुझे अब समझ में आ गया है कि तुम्हारी पहली शादी से तुम्हारा तलाक़ क्यों हो गया था ?  तभी बर्तन गिरने की आवाज आई। सुधीर भी  तेज आवाज में बोलने लगा ," चुप हो जा ,वरना मेरा हाथ उठ जायेगा। मैं तंग आ गया हूँ। तुमसे तलाक़ लेकर अनु से शादी कर लूँगा।" सुधीर की पत्नी ने कहा,"कर लो , फिर उसे भी मेरी तरह जूती की नोंक पर रखना।" 

अनु दरवाजे पर खड़ी सब बातें सुन रही थी , फिर उलटे पाँव तेजी से अपने कमरे की तरफ भागी और थोड़ी देर बाद सुधीर अपनी पत्नी के साथ अनु के घर पहुँचा। अनु ने दरवाजा खोला।  उसकी आँखें लाल थीं। वह बोली," माँ ! सुधीर अंकल और आंटी आयें हैं।"  सुधीर और अनु के माता-पिता सभी ने एक दुसरे के चेहरे को देखकर संतोष भरी मुस्कान ली।

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