शुक्रवार, 4 मार्च 2016

प्यार का अंत

Pyar Ka Ant in Hindi

आज कल हमारे देश ने कितनी तरक्की कर ली है। आज के बच्चे चाँद को मामा नहीं बल्कि एक ग्रह मानते हैं।  विज्ञान की दुनियाँ में हमने न  जाने  कितनी ही उपलब्धियाँ हासिल कर ली हैं। फिर  भी हमारे देश में ऐसे न जाने कितने लोग देखने को मिल जायेंगे, जो अभी तक अंधविश्वास के जाल में फसें हुएं हैं। इस को मानने वाले लोगो को अन्धविश्वास ने इतना जकड़ रखा है कि वो इससे बाहर आना ही नहीं  चाहते हैं। इस अंधविश्वास की परम्परा को कायम रखने में कुछ ढोंगी लोगों का  कार्य होता है, जो इन लोगों को  ठग कर  पैसा कमाते हैं। आज मैं आप के आमने एक ऐसे ही अंधविश्वासी  परिवार की कहानी ले कर आई हूँ।

वाइट शर्ट , ब्लैक पैंट और लाल टाई पहन कर तैयार होकर जय कमरे से बाहर आया और उसने माँ -बाबूजी का आशिर्वाद  लिया। माँ ने उसे दही खिलाई और " बेसट आफ पलक "कह दिया। जय ने माँ को राईट करते हुए बोला," माँ !,"बेस्ट ऑफ लक। " "  माँ ने कहा,"हाँ !अब जा। वरना आज पहले दिन ही  देर न  हो जाए।" जय का ऑफिस में पहला दिन था। सभी से हाय हैलो हुई। फिर जय ने देखा कि सामने से सीमा आ रही है। सीमा,और कोई नहीं, जय के कॉलेज की पुरानी दोस्त थी, जिसे दिल-ही-दिल में वो चाहता था।  सीमा भी उसको देख कर बहुत खुश हुई।  दोनों के बीच बातें शुरू हो गईं।  सीमा भी जय को पसंद करने लगी थी। 

एक दिन सीमा ने  प्यार का इजहार कर  दिया तो जैसे जय  की  अधूरी तमन्ना  पूरी हो  गई हो। जय बहुत खुश था। वह सीमा को लेकर अपने माता -पिता से मिलवाने घर ले गया. सीमा को जय के माता -पिता ने बहुत पसंद किया और सीमा को अपने माता -पिता को लाकर मिलाने  को कहा। सीमा  बहुत अमीर घराने की लड़की थी और जय सामान्य परिवार का था। मगर सीमा की जिद के आगे उसके माता -पिता ने 'हाँ'  कर दिया। फिर जय की माँ ने  सीमा की कुण्डली का मिलान करवाया। ज्योतिषी ने बताया की जय के लिए सीमा अशुभकारी है।  उसके विवाह के बाद जय का जीवन दुखों और परेशानियों से भर जायेगा। 

अब सीमा के  माता-पिता, जो पहले से ही इस शादी के खिलाफ थे, वह भी इसका विरोध करने लगे। दोनों के माता-पिता को बहुत समझाने के बावजूद भी, वो अपने माता -पिता के विचारों को बदल न  सके। एक दिन दोनों  ने  अपने मित्रों की मदद से कोर्ट-मैरेज  कर लिया और आशीर्वाद लेने अपने  घर गए। दोनों के माता-पिता ने  उनको नहीं अपनाया और फिर अपनी शक्ल न दिखाने को कह दिया। जय और सीमा ने अपने मित्रों की  मदद से  एक किराये का कमरा ले कर अपना दाम्पत्य जीवन शुरू किया। 

एक दिन  सीमा  की अचानक तबियत ख़राब हो जाने के कारण जय घर जल्दी आ गया और डॉक्टर ने उसे बताया कि वह पिता बनने वाला है। सीमा को अब आराम और केयर की जरूरत थी। जय ने अब ज्यादा काम करना शुरू कर दिया था ताकि वह सीमा और अपने होने वाले बच्चे को वो सारी सुख-सुविधाएँ दे सके , जो उनका हक़ है। इन दिनों सीमा को अपनी माँ की बहुत याद आती थी। मगर सीमा जय से यह सोचकर माँ से मिलाने को नहीं कहती थी, क्योंकि उसकी माँ ने कभी मुँह न दिखाने की बात कही थी। अब 9 महीने हो गए  थे। 

सीमा की रात में तबियत बहुत ख़राब हो गयी। जय ने उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टर ने बताया ,"20 -25 हजार रुपये का इन्तेजाम कर लीजिये , ऑपरेशन करना पड़ेगा। " जय ने अपने मित्रों और मकान-मालिक की मदद से रुपये का इन्तेजाम किया। फिर सीमा को बेटा हो गया।  जय ने सभी का मुँह मीठा कराया। तभी एक मित्र ने जय से बिना पूछे दोनों के माता-पिता को बच्चे के जन्म की खबर दे दी। सुनकर दोनों के माता-पिता रह न सके, और हॉस्पिटल आ गए। 

जय ने अपने बच्चे को उनके गोद में देने से इंकार कर दिया और कहा ,"माँ -बाबूजी ! आप ने तो हमारे प्यार का अंत करना चाहा था। फिर हमारे प्यार के फूल को कैसे अपनायेंगे ? " सीमा की माँ ने कहा ,"बेटा ! अब हम तुम दोनों को घर वापस ले जाना चाहते हैं और वहाँ तुम दोनों के लिए पूजा रखवायी गई है, जिससे तुम्हारे जीवन में कोई परेशानी न आये।" जय ने कहा,"क्या आपको  अभी भी उस कुण्डली और पंडित की बातों पर भरोसा है ? सीमा मेरे लिए तब भी लकी थी और आज भी है। हमारे जीवन में दुखों की वज़ह हमारे अपनों का हमसे मुँह मोड़ लेना है। जब लड़का-लड़की दांपत्य जीवन की शुरुवात करते हैं, तो उनके परिवार के लोग उनकी गृहस्थी को शुरू करने में मदद करते हैं ,मगर आपने हमसे रिश्ते-नाते तोड़ लिए थे।" यह कहते हुए जय की आँखों में आँसू आ गए। यह सुनकर  जय के पिता ने जय को अपने सीने से लगा लिया और सीमा को भी उसकी सासू-माँ ने  दुलारा। तभी बच्चे की रोने की आवाज़ आई और सभी के होठों पर मुस्कान आ गई। यही था प्यार का सुखद अंत !

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