शनिवार, 20 मार्च 2021

तपिश की ठंडक

 

TAPISH KI THANDAK IN HINDI


मैं इस पोस्ट के द्वारा आप सभी के समक्ष एक बहुत महत्वपूर्ण टाॅपिक पर अपनी बात रखना चाहती हूँ , जिस पर हम सभी कभी ध्यान नहीं देते हैं या इस पर किसी के द्वारा कही गई बात अथवा सलाह शायद हमें अच्छी नहीं लगती है। हम सभी ने अपने बचपन में अपने माता-पिता को हमारी बहुत सारी महत्वपूर्ण माँगों के लिए अवश्य ही उन्हें न कहते पाया होगा, कभी दोस्तों की अच्छी चीजों को अपने पास भी होने की चाह में पिता के द्वारा मना कर देने से उन पर कभी हम क्रोधित भी हुए होंगे तो कभी दुखी। 


कभी उनकी  बिना वजह की रोक-टोक, तो कभी नाहक नाराजगी भी अपने ऊपर देखी होगी, जो हमें कभी पसन्द नहीं आई। माँ की डाँट में ‘फिक्र‘ और पिता के डाँट में ‘हमारे जीवन को सुन्दर और बेहतर बनाने की सीख‘ को हम हमेशा नजरअंदाज कर देते थे, पर उन बातों में हमारे लिए पूरे जीवन को मुश्किलों से लड़ने की जो सीख होती है, ये हम नहीं समझते हैं।


मैं अपने जीवन के तजुरबे से कह सकती हूँ कि हम सभी के माता-पिता ने हमारे लिए जो कुछ किया, हमें उसके लिए उन्हें दिल से धन्यवाद कहना चाहिए, ना कि उन्हें दोषी ठहराना चाहिए। 


आज मैं भी माँ हूँ , इस कारण मैं ये बात आप सभी से करना चाहती हूँ कि बच्चे की हर माँग को खुशी-खुशी मान लेना और उनकी हर मुमकिन एवं नामुमकिन ख्वाहिशों को पूरा करना हमारे बच्चे के जीवन को और भी मुश्किल बनाता है। हमें अपने बच्चों को जीवन में बेहतर बनाने में हर कदम संभाल कर रखना चाहिए। माता-पिता हमेशा बच्चे की खुशी देखते हैं, पर उनके भविष्य को देखते हुए उन्हें मजबूत बनाने के लिए हमें ‘ना‘ कहने की आदत भी डालनी चाहिए। 




जिस प्रकार बच्चा जब पहली बार हमारी अँगुली पकड़ कर चलना सीखता है, तो हम कभी-कभी अपनी अपनी अँगुली के बिना भी उसे चलने का मौका देते हैं और गिरते-पड़ते वह चलना सीख ही जाता है और धीरे-धीरे चलना सीखकर दौड़ना भी सीख जाता है। वहीं अगर हम बच्चे की अँगुली और हाथ छोडे़ ही ना तो क्या वो कभी ईश्वर का दिया हुआ पैर रुपी अनमोल रतन का इस्तेमाल कर पायेंगे ? कभी नहीं। यदि हम बच्चे को दुनिया अपने कन्धे पर बिठा कर दिखायेंगे तो वो दुनिया के खट्टे और मीठे अनुभवों से अनजान होकर सपनों की दुनिया में जीता रहेगा। वही बच्चा जब बड़ा होगा तो जीवन के हर मोड़ पर उसे छोटी-छोटी परेशानियाँ भी बहुत ज्यादा परेशान कर जायेंगी, जिनसे वो कभी भी उबर नहीं पायेगा।


तो मैं आप सभी नये माता-पिता से कहना चाहती हूँ कि अपने बच्चों का प्यार करिये पर उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए, उनको जीवन के धूप की गर्मी भी सहने दीजिये। चलने दीजिये उन्हें नंगे पाँव धूप में और धूप की गर्मी को महसूस करने दीजिये, तभी तो वो धूप की गर्मी और छाँव की शीतलता को महसूस कर सकेंगे और बनेंगे- मजबूत और दृढ़। 


आज बस इतना ही।


Image:Google

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