☀ तथ्य ☀ :: 28 नवंबर ♥ 1. आज के दिन कैप्टन इन्द्राणी सिंह 1996 में एयरबस ए-300 विमान को कमांड करने वाली पहली महिला बनीं। 2. आज ही के दिन फर्डिनान्द मैगलन ने 1520 में प्रशांत महासागर को पार करने की शुरुआत की। 3.आज ही के दिन लंदन में द रॉयल सोसायटी का 1660 में गठन हुआ। 4.द टाइम्स ऑफ लंदन को 1814 में पहली बार स्वचालित प्रिंट मशीन से छापा गया। 5.भारत के महान् विचारक, समाज सेवी तथा क्रान्तिकारी ज्योतिबा फुले का निधन 1890 में हुआ। ♥

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

छोटी आशाएँ

Chhoti Aashayen in Hindi


सुख और दुःख जीवन के महत्वपूर्ण पहलू है। जब बच्चा  जन्म लेता  है , तो  माँ  को न जाने कितने कष्टों का सामना करना पड़ता है और उसके आँख खोलते ही सारे दुःख ख़ुशी में परिवर्तित हो जाते है। संसार में  जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति इस सुख -दुःख के चक्कर से बच नहीं सका है। जब कभी हम दुखी होते हैं , तो हम बहुत अधिक निराश हो जातें हैं। हमें लगता है कि ये समय कब बीतेगा ,कैसे बीतेगा। 

और जब हम खुशियों के दिनों को एन्जॉय करते है तो हम अपने उन दिनों का स्मरण भी नहीं करना चाहते है। मगर ये सुख -दुःख हमारे जीवन की परछाईयाँ है, जिनसे हम कभी भाग नहीं सकते और जब हम जीवन में आये मुश्किलो से घिर जाते है तो तभी हमें अपने और परायों की परख होती है। क्योकि जो लोग हमारे अच्छे दिनों के  साथी होते है उनमें से  ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैं , जो परेशानियों में  हमसे  सारे रिश्ते-नाते तोड़ लेते हैं। 

सभी को जीवन में आने वाली परेशानियों के लिए हमेंशा  तैयार रहना चाहिए। क्योंकि  परेशानी कभी भी दरवाजे पर दस्तक दे कर नहीं  आती। वो  जब भी आती है, हमें सँभलने का अवसर भी नहीं देती। हम आने वाली परेशानियों को  रोक तो नहीं  सकते, मगर उससे उबरने के लिए तैयारी जरूर कर सकते हैं।  हमें  रोजमर्रा के खर्चों में से थोड़ा इन्वेस्मेंट जरूर करना चाहिए। बैंक में अपना खाता जरूर खुलवाना चाहिए।  घर  पर भी हमें बचत की आदत डालनी चाहिए। गुल्लक में अपने सामर्थ्य के अनुसार रोजाना रूपये डालने चाहिए। हम वो सिक्के, जिनकी हमें जरुरत नहीं होती उन्हें भी उसमें डाल सकते हैं। 

 आपको यकींन नहीं होगा कि इन छोटी-छोटी अच्छी आदतों से न जाने कितने पैसों की बचत हो जाएगी। यही छोटी सी बचत हमारे लिए बहुत उपयोगी बन सकती है। मैंने अपनी आदतों में इसे शामिल किया है, उसी बचत के द्वारा न जाने कितनी बेहद जरुरी सामानों  की खरीदारी की है, जिससे मेरे घर का बजट भी प्रभावित नहीं हुआ । 

बच्चों  को भी प्रारम्भ से ही बचत करना सिखाना चाहिये। ताकि वे जीवन की जटिल परिस्थितियों का  सामना  सकें। मैंने एक ऐसे ही बचत के तरीके को अपने मित्र के घर देखा था।  जिसके परिवार के प्रत्येक सदस्यों की यह  आदत थी कि जब वो पूजाघर में प्रभु को सुबह प्रणाम करते थे, तो वहां रखे गुल्लक में सिक्के या  रूपये डालते थे। उसके घर के सभी बड़ों एवं बच्चो की आदतों में ये शामिल था। मेरी मित्र ने  बताया की इस गुल्लक  के बचत के पैसो के द्वारा उसके यहाँ तीज -त्योहारों में खरीदारी होती है और घर का बजट भी नहीं बिगड़ता। मैंने  इसको फॉलो किया है।  आप सभी इसे जरूर करके देखें। हमारी एक-एक रूपये की बचत हमारे खुशियों को पंख लगा देगी । आज के लिए इतना ही ! धन्यवाद  

Image-Google 

4 टिप्‍पणियां:

  1. Sahi salah di hai aapne..chote chote kharchon ko agar ham save kare to ek achi bachat ho sakti hai.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेरे विचारों को समझने के लिए धन्यवाद, मुझे बहुत खुशी होती है जब आप लोगों का कॉमेंट आता है.

      हटाएं