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मंगलवार, 2 अगस्त 2016

पत्थर दिल

Pathar Dil in Hindi

हम सभी ने ये बात सुनी होगी कि एक पुरुष की कामयाबी के पीछे एक महिला का हाथ होता है। वो महिला उसकी माँ ,बहन ,पत्नी ,दोस्त या फिर टीचर हो सकती है। पर क्या आपने कभी ये कभी सुना है कि किसी महिला की कामयाबी के पीछे किसी पुरुष का हाथ है ? नहीं ना ! मैंने भी नहीं सुना है। यहाँ तक कि  ये बात किसी मैग्जीन या न्यूजपेपर में भी नहीं पढ़ी। जब एक महिला  सफल होती  है तो उसका पूरा श्रेय हम उसी महिला की मेहनत ,लगन व प्रतिभा को  देते हैं। उसकी सफलता के पीछे किसी पुरुष का हाथ हो सकता है, ऐसी बात हमारे दिलों -दिमाग में कोने - कोने तक कही आती ही नहीं है। ना ही हम सभी ये जानना चाहते हैं।

जबकि बचपन से एक शक्ति हम सभी महिलाओं का साथ निभाते चली आई है। उसके  भी कई रूप है- पिता ,भाई ,दोस्त या फिर पति। ये शक्तियाँ निरन्तर सुरक्षा की दीवार बनकर सदा हमारा साथ निभाती आई हैं। हर पल हमारा ख्याल रखती हैं, चाहे कैसी भी मुश्किल क्यों ना हो ? पहले उसे इस मजबूत दीवार से टकराना होता है, उसके बाद ही वह हमारे तक आ सकती हैं। 

हम सभी अपनी माँ से बेहद प्रेम करते हैं और हमारी माँ भी हम पर अपनी ममता दिन रात लुटाती रहती है। हमने कभी भी अपनी माँ को खुद के लिए कड़क लहजे में पेश आते नहीं देखा ,कभी माँ से डांट नहीं खाई। कितनी अच्छी और लविंग होती है ये माँ। माँ के व्यवहार को हम ममता का नाम देते हैं। पर जब पिता की बात होती है तो सभी यही कहते है कि पिता हमें प्यार नहीं करते, हमेशा डांटते रहते है। हमारे हर काम में पुलिस की तरह पूछ -ताछ करते हैं। पर एक पिता की कीमत वही शख्स समझ सकता है , जो इस अमूल्य दौलत से महरूम है। 

पिता की डांट में, गलत -सही चुनने की सलाह व रोक -टोक़ में, अपना कार्य कदम -कदम पर सतर्क हो कर करने की सलाह होती है। हम सभी ने अपनी माँ के तकलीफ में होने पर, उनकी आँखों में छलके आँसू देखे होंगे ,  पर एक पिता को अपने आँसू भी दिखाने का अधिकार नहीं होता। चाहे स्थिति जो भी  क्यों ना हो। 

बहन भाई को राखी एक दिन बांधती है, पर बहन की रक्षा का उत्तरदायित्व वो आखिरी साँस तक  निभाते हैं। और जब एक लड़की शादी हो जाने के बाद अपने ससुराल जाती है, तो एक और शक्ति कदम-कदम पर उसके साथ रहती है ,जो उसका पल-पल ख्याल रखती है। उसे हमेशा यह  अहसास कराते रहती है कि   मेरे जीते जी तुम्हारा कोई अहित नहीं कर सकता है। ये खूबी सभी के पति में होती है, जो अपनी  जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते है और अपनी मेहनत का एक-एक रुपया अपने परिवार की जिम्मेदारियों पर हँसते-हँसते खर्च करते हैं। मैं सोचती हूँ कि वो ऐसा कैसे कर पाते है ? शायद उनके प्रेम करने का यही तरीका होता है, जो ये बताता है कि उनका हमसे कितना जुड़ाव है। 

अगर एक पल भी सुकून व ख़ुशी से हम जीते हैं , तो वो उन्ही शक्तियों की वजह से होता है। इन रिश्तों को अपना स्नेह जताने का तरीका नहीं आता है। ये हमसे कभी भी नहीं कहते कि इन्हें हमारी फ़िक्र है। हमसे स्नेह करते हैं ,पर प्रति पल अपने व्यवहारों से जताते रहते हैं कि हम उनके जीवन में कितने महत्वपूर्ण हैं। हमें उनके स्नेह   ,केयर और उनके समर्पण को समझना चाहिए  । 

हमें उन रिश्तों का सम्मान करना चाहिए, जो सिर्फ हमारे जीवन को सुरक्षित व खुशहाल बनाने के लिए दिन-रात अपना एक-एक लम्हा हम पर न्यौछावर कर देते हैं।  
क्या हमारा उत्तरदायित्व नहीं बनता कि हम भी उनकी भावनाओं को समझे और उनके जीवन को खुशियों के पल से भरें। 

सोचिये ! अब बारी हमारी है। 

Image-Google

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खूब रश्मिजी पत्थर जैसे बनाना पड़ता है कभी कभी मोम से प्यारे रिश्तों को सँभालने के लिए ।
    अनकहा सच्चा प्रेम जैसे माता, पिता ,भाई के कठोर व्यवहार के पीछे छिपा प्रेम बहुत ही सुंदर ढंग से व्यक्त किया है ।

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    1. रीतू जी,आपका विचार जानकर बहुत अच्छा लगा आपने कमेंट किया इसके लिए आपका आभार ...

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  2. बहुत आभार पढ़वाने के लिए, एक नयी दिशा ही है जो आपने पिता भाई और दोस्त के प्रति लिखा है।

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    1. प्रभात जी , आपको मेरी रचना पसंद आई, पढ़ने के लिए धन्यवाद !

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  3. बहुत आभार पढ़वाने के लिए, एक नयी दिशा ही है जो आपने पिता भाई और दोस्त के प्रति लिखा है।

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  4. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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    1. मेरी पोस्ट पर कॉमेंट के लिए, आशुतोष जी, आपका धन्यवाद

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  5. कभी-कभी पिता, भाई या पति का कठोर व्यवहार हमारी ही अच्छाई के लिए होता है, जिसे हम समझ नही पाते हैं..इसका मतलब ये नही है की वो हमारी केयर नहीं करते हैं..सुंदर आलेख !

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    1. ये पोस्ट उन रिश्तों के लिए समर्पित है, जिन्होंने सभी के दिलों में अनकही जगह बनाई है..कॉमेंट के लिए, दीपा जी, आपका आभार

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  6. मेरा मानना है किसी की भी कामयाबी के पीछे सभी चाहने वालों और हिम्मत देने वालों का हाथ होता है ... जो टच में आता है कुछ सार्थक दे के जाता है ...

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    1. आपके विचार का एक नई दिशा पर सदा स्वागत है ,आपका धन्यवाद ...

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  7. aapki post shandar hai, aap aise hi apni soch ko logo tak pahuchati rahiye.

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    1. आपके अगले विचार का इंतजार रहेगा ,आपका धन्यवाद ...

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  8. शुरू में पढ़ते हुए लगा कि आप माँ, बहन और बेटी की महत्ता को बताते हुए लेख लिख रही हैं। आपके शब्दों में बंधते हुए ज्यों-ज्यों मैं आगे पढता गया, समझ आया कि आप उसकी महानता के बारे में कह रही हैं जिसके बारे में यदा-कदा ही कहा या सुना जाता है। कभी-कभी लिखा भी जाता है। सदैव ही सोशल मीडिया में कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी तो ज्यादातर माँ के बारे में, उनके त्याग, ममता और बलिदान के बारे में पढता रहा हूँ। लेकिन कभी पिता, भाई या पति के बारे में पढ़ने का मौका नहीं मिला, शायद किसी ने लिखा हो लेकिन मेरी नजर चूक गयी हो। कभी-कभी पुरुष वर्ग इसको लेकर थोड़ा चिंतित भी रहता होगा, कुछ शिकायत भी रहती होगी। लेकिन आज आपके लेख ने इस अनछुए पहलु को भी छुआ है। अच्छा लगा पढ़कर। टिप्पणी थोड़ी लंबी हो गयी है, मुआफ़ कीजियेगा।

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    1. किशोर जी ,आपका कमेंट ही मेरे कोशिश को सार्थक बनाता है ,ये बात सच है कि कुछ रिश्ते अपने ज़िम्मेदारियों को बखूबी सार्थक रूप निभाते आए हैं,जिनकी तरफ़ अभी ज़्यादा किसी की नज़र नही गई ,वो हमसे अपनेपन और स्नेह के उपहार की उम्मीद लिए अपना जीवन जीते है,आपने अपना बहुमूल्य सविस्तार विचार प्रकट किया, आपका आभार .....

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    2. आपके शब्दों एवं लेखन कला ही नहीं बल्कि विचारों से भी प्रभावित हुआ जा रहा हूँ मैं। अगर आपका कोई फेसबुक एकाउंट हो तो कृपा करके मुझे भेजिए मैं आपको अपनी मित्रता सूची में शामिल कर धन्य होना चाहता हूँ। मैंने अभी-अभी आपके इस लेख को अपने फेसबुक वाल पर शेयर किया है, ताकि मेरे मित्र भी आपके लेख को पढ़कर ज्ञान विस्तार सकें।

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    3. फिलहाल मेरा कोई फ़ेसबुक आइ डी नहीं है, जब मैं इसे बना लूँगी तो आपके साथ शेयर करूँगी.. कॉमेंट के लिए धन्यवाद !

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  9. बहुत सुंदर लेख
    रिश्तो की अहमियत समझना चाहिए

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    1. एक नई दिशा पर आपका सदा स्वागत है..कॉमेंट के लिए धन्यवाद !

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